निजी स्कूल पांच वर्ष से पहले नहीं बदल सकेंगे यूनिफॉर्म

शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों के लिए जारी किए निर्देश

कम से कम तीन दुकानों पर मिले पाठ्य पुस्तकें
वेबसाइट पर दर्शाएं पुस्तकों के नाम

By: Ram Sharma

Published: 29 Mar 2019, 12:06 PM IST



प्रतापगढ़. निजी स्कूलों में यूनिफॉर्म, पुस्तकें और स्टेशनरी आदि के नाम पर अभिभावकों से की जाने वाली भारी भरकम वसूली पर रोकथाम के लिए शिक्षा विभाग ने कवायद शुरू की है। इसके तहत शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत निजी स्कूलों को अपने पाठ्यक्रम की पुस्तकों की सूची सत्र शुरू होने के एक माह पहले ही स्कूल की वेबसाइट पर डालनी होगी। इसी तरह स्कूल स्टेशनरी और अन्य शिक्षण सामग्री एक निश्चित दुकान से लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। पांच वर्ष से पहले यूनिफार्म भी नहीं बदल सकेंगे। इन निर्देशों के तहत निजी विद्यालय अब अभिभावकों से यूनिफार्म, जूते, मौजे, टाई, पुस्तकें आदि के नाम पर भारी रकम वसूल नहीं कर पाएंगे। इन निर्देशों की अवहेलना होने पर विद्यालय की मान्यता रद्द की जा सकती है। विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे स्कूलों पर निगरानी रखें और शिकायत मिलने पर कार्रवाई करें।

स्कूलों में अप्रेल से नया शिक्षण सत्र शुरू हो रहा है। प्रवेश के समय निजी स्कूलों यूनिफॉर्म, पुस्तकें, स्टेशनरी और अन्य शिक्षण सामग्री के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूलते हैं। अभिभावकों को एक निश्चित दुकान या स्कूल में बने स्टोर से ही पुस्तकें लेने के लिए बाध्य किया जाताहै। कई स्कूलों में तो अंदर ही बुक स्टोर खुले रहते हैं। अभिभावकों को यहीं से सामान लेने के लिए बाध्य किया जाता है। सामान भी बाजार दर से ज्यादा रेट पर होता है। ऐसे में अभिभावकों पर आर्थिक भार पड़ता है। इन शिकायतों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने ये दिशा निर्देश जारी किए हैं।

निजी स्कूलों के लिए ये निर्देश हुए जारी
-निजी विद्यालय अपनी सुविधानुसार एनसीईआरटी या राजस्थान पाठ्यपुस्तक मण्डल/ प्रारम्भिक शिक्षा बोर्ड के साथ ही निजी प्रकाशकों की पाठ्यक्रम के मुताबिक पुस्तकें लागू कर सकेंगे। लेकिन इसके लिए यह अनिवार्य है कि शिक्षण सत्र प्रारम्भ होने से कम से कम एक माह पूर्व पुस्तकों की सूची, लेखक एवं प्रकाशक का नाम तथा मूल्य को विद्यालय के सूचना पट़्ट एवं स्वयं की वेबसाइट पर दर्शाएं, जिससे कि अभिभावक खुले बाजार में पुस्तकों को अपनी सुविधा अनुसार क्रय कर सकें।
- पुस्तकों के अलावा स्कूल ड्रेस, टाई, जूते और कॉपियां आदि स्टेशनरी आइटम भी ख्ुाले बाजार से क्रय करने को स्वतंत्रत रहेंगे।
- किसी भी शिक्षण सामग्री पर विद्यालय के नाम का अंकित नहीं कर सकेगे। न ही किसी दुकान विशेष को इन सामग्री के लिए अधिकृत करेंगे और ना ही अभिभावक दबाव बनाएंगे।
- कम से कम पांच वर्ष तक युनिफार्म नहीं बदल सकेंगे।
- निजी विद्यालयों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विद्यालय की ओर से अनुशंषित किताबें, युनिफार्म इत्यादि कम से कम तीन स्थानीय विक्रेताओं के पास उपलब्ध हो।

Ram Sharma
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