मुस्लिम युवकों ने लड़की को बदमाशों से छुड़ाने का किया प्रयास तो पुलिस ने उनके साथ किया ये बर्ताव

बुरी तरह घायल युवकों के साथ पुलिस ने किया मुजरिमों जैसा सुलूक। अब तक युवती का नहीं चल सका पता।

प्रतापगढ़. इलाहाबाद के चकिया निवासी अबू साद और नवाबगंज निवासी कैफ बाइक अभी प्रतापगढ़ के मांधाता थानाक्षेत्र के गजेह्ड़ा जंगल से गुजर ही रहे थे कि एक युवती ने उनसे अपनी बेटी को बचाने के लिये गिड़गिड़ाने लगी। उसकी बेटी को बोलेरो सवाल उठा लग गए थे। दोनों दोस्तों ने बाइक से ही बोलेरो का पीछा किया, पर उनकी बाइक पनियरा गांव के पास अनियंत्रित होकर पलट गयी। अबू शाद को गंभीर चोटें आयीं, जबकि कैफ को भी चोटें आयीं। सूचना पर पुलिस तो पहुंची पर उसने लड़की को बचाने के लिये युवकों की तारीफ करने के बजाय उनके साथ ही अपहरणकर्ताओं जैसा सुलूक किया, एक युवक को घसीट कर जीप में ले गए जबकि दूसरे को दर्द से कराहता हुआ वहीं छोड़ दिया।



ये चर्चा उस जगह के लोग कर रहे हैं जहां ये घटना हुई। जब पुलिस ने घायल युवक को बेदर्दी से खींचकर जीप में बैठाया था और उसकी हालत बिगड़ने लगी थी तो खुद ग्रामीणों ने ही पुलिस का विरोध भी किया था। इसके बाद पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया था। स्थानीय लोगों की माने तो दोनों युवकों का कसूर सिर्फ इतना था कि दोनों ने युवती को बचाने की कोशिश किया था। पर पुलिस ने उन्हीं के साथ मुजरिमों जैसा व्यवहार किया। घटना को बीते हुए दो दिन हो गए हैं, पर न तो युवती का पता है और न ही पुलिस के मुताबिक इस मामले में कोई रिपोर्ट लिखाने पहुंचा।




प्रत्यक्षदशियो की मानें तो जब पुलिस को इस घटना की सूचना मिली तो मौके पर पहुंची देल्हूपुर व मांधाता पुलिस गम्भीर रूप से घायल अबू साद को मौके पर तड़पता छोड़ कैफ को खींच कर मुलजिमों की तरह जीप पर बैठाया और मौका-ए-वारदात पर ले गई। आरोप है कि पुलिस वहां खाना पूर्ति करके घंटों बाद फिर लौट कर वहां पहुंची जहां अबूसाद गंभीर चोटों के दर्द से कराह रहा था और लोगों भीड़ इकट्ठा थी।



पुलिस कराहते युवक के साथ बेरहमी से पेश आई और जब हुए जब उसे भी जीप में खींच कर बैठाया और घायल युवक को जीप के अन्दर ही उल्टी होने लगी तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और लोगों ने पुलिस के इस कृत्य का विरोध किया तो दूसरे साधन से उसे उपचार के लिये जिलाचिकित्सालय भेजवाया गया, जबकि कैफ को पूरी रात थाने पर बैठाये रखा।



सुबह अबूसाद जिला चिकित्सालय से डिस्चार्ज होकर आया तो उसे भी थाने में रोके रखा गयाद्य दोपहर बाद दोनो को रिहा किया गया। अब सवाल यह उठता है की किसी के मदद करने की सजा यदि पुलिस के निगाह में इतना बड़ा अपराध है तो किसी पीडित की मदद कोई कैसे करेगा ।



उधर युवती के अपहरण की बात देखी जाय तो इन युवकों और वहां मौजूद लोगों के मुताबिक बोलेरो सवार लोगों ने युवती का अपहरण किया और उसे लेकर भागे। इस बात के सैकड़ों लोग गवाह हैं, पर एसओ के मुताबिक न तो साथ रही महिला का कहीं पता चला और न ही अभी तक कोई व्यक्ति वादी बनकर रिपोर्ट लिखाने थाने आयाद्य ऐसे में यह घटना पहेली बन कर रह गई है। पुलिस भी दो दिन बीत गये लेकिन अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। बहरहाल मामला कुछ भी हो छेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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रफतउद्दीन फरीद
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