हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार दे सकती है पैसा!

प्रॉजेक्ट को पूरा करने के लिए सरकार खुद फंड मुहैया करा सकती है। बाद में प्रॉजेक्ट डवलपर से रकम की वसूली होगी

नई दिल्ली। अगर आप एक ऐसे घर खरीदार है जिनको अभी तक पजेशन नहीं मिला है और उनके बिल्डर ने प्रोजेक्ट बीच में ही रोक दिया है तो आपके लिए राहत की खबर है। सरकार घर खरीदारों को राहत देने के लिए नए तरीके निकाल रही है। प्रॉजेक्ट को पूरा करने के लिए सरकार खुद फंड मुहैया करा सकती है। बाद में प्रॉजेक्ट डवलपर से रकम की वसूली होगी। रकम वसूली के लिए बिल्डर की संपत्ति बेचने पर जोर होगा। पिछले हफ्ते वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट अफेयर्स मनिस्ट्री की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

रियल एस्टेट में पिछले 6 महीने में सबसे ज्यादा बढ़ा निवेश
सरकार के क्लीन-मनी मिशन का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। साल 2017 की पहली छमाही में रियल एस्टेट सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी निवेश ऑल टाइम हाई पर चला गया। इस सेक्टर में निवेशकों ने 16 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है। नोटबंदी के बाद जहां रियल एस्टेट मार्केट में फॉर्मल इन्वेस्टमेंट बढ़ा है। वहीं, रियल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट (रेरा) और जीएसटी के लागू होने के बाद इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स को अच्छा रिटर्न की उम्मीद बनी है।

रियल एस्टेट कंसलटेंसी फर्म जेएलएल इंडिया की कैपिटल मार्केट रिसर्च में यह दावा किया गया है। रियल एस्टेट मार्केट की सबसे बी दिक्कत यह है कि अब मार्केट में पैसा नहीं है। पैसा न होने के कारण डवलपर्स न तो पुराने प्रोजेक्ट पूरा कर पा रहे हैं और ना ही नए प्रोजेक्ट लॉन्च कर पा रहे हैं। पीई इन्वेस्टमेंट बढऩे से मार्केट में पैसा आएगा, जिससे न केवल पुराने प्रोजेक्ट पूरे होंगे, बल्कि नए प्रोजेक्ट भी लॉन्च होंगे।
क्या है वजह : रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में पीई इन्वेस्टर्स का भरोसा काफी बढ़ गया है।

कितना बढ़ा निवेश
कैपिटल मार्केट रिसर्च के मुताबिक साल 2017 के पहली छमाही (जनवरी से जून 2017) के दौरान रियल एस्टेट सेक्टर में 16008 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जो अब तक की सभी सालों की पहली छमाही में सबसे अधिक है। साल 2007 में रियल एस्टेट मार्केट अपने पूरे चरम पर था, उस समय पहली छमाही में पीई इन्वेस्टमेंट 13067 करोड़ रुपए हुआ था।

सुनील शर्मा Desk
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