VIDEO: नहीं उठा तेंदूपत्ता, आधी हुई आय

VIDEO: नहीं उठा तेंदूपत्ता, आधी हुई आय

Rakesh kumar Verma | Publish: Mar, 17 2019 11:14:20 AM (IST) Pratapgarh, Pratapgarh, Rajasthan, India

जिले में इस वर्षवन विभाग के 13 करोड़ के हुए ठेके

गत वर्ष हुई थी 26 करोड़ रुपए की आय
प्रतापगढ़ प्रदेश समेत अन्य राज्यों में गत वर्ष के तोड़े गए तेंदुपत्ता का उठाव नहीं हो पाया है। ऐसे में इस वर्ष के लिए वन विभाग की ओर से दिए गए तेंदुपत्ता तुड़ाईके ठेकों से आय गत वर्षके मुकाबले आधी ही रह गई है। यही हाल जिले का भी रहा है। प्रतापगढ़ जिले में गत वर्ष 26 करोड़ रुपए के ठेके हुए थे। ऐसे में इस वर्ष हुए ठेके से 13 करोड़ 91 हजार रुपए की आय हुई है।
प्रतापगढ़ के जंगल में काफी पेड़
जैव विविधता के कारण प्रतापगढ़ के जंगल काफी समृद्ध है।ऐसे में यहां टीमरू के पेड़ भी काफी पाए जाते है। इनके पत्तों से बीड़ी बनाई जाती है। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार यहां जिले में प्रदेश के करीब 40 प्रतिशत ठेके से आय प्रतापगढ़ जिले से होती है।

प्रदेश का 40 प्रतिशत तेंदूपत्ता का उत्पादन प्रतापगढ़ में
गौरतलब है कि प्रदेश में कुल उत्पादन होने वाले में से 40 प्रतिशत तेंदूपत्ता प्रतापगढ़ के जंगलों से होता है। जबकि 6 0 प्रतिशत उत्पादन प्रदेश के अन्य जंगलों में होता है। यहां के जंगलों में कई प्रजातियों के पेड़ पाए जाते हंै। इनमें तेंदू के पेड़ भी हैं। ऐसे में यहां तेंदूपत्ता का उत्पादन भी अधिक होता है। इस वर्ष भी तेंदूपत्तों के ठेकों में प्रतापगढ़ में 13 करोड़ रुपए के ठेके हुए है।

जिले में यहां से होती है पत्ता संग्रहण
जिले में सभी तरफ जंगल है। ऐसे में ठेके भी जिले के सभी इकाइयों से होते है। इसमें बांसी, लालपुरा, लसाडिय़ा, छोटीसादड़ी, सियाखेड़ी, साठोला, देवगढ़, धमोतर, दलोट, रामपुरिया जानागढ़, प्रतापगढ़, खूंता मूंगाणा, कातिजाखेड़ा भरकुंडी, लोहागढ़ अंबाव, झडोली मय अखिया मानपुर, मांडवी पीपल्या, भणावता चरी, जायखेड़ा, पीपलखूंट, डूंगलावाणी इकाई के ठेके प्रति वर्षदिए जाते है।

गत पांच वर्षों की स्थिति
वर्ष आय
2012-13 60811257
2013-14 38209801
2014-15 27252033
2015-16 30307406
2016-17 86762726
2017-18 267246993
2018-19 130091588
(आंकड़े वन विभाग के अनुसार रुपए में)

गत वर्षका नहीं हुआ उठाव
तेंदूपत्ता का गत वर्षका उठाव नहीं हुआ है। देश के बीड़ी बनाने वाली कंपनियों की ओर से मांग कम है।इस कारण ठेकेदारों के गोदामों में अभी काफी पत्ता पड़ा हुआ है।इसे देखते हुए इस वर्षहुई नीलामी में दरेें भी कम भरी गई है। जिससे गत वर्ष के मुकाबले आधी आय हुई है।
संग्रामसिंह कटियार
उपवन संरक्षक, प्रतापगढ़

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