पहाड़ी में गुफा और कंदराओं का प्राकृतिक स्थान

नवरात्र: कामाक्षरी माता का प्राचीन मंदिर

By: Rakesh Verma

Published: 08 Oct 2021, 05:09 PM IST

मेरियाखेड़ी. जिले के अरावली की उपत्यकाओं में कई स्थान आज भी अपने आप में कई पहलुओं को समेटे हुए है। ऐसा ही धमोतर पंचायत समिति के मेरियाखेड़ी के निकट पहाड़ी और गुफा में कामाता का मंदिर काफी पुराना है। कामाता का क्षेत्र प्राकृतिक और पर्यटन की दृष्टि से अलग ही महत्व रखता है। यहां गुफाएं, कंदराए और खोह होने से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। यहां नवरात्र में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है। प्रतापगढ़ जिले के अरावली की पर्वत शृंखला में उत्तर दिशा में एमपी सीमा के पास मेरियाखेड़ी और खोरिया गांव के बीच पर्वतीय क्षेत्र में कामाता का स्थान है। जो जमीन से करीब चार सौ फीट ऊंचाई पर पहाड़ की गुफाओं में करीब 80 फीट तक चौड़ाई वाले इलाके में खोह है। यहां गुफा में कामाक्षरी माता का मंदिर भी है। जहां कई श्रद्धालु पहुंचते है। यहां पहाड़ी में स्थित कामाता स्थान वर्षों पुराना है। इसे कामेश्वरी माता के नाम से जाना जाता है। यहां चट्टान में एक गुफा में पानी का स्रोत है। करीब 20 फीट गहरी गुफा है। गर्मी के मौसम में भी यहां पानी की उपलब्धता होती है। इस गुफा में बांस या लकड़ी डालने से करीब एक लीटर पानी बाहर आता है। जो गड्ढे में एकत्रित होता है।
बारिश में मनमोहक नजारा
कामाता प्राकृतिक स्थल में बारिश के दौरान नजारा मन मोह लेता है। यहां करीब 80 फीट ऊंचाई पर पहाडिय़ों से बहता झरना मन मोह लेता है। यहां हरियाली अमावस्या पर मेला भी लगता है। हालांकि यहां जो आज भी विकास की बाट जोह रहा है। यहां मंदिर जाने के लिए सडक़ तक नहीं है। मात्र कच्चा व पथरीला रास्ता है, जिससे लोग पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचते हैं। वर्षों बाद भी सडक़ नहीं बनी है।

रामद्वारा में नवरात्रि में अखंड रामायण पाठ

प्रतापगढ़. रामस्नेही संप्रदाय के संत दिव्येश राम महाराज के सानिध्य में रामद्वारा में नवरात्र में राम चरित मानस का पाठ किया जा रहा है। यहां प्रतिदिन सुबह 8.15 बजे आरती होती हैं। इसके बाद रामायण पाठ शुरू हो जाते हैं। संत दिव्येश राम महाराज ने बताया कि मानस की प्रत्येक चौपाई एक मंत्र हैं जो व्यक्ति को जीवन जीने की कला सिखाती है। मानव को कई रोगों से मक्ति दिलाती हैं। रामद्वारा परिवार द्वारा भक्तों के लिए रात में रुकने की भी पूरी व्यवस्था की गई है। नवरात्रि में जितना हो सके उतना प्रभु नाम स्मरण करना चाहिए। इससे दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिलती हैं।

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