अफीम नीति में बदलाव को लेकर उग्र हुए किसान

अफीम नीति में बदलाव को लेकर उग्र हुए किसान
pratapgarh

Devi Shankar Suthar | Updated: 17 Jul 2019, 11:31:11 AM (IST) Pratapgarh, Pratapgarh, Rajasthan, India


भारतीय किसान संघ का प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
अफीम नीति में मार्फिन का नियम हटाकर सभी पट्टे बहाल करने तथा देश के कानून से धारा 8/29 हटाने की मांग


भारतीय किसान संघ का प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
अफीम नीति में मार्फिन का नियम हटाकर सभी पट्टे बहाल करने तथा देश के कानून से धारा 8/29 हटाने की मांग
प्रतापगढ़
अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जिले के अफीम उत्पादक किसानों ने मंगलवार को यहां सचिवालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। नारेबाजी करते हुए उन्होंने अतिरिक्त जिला कलक्टर गोपाल स्वर्णकार को प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। भारतीय किसान संघ के बैनर तले किए गए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में जिले के किसान शामिल हुए। इस मौके पर भारतीय किसान संघ के प्रदेश संगठन मंत्री सोहन लाल आंजना ने बताया कि सरकार ने नई अफीम नीति जो लागू की गई है। उसमें मार्फिन को लेकर 80 प्रतिशत किसानों के पट्टे काटे जा रहे हैं। पिछले 30 सालों से जो किसान अफीम की खेती कर रहे हैं, उनके पट्टे काट दिए गए हैं। ऐसे में ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की गई है कि पुरानी पद्धति जो औसत के आधार पर पट्टे जारी किए जाते थे, उसी को आधार मानकर पट्टे जारी किए जाए। 10 सूत्रीय मांग पत्र में एक मुख्य मांग एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/29 का दुरुपयोग हो रहा है। उसको कानून से हटाने की मांग की गई है। इस कानून के तहत तस्करी में सहयोग करने की धारा किसानों के लिए काफी भारी साबित हो रही है। इसमें 90 फीसदी से ज्यादा निर्दोष किसानों को फंसा कर जेल में भर दिया गया है। मुकदमा चलने के बाद इस तरह के मामलों में सभी किसान निर्दोष साबित हुए हैं। ऐसे में किसानों को न्याय दिलाने के लिए इस धारा का हटाया जाना बेहद जरूरी है। ज्ञापन में संघ की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि इन मांगों पर विचार नहीं किया गया और कटे हुए पट्टे बहाल नहीं किए जाते हैं तो किसान संघ व्यापक स्तर पर आंदोलन करेगा।
किसान संघ की यह है मांगे
मार्फिन का नियम बिल्कुल हटाया जाए।
किसानों के पट्टे पूर्व की भांति औसत के आधार पर ही जारी किए जाएं।
देश के कानून से धारा 8/29 हर हाल में हटाई जाए।
मुखिया के घर किए जाने वाले अफीम के कच्चे तोल को पूर्णतया बंद किया जाए।
अफीम की बुवाई के 40 दिन के अंदर अंदर फसल की नपती की जाए, वो भी तने से हो, न की पत्ते से, उसमें भी पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
अफीम का भाव सरकार व प्रशासन 25 हजार रुपए प्रति किलो के हिसाब से किसान को दें।
सन 1998 से अभी तक के वर्षों में विभिन्न कारणों से कटे पट्टे किसानों के बहाल किए जाए।
अफीम की गुणवत्ता जांचने के लिए प्रारंभिक तौल केंद्र को ही अंतिम तोल केंद्र माना जाए।
भ्रष्टाचार को पूरी तरह से बंद करने के लिए अधिकारी और किसान के बीच की कड़ी मुखियाओं की पद्धति बंद की जाए।
जब अफीम नारकोटिक्स विभाग के अंतर्गत आती हैं तो डोडा चूरा भी नारकोटिक्स विभाग के अंतर्गत ही रखा जाए। डोडा चूरा नष्टीकरण की बजाय उसका जैविक खाद बनाने की पद्धति लागू की जाए। क्योंकि डोडा चूरा के अंदर अफीम की मात्रा 02 प्रतिशत से भी कम होती है। जो नशे के अंतर्गत नहीं आता है।
यह रहे मौजूद
बैठक व प्रदर्शन और ज्ञापन के दौरान कई किसान मौजूद थे। जिसमें किसान संघ के जिलाध्यक्ष पन्ना लाल डांगी, सोहनलाल आंजना, उपाध्यक्ष मुन्नालाल तेली, बहादुरलाल आंजना, जिला सह मंत्री भंवरलाल डांगी, जिला कोषाध्यक्ष नंदलाल गुर्जर, गोवर्धनलाल गुर्जर, जिला युवा प्रमुख दिलीप आंजना, जिला कार्यकारिणी सदस्य रामचंद्र आंजना, छोटी सादड़ी तहसील अध्यक्ष राजमल जनवा, उपाध्यक्ष नानालाल धाकड़, जैविक प्रमुख सुनील कुमावत, अरनोद तहसील अध्यक्ष गिरजा शंकर लोहार, तहसील मंत्री सूरज आंजना, प्रतापगढ़ तहसील अध्यक्ष बहादुरलाल आंजना, तहसील मंत्री मुकेश पाटीदार, पुष्कर पाटीदार आदि मौजूद थे।

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