राजा भैया कैसे जिताएंगे जिला पंचायत अध्यक्ष, कांग्रेस से गठबंधन की चर्चा, निर्दलियों पर नजरें

प्रतापगढ़ में सपा है सबसे मजबूत तो सत्ताधारी दल भाजपा भी है मैदान में। पहली बार राजा भैया को अपने समर्थक को जितवाने के लिये लगाना पड़ रहा है एंड़ी चोटी का जोर। इस बार राजा भैया के गढ़ में भी उनका कोर्इ समर्थक निर्विरोध जिला पंचायत सदस्य नहीं बन सका।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

प्रतापगढ़. जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में जनसत्ता दल की प्रत्याशी की जीत बाहुबली विधायक राजा भैया और उनकी पार्टी के लिये नाक का सवाल बन गयी है। एक तरफ सपा तो दूसरी तरफ सत्ताधारी बीजेपी भी मुकाबले में है। नामांकन के बाद अब सत्तापक्ष और विपक्षी पार्टियों की नजरें निर्दलीयों पर हैं। राजा भैया की पार्टी 45 सदस्य होने का दावा कर चुकी है, लेकिन बदले समीकरण में उनका यह दावा हवा-हवाई ही लग रहा है। हालांकि सत्ता पक्ष को हराने के लिये राजा भैया को कांग्रेस समर्थित विजयी जिला पंचायत सदस्यों का साथ मिलता भी दिख रहा है। इसके संकेत भी मिलने लगे है। कांग्रेस के खेमे के आधा दर्जन से अधिक जिला पंचायत सदस्यों के वोट जनसत्ता दल को दिला सकती है। पर बिना निर्दलीय बात बनने वाली नहीं।

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कहा जा रहा है कि राजा भैया और उनके धुर राजनीतिक विरोधी कहे जाने वाले कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिये सामंजस्य बैठ गया है। तीन जुलाई को वोटिंग के दौरान कांग्रेस के करीब आधा दर्जन सदस्य खुलकर राजा भैया के समर्थन में वोटिंग कर सकते हैं। नामांकन के दौरान सामने आई तस्वीर से इसके संकेत भी मिले हैं। जनसत्ता दल की प्रत्याशी माधुरी देवी के नामांकन के दौरान कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता और प्रमापगढ़ के रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा 'मोना’ के प्रतिनिधि भगवति प्रसाद तिवारी खुद वहा मौजूद थे और जनसत्ता दल के नेताओं के साथ मुस्कुराकर फोटो भी खिंचवाई।

 

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क्या है समीकरण

प्रतापगढ़ जिला पंचायत में सबसे अधिक 17 सदस्य सीट सपा के पास तो 12 जनसत्ता दल के पास है। भाजपा के पास 7 और कांगेस के पास पांच सदस्य हैं। यहां निर्दलीयों की संख्या 14 है। ऐसे में अगर निर्दलीयों के वोट सपा में जोड़ दें तो उनकी संख्या 32 पहुंच रही है, जबकि जनसत्ता दल के साथ निर्दलीय आने पर आंकड़ा 25 पर जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के पांच वोट मिलने से राजा भैया मजबूत हो जाएंगे। हालांकि निर्दलीयों को अपने पाले में करना आसान नहीं। सत्ताधारी दल बीजेपी से लेकर सपा और जनसत्ता दल सब उन्हें साधने में जुटे हैं। बीजेपी को निर्दलीयों के साथ दूसरे दलों में भी सेंधमारी करनी होगी। मैदान में जनसत्ता दल की ओर से माधुरी देवी, सपा से अमरावती और बीजेपी से क्षमा सिंह के साथ ही भाजपा समर्थन से जीती जिला पंचायत सदस्य पूनम इंसान ने भी नामांकन किया है।


कम हुआ है दबदबा

दरअसल यह पहली बार है कि प्रतापगढ़ की कुंडा विधानसभा सीट से विधायक राजा भैया जिला पंचायत सदस्य चुनाव में अपने किसी समर्थक को अपने गढ़ में भी निर्विरोध नहीं जिता सके। पहले जहां उनके समर्थक दर्जन भर नेताओं के सामने जल्दी कोई चुनाव में खड़े होने से घबराता था वहीं आज समीकरण ऐसे बदले कि पूरी सियासी फिजा ही बदल गई। जिला पंचायत जैसे चुनाव में राजा भैया का सियासी वर्चस्व डगमगाता दिखाई दिया। अपने यादव बाहुल्य क्षेत्र में यादव, ठाकुर और पासी वोटों के सहारे सियासी दबदबा था। पर सपा से अलग होते ही यादव भी छिटक गए। कुंडा नगर पंचायत चुनाव में करीबी कहे जाने वाले गुलशन यादव ने राजा भैया समर्थक को हराया। सपा ने उन्हीं के क्षेत्र के छविनाथ यादव को जिलाध्यक्ष बना रखा है। दूसरी तरफ राजा के धुर विरोधी पूर्व सांसद रत्ना सिंह और शिव प्रकाश मिश्रा 'सेनानी’ भजपा खेमे में हैं। ये सब राजा भैया के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।


पहले भी कांग्रेस दे चुकी है समर्थन

जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस पहले भी राजा भैया समर्थित प्रत्याशी को समर्थन दे चुकी है। पिछले जिला पंचायत चुनाव में ही कांग्रेस ने राजा भैया के प्रत्याशी उमाशंकर का समर्थन किया था। इस बार भी कांग्रेस सदस्यों का वोट राजा भैया के समर्थन में जाता दिख रहा है।

रफतउद्दीन फरीद
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