उपचुनाव में यूपी की इस सीट पर मुकाबला हुआ रोचक, सालों से किसी भी दल को दोबारा नहीं मिली जीत

उपचुनाव में यूपी की इस सीट पर मुकाबला हुआ रोचक, सालों से किसी भी दल को दोबारा नहीं मिली जीत
उपचुनाव में यूपी की इस सीट पर मुकाबला हुआ रोचक, सालों से किसी भी दल को दोबारा नहीं मिली जीत

Ashish Kumar Shukla | Updated: 12 Oct 2019, 08:51:34 PM (IST) Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

जातीय समीकरण से जानें चुनावी चाल

प्रतापगढ़. विधानसभा उपचुनाव में प्रतापगढ़ सदर सीट पर मुकाबला काफी रोचक माना जा रहा है। पिछले चार चुनाव की बात करें तो यहां पर किसी भी दल को दोबारा जीत का स्वाद नहीं मिल सका है। विधानसभा संख्या 248 की इस सीट पर हुए पिछले चार विधानसभा चुनावों में एक-एक बार समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली। तो 2012 में यहां से सपा के नागेन्द्र सिंह मुन्ना ने विजय का डंका बजाया। लेकिन एक बार फिर पुराना इतिहास दोहराते हुए 2017 के विधानसभा चुनाव में भी प्रतापगढ़ की जनता ने बदलाव करते हुए सपा प्रत्याशी को हरा दिया और जीत अपना दल एस उम्मीदवार की झोली में डाल दिया। संगम लाल गुप्ता 30 हजार से अधिक मतों से चुनाव जीत गये।

ये है पिछले बीस सालों का परिणाम

2002 की बात करें तो इस सीट पर भाजपा के उम्मीदवार हरिप्रताप सिंह को जनता ने जीत दिलाया। 2007 के चुनाव में बसपा के संजय तिवारी ने भाजपा उम्मीदवार को शिकस्त देते हुए जीत अपने नाम दर्ज कर लिया। इसके बाद 2012 के चुनाव हुए तो इस सीट पर सपा के नागेन्द्र सिंह मुन्ना ने बड़े अंतर से चुनाव जीत लिया। 2012 के विस चुनाव में अमित शाह और अनुप्रिया पटेल से तालमेल बैठाने वाले व्यापारी से नेता बने संगम लाल गुप्ता को टिकट मिला तो जीत उनकी झोली में जा गिरी।

ढ़ाई साल विधायक रहने के बाद संगम का सफर लोकसभा की तरफ चल पड़ा सीट खाली हुई तो भाजपा अपना दल गठबंधन ने राजकुमार पाल को उतार दिया। सपा ने बृजेश वर्मा को बसपा ने रंजीत पटेल को टिकट दे दिया। इधर कांग्रेस ने भी अपने पुराने नेता नीरज तिवारी को मैदान में उतारा है। पुराने चुनावों को देखते हुए लोगों को लग रहा है कि फिर एक बार किसी नये दल को जीत का मौका मिल सकता है।

क्या है प्रतापगढ़ विधानसभा सीट के जातीय समीकरण

1- कुल मतदाता चार लाख 50 हजार पांच सौ ।
2- दो लाख 30 हजार पुरुष और दो लाख 20 हजार 500 महिला वोटर।
3-इस सीट पर 70 हजार ब्राह्मण मतदाता ।
4- 70 हजार दलित
5- 10 हजार कुशवाहा वोटर।
6- 60 हजार यादव वोटर।
7- 50 हजार पटेल वोटर
8- 23 हजार पाल वोटर।
9- 20 हजार वैश्य वोटर।
10- 35 हजार मुस्लिम वोटर।
13- सात हजार पाँच सौ प्रजापति
14, 13 हजार कायस्थ
कुछ मुसहर व चौहान बिरादरी की भी तादात है पांच हजार के आसपास है।

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