भाजपा की सहयोगी पार्टी में बड़ी बगावत, विधायक ने कहा बीजेपी से मिलकर अनुप्रिया कर रही हैं कुर्मी समाज का सौदा

भाजपा की सहयोगी पार्टी में बड़ी बगावत, विधायक ने कहा बीजेपी से मिलकर अनुप्रिया कर रही हैं कुर्मी समाज का सौदा

Ashish Shukla | Publish: Jul, 07 2018 10:13:05 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

नये राजनीतिक समीकरण सामने आते दिख रहे हैं

प्रतापगढ़. लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं वैसे नये नये राजनीतिक षडयंत्र शुरू हो गये हैं। भाजपा की सहयोगी पार्टी में बगावत के सुर उभरने से विपक्ष को बड़ा मौका मिलता दिख रहा है। 2014 के चुनाव में जिस दल के सहारे गठबंधन करके भाजपा ने यूपी में 73 सीटें हासिल कर लिया था। उसी पार्टी के विधाय़क ने अपनी नेता के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा दिया है। जिससे नये राजनीतिक समीकरण सामने आते दिख रहे हैं।

जी हां शनिवार को अपना दल एस के विधायक और अनुप्रिय़ा पटेल के काफी करीबी नेताओं में गिने जाने वाले प्रतापगढ जिले की विश्वनाथगंज सीट से विधायक आरके वर्मा ने अपनी नेता पर ही विरोध के बो बोल दिये। अपना दल (एस ) के विश्वनाथगंज से विधायक आर के वर्मा ने सोशल मीडिया पर कमेन्ट करते हुए लिखा कि जो अपनी माँ की नहीं हो सकती वो भाजपा और कुर्मी समाज की क्या होगी।उन्होने फेसबुक पर लिखा कि कुर्मी समाज का सौदा किया जा रहा है। बतादें कि वो कई दिनों से अनुप्रिया पटेल से नाराज चल रहे हैं। विधायक के इस बोल के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। विधायक की नाराजगी इस बात से भी समझी जा सकती है कि इसके पहले डॉ सोने लाल जयंती के कार्यक्रम लखनऊ में भी विधायक आरके वर्मा शामिल नहीं हुए थे।

अनुप्रिया के बढते कद पर विधायक का बड़ा वार

उनके ही पार्टी के विधायक ने ये बयान उस समय में दिया है जब अनुप्रिया पटेल का कद देश की राजनीति में बहुते तेजी से उभर रहा था। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद उनके संसदीय क्षेत्र में पहुंचकर लोकसभा चुनाव की बिगुल फूकते हैं। इतना ही नहीं अपना दल के जिला कार्यालय में खुद जाकर चाय की चुस्की लेते हैं। लेकिन उनके खेमें में इस बगावत से अनुप्रिया पटेल को जोर कता झटका लगा है।

पार्टी में हो सकती है टूट

जिस तरह से आरके वर्मा ने बयान दिया है उससे एक तरफ पार्टी के कार्यकर्ता तो उनके खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। लेकिन दूसरी तरफ ऐसा भी माना जा रहा है कि विधायक पर अगर पार्टी कार्रवाई करती है तो पार्टी से कई नेता इस्तीफा भी दे सकते हैं। ऐसे में अपना दल एस के लिए ये खतरे की घंटी मानी जा रही है।

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