योगी सरकार में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से गर्भवती महिला ने शिशु को सड़क पर दिया जन्म,राहगीरों ने की मदद

योगी सरकार में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से गर्भवती महिला ने शिशु को सड़क पर दिया जन्म,राहगीरों ने की मदद

By: Madhav Singh

Published: 05 Sep 2020, 08:33 PM IST

रायबरेली . उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपए का बजट पेश करती है, लेकिन आम जनमानस को उस पैसे की हकीकत में सहूलियत मिलना मुश्किल हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के लचर व्यवस्था से ज्यादातर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग को सही इलाज मिलने में सबसे ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला रायबरेली में देखा गया जहां गर्भवती महिला ने अपने नवजात को सड़क पर ही जन्म देने पर मजबूर हुई, क्योंकि सही समय पर उसे एंबुलेंस की सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी थी। इसके बाद आसपास के राहगीरों ने ई रिक्शा पर उसको अस्पताल जाने की सलाह दी।

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से गर्भवती महिला ने शिशु को सड़क पर दिया जन्म

सीएचसी खीरों की एबुलेंस की बदहाल व्यवस्था की सरेआम पोल खुली। शंकरबख्श खेड़ा की महिला ने सड़क किनारे ग्रामीण महिलाओं की मदद से एक बच्चे को जन्म दिया।जानकारी के मुताबिक शंकरबख्श खेड़ा के एक युवक रावेंद्र गौतम की पत्नी पूनम गौतम गर्भवती थी।सुबह पत्नी को प्रशव के लिए एबुलेंस को फोन किया।लगभग ढाई घण्टे इंतजार के बाद भी एबुलेंस नही पहुंची।प्रशव पीड़ा असहनीय होती देख पति ने पूनम को बाइक से ही अस्पताल लेकर चल दिया।घर से दो किलोमीटर लालपुर पेट्रोल पम्प के पास पहुँचने पर महिला की हालत खराब हो गयी।स्थिति को देख कर उसने सड़क किनारे गाड़ी रोंक दी।ग्रामीण महिलाओं ने मानवता का परिचय दिया।महिला ने एक बेटे को जन्म दिया।लेकिन इस घटना क्रम में एबुलेंस और स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही नजर आयी।दो दिन पहले भी एम्बुलेन्स के अभाव में अधजली हालात में कराहती हुई महिला निजी वाहन से जिला अस्पताल पहुँचायी गयी थी।

पति रविंद्र ने बताया

पति रविंद्र का कहना है कि घर से मैंने कई बार एंबुलेंस को फोन किया लेकिन एंबुलेंस से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद खीरों अस्पताल आए वहां पर भी मैंने फोन किया और एंबुलेंस की सहायता मांगी लेकिन यहां पर भी कोई उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद रास्ते में जब लेकर अपनी पत्नी को जा रहे थे तभी नवजात का जन्म हो गया और किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिली तो राहगीरों और अगल-बगल की दो महिलाओं और पुरुषों ने मेरी मदद की इसके बाद हम को ई रिक्शा से अस्पताल भिजवाया गया।

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Madhav Singh
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