एचपीसीएल और रिफाइनरी के लिए की जमीन आवंटित

एचपीसीएल और रिफाइनरी के लिए की जमीन आवंटित

Sunil Sharma | Updated: 01 Sep 2017, 03:47:00 PM (IST) प्रोजेक्ट रिव्‍यू

इसके अलावा विभाग ने २५० एकड़ जमीन एचपीसीएल को अलग से मार्केटिंग जमीन के लिए दी है

नई दिल्ली। रिफाइनरी कम पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स के लिए मौके पर जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने को लेकर चल रही प्रक्रिया के तहत उद्योग विभाग ने ४५६३ एकड़ जमीन राज्य सरकार व एचपीसीएल के संयुक्त उपक्रम एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड के नाम कर दी है। इसके अलावा विभाग ने २५० एकड़ जमीन एचपीसीएल को अलग से मार्केटिंग जमीन के लिए दी है।

उद्योग विभाग ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय रिफाइनरी प्रोजेक्ट के लिए बाड़मेर जिले के पचपदरा में जमीन का आवंटन कर दिया था। लेकिन उस समय एचपीसीएल की योजना अलग से अपने स्तर पर ही मार्केटिंग टर्मिनल बनाने की नहीं थी। ऐसे में जमीन का अलग से आवंटन नहीं किया गया ता। लेकिन अब वर्तमान सरकार की ओर से किए गए एमओयू में एचपीसीएल की ओर से अपने स्तर पर अलग से मार्केटिंग टर्मिनल लगाया जा रहा है।

नाचना में १०५ एकड़
रिफाइनरी के लिए इंदिरा गांधी नहर के नाचना डेम से पानी पचपदरा लाया जाएगा। इसके लिए पाइप लाइन डाली जाएगी। लेकिन डेम पर रिजर्ववायर बनाने को लेकर १०५ एकड़ जमीन का आवंटन किया गया है।

एक पखवाड़े में लीजडीड
बाड़मेर के पचपदरा और जैसलमेर के नाचना में आवंटित जमीन की लीजडीड ९९ साल के लिए एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड के नाम होगी। एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड राज्य सरकार और एचीपसीएल का संयुक्त उपक्रम हैं। इसमें एचीपीसीएल की हिस्सेदारी ७४ फीसदी और राज्य सरकार की २६ फीसदी है। उधर, एचपीसीएल मार्केटिंग टर्मिनल को दी गई जमीन की लीजडीड एचपीसीएल के नाम होगी।

रिफाइनरी और इंट्रा स्टेट हवाई सेवा विस्तार को लेकर आज होगी चर्चा
राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में लगने वाले रिफाइनरी और इन्ट्रा स्टेट हवाई सेवाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोलियम व नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात करेंगी। मुख्यमंत्री सुबह साढ़े १0 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी। हालांकि वे बुधवार शाम को भी हेलिकॉप्टर से दिल्ली के लिए रवाना हुई, लेकिन मौसम खराब होने के कारण उन्हें वापस जयपुर लौटना पड़ा।

बेनामी संपत्ति पर आयकर विभाग की नजर
आयकर विभाग ने 1 करोड़ रुपए से अधिक की 14,000 प्रॉपर्टी की पहचान की है जिनके मालिक ने आयकर रिटर्न फाइल नहीं किया है। विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि यह प्रॉपर्टीज कैसे खरीदी गई और ओनर्स की इनकम का स्रोत क्या है।

विभाग को शक है कि यह प्रॉपर्टी ब्लैक मनी से खरीदी गई हो सकती है। वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि नोटबंदी से बड़े पैमाने पर ऐसे लोगों के बारे में पता चला है जिन्होंने संदिग्ध ट्रांजेक्शन किया है। आयकर विभाग ने 14,000 ऐसी प्रॉपटी की पहचान की है जिनके मालिक ने रिटर्न फाइल नहीं किया है। हर एक प्रॉपर्टी की कीमत 1 करोड़ रुपए से अधिक है।

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