कांठल में बदला मौसम, दिनभर बारिश

प्रतापगढ़. कांठल में सोमवार को मौसम बदल गया। सुबह से ही बादल छाए रहे। तपन और उमस बनी रही। दोपहर बाद में काली घटाएं छाने लगी। जिससे तेज बारिश शुरू हो गई। इसके बाद शाम तक जिले में अगल-अलग इलाकों में कहीं झमाझम तो कहीं फुहारों का दौर चलता रहा। इससे फसलों को काफी राहत मिली है।

By: Devishankar Suthar

Published: 07 Sep 2021, 07:38 AM IST


-कभी झमाझम तो कभी फुहारों का दौर
---खेतों से बह निकला पानी
-प्रतापगढ़. कांठल में सोमवार को मौसम बदल गया। सुबह से ही बादल छाए रहे। तपन और उमस बनी रही। दोपहर बाद में काली घटाएं छाने लगी। जिससे तेज बारिश शुरू हो गई। इसके बाद शाम तक जिले में अगल-अलग इलाकों में कहीं झमाझम तो कहीं फुहारों का दौर चलता रहा। इससे फसलों को काफी राहत मिली है।
जिले में गत दिनों से तेज गर्मी से उमस बनी हुई थी। जिससे लोग पसीने से तरबतर हो रहे थे। वहीं सेामवार को मौसम बदला। जिलेभर में रुक-रुककर खंडवृष्टि हुई। इससे सडक़ों पर पानी बह निकला। शहर में करीब एक घंटे तक बारिश हुई। जिससे मौसम सुहावना हो गया। -=-
अरनोद. क्षेत्र में काफी दिनों बाद बारिश हुई। हालांकि दिनभर रुक-रुककर बारिश होती रही। ऐसे में खेतों में पानी बहकर निकला। बारिश से फसलों को काफी फायदा हुआ है। वहीं शाम तक खंड बारिश हुई।
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आधे धंटे में एक इंच बारिश
-----धरियावद. क्षेत्र में सोमवार दिनभर उमस एवं गर्मी के बीच दोपहर बाद मौसम में एकाएक बदलाव देखने को मिला। तेज हवा के बीच आसमान में छाई काली घटाएं 15 से 30 मिनट तक जमकर बरसी। जिससे कही जगह जलभराव के साथ चहुंओर पानी का दरिया बहने लगा। तेज बरसात के चलते जहां आमजन को गर्मी से राहत मिली। वहीं काश्तकारों के चेहरें खिल उठे। आलोकऋतू वैधशाला अनुसार सोमवार शाम 5 बजे तक 28 मिमी बरसात दर्ज की गई।

धरियावद में कम बारिश, जाखम खाली होने से चिंता
धरियावद. तहसील क्षेत्र में मानसून की बेरूखी एवं कम बरसात ने क्षेत्र के काश्तकारों एवं किसानों के लिए परेशानी खडी कर दी। कम बरसात के चलते इस बार खेतो में खडी खरीब फसल की पैदावार में कमी की आाशंका है। वहीं अब संभाग के बड़े बांधो में शुमार 31 मीटर भराव क्षमता वाला जाखम बांध भी मानसून की बेरूखी के चलते अब तक रीता पड़ा हुआ हैं। बांध का जलस्तर कुल भराव क्षमता के मुकाबले 5 सितम्बर तक 21.10 मीटर दर्ज किया गया। जबकि पूरे धरियावद तहसील क्षेत्र को जाखम बांध के पानी से नहरों द्वारा रबी फसल के लिए सिंचाई होती है। मुख्यालय से 28 किमी दूर सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य में 31 मीटर भराव वाले जाखम बांध में केचमेंट एरिया में गिरने वाले पानी से बांध का जलस्तर बढ़ता है। बांध में छोटीसादड़ी का कुछ भाग, धमोत्तर, बारावारदा के अलावा मध्यप्रदेश के नीमच एवं जीरन इसके केचमेंट एरिया में आते हैं। इन जगहों पर होनी वाली बरसात का पानी जाखम बांध को भरने में सहायक होता। लेकिन इस बार इन इलाकों में मानसून की भारी कमी देखने को मिली।

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Devishankar Suthar
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