प्रतापगढ़-मंदसौर मार्ग पर ग्रामीण परेशान, समय पर नहीं मिलती बसें

प्रतापगढ़-मंदसौर मार्ग पर ग्रामीण परेशान, समय पर नहीं मिलती बसें

Rakesh kumar Verma | Publish: Mar, 28 2018 10:23:59 AM (IST) Pratapgarh, Rajasthan, India

-सुबह बस नहीं होने के कारण चलती है ओवरलोड़ बस

मोखमपुरा. प्रतापगढ़ से मंदसौर आने-जाने ने लिए यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंदसौर जाने के लिए सुबह जल्दी बस नहीं होने के कारण डाबड़ा, कल्याणपुरा, नाथुखेड़ी, घोटारसी सहित कई गांवों के ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों से मंदसौर रोजगार के लिए जाने वाले ग्रामीणों को सुबह जल्दी बस नहीं मिलने पर उन्हे परेशानी उठानी पड़ रही है।
पहले चलती थी अब हो गई बंद
कुछ समय पहले तक प्रतापगढ़ से मंदसौर जाने के लिए सुबह तीन बसें संचालित की जा रही थी। यह बसें करीब तीन माह से बंद है। जिसके चलते ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रतापगढ़ से मंदसौर के लिए सुबह जल्दी बसें संचालित करवाने की मांग की है।
चल रही ओवरलोड़ नहीं होती कोई कार्रवाई
प्रतापगढ़ से मंदसौर के लिए बसें कम होने से संचालित बस रोजाना ओवलोड़ होकर चल रही है। जिसके चलते कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं पुलिस प्रशासन की ओर से भी इन ओवरलोड़ बसों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सडक़ मार्ग खराब, वाहन चल रहे तेज
प्रतापगढ़ मंदसौर मार्ग निर्माणाधीन है, इसके बावजूद निजी बसें तेज रफ्तार से चल रही है। जिसके कारण कई बार तेज रफ्तार के चलते सडक़ मार्ग से गिट्टी उछलकर वाहन चालकों व गांवों में लोगों को लग जाते है। वहीं मोखमपुरा व कुणी गांव में तेज रफ्तार वाहनों के कारण स्कूली बच्चों को खतरा बना रहता है। जिसकी कई बार ग्रामीण शिकायत भी कर चुंके है लेकिन तेज रफ्तार वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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कांठल में फैली महुए की मादकता
महुए के पेड़ पर पकने लगे फूल
एकत्रित करने में जुटे ग्रामीण
बरखेडी
चैत्र माह के शुरू होते ही कांठल में महुए के पेड़ों से महुआ के फूल पककर गिरने लगे है।इससे ग्रामीण इन फूलों को एकत्रित करने में जुटे हुए है। फूल पकने से महक वातावरण में घ्ुाली हुई है। जो मादकता को एहसास करा रही है।
महुए के पेड़ों पर इन दिनों महुए के फूल पकने के बाउ जमीन पर गिरने लगे है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इन फूलों को एकत्रित करने में जुटे हुए है। सुबह होते ही लोग महुए के पेड़ के निचे लोग पहुंच जाते है।गांवों के लोगों ने इन पेड़ों को आपस में बंटवारा भी किया हुआ है।
अपनी सीमाओं में इन पेड़ों को आपस मे बांट लेते है। इन पेड़ों से दो तरह की आमदनी होती है।पके फूलों एकत्रित कर बाजार में बेचते है।इससे देसी शराब बनाई जाती है।
जबकि बाद में बीजों को एकत्रित कर तेल निकाला जाता है। जो औषधियों और साबून बनाने में काम आता है।

दो प्रकार की होते है महुए
महुए दो प्रकार के होते है। जिसमें से एक महुए के फूल फीके व कड़वे होते है। जिनको देसी शराब बनाने के काम मे लिए जाता है।दूसरे मीठे होते है। जो खाने के उपयोग में लिए जाते है।ग्रामीण क्षेत्र में कुछ लोग इनके फूलों को उबाल कर अर्क निकालते है।जो खाने के उपयोग में लेते है। ग्रामीणों ने बताया की फूलों को इक_ा करके पानी में उबाल कर इनमें से रस निकाल कर के गेहूं के आटे में मिलाकर खाया जाता है।
होती है आमदनी
महुए के फूलो ंसे लोगों को आमदनी होती है। महुए के फूल बाजार में 10 से 50 रुपए प्रति किलो तक बिकते है।
फूलों के झडऩे के बाद इन पेड़ों से डोलमा फल प्राप्त होते है। जिसका तेल निकाला जाता है।जो बाजार में मंहगे दामों में बिकता है।इस तेल का कई तरह की औषधियों में उपयोग किया जाता है।

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