कांठल में भरपूर पानी, गेहूं का बढ़ाया रकबा

प्रतापगढ़. जिले में इस बार अंतिम दौर तक बारिश जारी। इससे खेतों में नमी है। वहीं जलाशय भी लबालब भरे हुए है। ऐसे में कृषि विभाग ने भी रकबे में बढ़ोतरी के साथ गेहंू का रकबा बढ़ाया है। जबकि सरसों का रकबा भी गत वर्ष के बराबर किया गया है।

By: Devishankar Suthar

Published: 14 Oct 2021, 07:49 AM IST


- कृषि विभाग ने रबी बुवाई की तैयारियों में जुटा
-गत वर्ष एक लाख 39 हजार हैक्टयेर में थी बुवाई
-इस वर्ष एक लाख 40 हजार के करीब किया लक्ष्य
प्रतापगढ़. जिले में इस बार अंतिम दौर तक बारिश जारी। इससे खेतों में नमी है। वहीं जलाशय भी लबालब भरे हुए है। ऐसे में कृषि विभाग ने भी रकबे में बढ़ोतरी के साथ गेहंू का रकबा बढ़ाया है। जबकि सरसों का रकबा भी गत वर्ष के बराबर किया गया है।
गौरतलब है कि इस वर्ष जिले में बारिश का दौर अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक भी जारी है। ऐसे में खेतों में नमी बनी हुई है। वहीं अभी खेतों में बुवाई जैसी स्थिति भी नहीं है। पर्याप्त मात्रा में जलाशय लबालब भरे हुए है। इससे रबी फसल अच्छी होने की उम्मीद है। इसे देखते हुए विभाग की ओर से रबी बुवाई का लक्ष्य तैयार किया गया है। वहीं कई इलाकों में बुवाई भी शुरू हो गई है। कृषि विभाग की ओर से
इस बार गेहूं का रकबा बढ़ाया गया है। गत वर्ष गेहूं का रकबा 53 हजार 750 हैक्टेयर था। वहीं इस बार यह लक्ष्य 56 हजार 530 हैक्टेयर किया गया है। जबकि चना का रकबा कम किया गया है। दो हजार हैक्टेयर में कमी की गई है। इसी प्रकार सरसों का रकबा भी गत वर्ष के करीब ही रखा गया है।
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लहसुन की बुवाई शुरू
मोखमपुरा. क्षेत्र में लहसुन की बुवाई शुरू हो गई है। कई खेतों में अगेती किस्मों की बुवाई की जा रही है। इसके अलावा कई खेतों में लहसुन की भी बुवाई की जा रही है। क्षेत्र के सैलारपुरा गांव में भी इस वर्ष काफी खेतों में लहसुन की बुवाई की जा रही है। किसानों ने बताया कि खरीफ की फसल खराब होने से कई खेतों को हंकवा दिया था। ऐसे में अब लहसुन की फसल की बुवाई की जा रही है।
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जिले में बुवाई की स्थिति
फसल गत वर्ष इस वर्ष
गेहूं 53750 56530
जौ 3380 3420
चना 30460 28500
मसूर 5280 4900
सरसों 15310 15600
अलसी 1745 2030
अन्य 29854 29100
कुल 139140 139900
(आंकड़े कृषि विभाग के अनुसार)
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--की है रबी की तैयारी
इस वर्ष अंतिम दौर तक बारिश हो रही है। ऐसे में पानी की पर्याप्तता है। इसे देखते हुए पानी वाली फसलों की बुवाई पर अधिक जोर है। वहीं इस बार गेहंू का रकबा भी बढ़़ाया गया है। जबकि सरसों का रकबा गत वर्ष के बराबर रखा गया है।

भूरालाल पाटीदार, उप निदेशक, कृषि विस्तार, प्रतापगढ़
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