विज्ञान पढऩा है तो ही मिलेगी हॉस्टल की सुविधा, अन्यथा करना होगा पलायन

विज्ञान पढऩा है तो ही मिलेगी हॉस्टल की सुविधा, अन्यथा करना होगा पलायन

By: Rakesh Verma

Published: 20 Jul 2018, 10:25 AM IST

प्रतापगढ़. जिला मुख्यालय पर बांसवाड़ा रोड स्थित टीमरवा गांव में जनजाति विभाग की ओर से एकलव्य जनजाति आवासीय बालिका छात्रावास संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में जनजाति वर्ग की तकरीबन 350 छात्राएं यहां अध्ययनरत हैं। कक्षा 6 से 12वीं तक संचालित विद्यालय में कक्षा 11वीं में केवल विज्ञान विषय संचालित किया जा रहा है। जिससे कला और वाणिज्य संकाय के अभाव में छात्राओं को 10वीं कक्षा के बाद यहां से पलायन करने को विवश है।
इसलिए हो रहा पलायन
कक्षा 6 से 12वीं तक संचालित हॉस्टल में 11वी और 12वीं कक्षा में केवल विज्ञान विषय संचालित किया जा रहा है। जिसमें 10वीं कक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशात अंक लाने पर ही छात्राओं को 11वीं कक्षा में प्रवेश दिया जाता है। जबकि कई छात्राओं को बेहतर प्रयास के बाद भी वांछित प्रतिशत नहीं मिलने से वे इस विषय के लिए अपात्र हो जाती हैं। जिसके चलते कक्षा 12वीं में छात्राओं की पर्याप्त संख्या नहीं हो पाती है। इससे अन्य हॉस्टल की छात्राओं को प्रवेश देना हॉस्टल प्रबंधन की मजबूरी होती है। वहीं यहां अध्ययनरत छात्राओं का अन्य विद्यालयों की ओर रूख करना पड़ता है। इस सत्र में तकरीबन 18 छात्राओं के अंक कम होने पर उन्हें प्रवेश नहीं मिल सका जिसके चलते उन्हें अन्यत्र स्कूल में प्रवेश लेने की विवशता रही।
ये है समाधान
यदि विभाग की ओर से हॉस्टल मेें कला और वाणिज्य संकाय बढ़ा दिए जाते हैं तो यहां वांछित प्रतिशत से कम अंक वाली छात्राओं के समक्ष विकल्प रहने से छात्राओं का यहां से पलायन नहीं हो सकेगा। वहीं उनके अध्ययन में निरंतरता रह सकेगी।
ये है प्रवेश की प्रक्रिया
इस छात्रावास में जनजाति वर्गकी कक्षा 5वीं उत्तीर्ण बालिकाओं को कक्षा 6 से प्रवेश दिया जाता है। बालिकाओं की रिटन टेस्ट के आधार पर मेरिट तैयार कर वरीयता अनुसार प्रवेश दिया जाता है।

समस्या हमारे ध्यान में है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत भी करा दिया है। शीघ्र ही कला संकाय को संचालित करने का प्रयास विभाग की ओर से किया जा रहा है।
सुमन मीणा, परियोजना अधिकारी, जनजाति विभाग प्रतापगढ़

Rakesh Verma Bureau Incharge
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