प्रोपर्टी खरीदने को और आसान बनाएंगे ये टिप्स

किसी भी अचल सम्पति को खरीदते वक्त सबसे पहले विक्रय अनुबन्ध पत्र

जयपुर। किसी भी अचल सम्पति को खरीदते वक्त सबसे पहले विक्रय अनुबन्ध पत्र किया जाना जरूरी है। अखबारों में आम सूचना निकाल कर तथा अन्य जानकारी लेने के बाद सम्पति का विधीवत विक्रय पत्र पंजीकृत कराया जाता है।

1. विक्रय अनुबन्ध हमेशा नॉन जुड़ेशियल स्टाम्प पर संतुलित भाषा में दो गवाहों के सामने होना चाहिय। अनुबन्ध को रजिस्ट्रार ऑफिस में पंजीकृत कराया जा सकता है या फिर नोटरी के समक्ष भी किया जा सकता है। वर्तमान में 1000 रू के स्टाम्प पर अनुबंध पत्र किया जाता है। विक्रय अनुबंध पत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, इसमें क्रेता विक्रेता के नाम विक्रय की जा रही सम्पति का नाम जैसे प्लाट मकान दूकान तथा वर्तमान विक्रता ने किस प्रकार प्राप्त किया है इस बात का स्पशट उल्लेख होना चाहिय।

2. यदि उक्त सम्पति किसी बैंक या व्यक्ति के यहाँ गिरवी रखी है तो उसका उल्लेक्य भी स्पस्ट रूप से होना चाहिए तथा उक्त लोन को एडवांस या क्रेता चुकाएगा। वह तरीका भी समय सीमा के साथ उल्लेखित करना चाहिय। मकान की सीमा स्पस्ट होना चाहिय। पुरानी रजिस्ट्री में जो सीमा दी गयी है, उसमें परिवर्तन हो सकता है। सीमा में मकान का क्रमांक डालना उचित रहता है।

3. अनुबन्ध के लिए जहा तक हो सके स्टाम्प स्वयं खरीदना चाहिय क्रेता और विक्रेता के हस्ताक्षर स्टाम्प विक्रेता के रजिस्टर पर होना हित में रहता है। उक्त सम्पति को कुल कितने रूपया में विक्रय किया जा रहा है यहाँ स्पस्ट करते हुए एडवांस की रकम का उल्लेख होना चाहिय। क्रेता को हमेशा रकम अकाउंट पेयी चेक से देनी चाहिय । विRय पत्र सम्पादित करने की अवधी, स्टाम्प का खर्च कौन करेगा तथा वर्तमान नल बिजली, नगर निगम का टैक्स का देय कौन जमा करेगा यहाँ बात का भी स्पस्ट उल्लेख होना चाहिय।
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सुभेश शर्मा
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