रायबरेली में महिलाएं अपना पसीना बहाकर आधी आबादी संभाल रही गृहस्थी की अर्थव्यवस्था,स्वावलंबन की पेश कर रही मिसाल इस गांव में

रायबरेली में महिलाएं अपना पसीना बहाकर आधी आबादी संभाल रही गृहस्थी की अर्थव्यवस्था, स्वावलंबन की पेश कर रही मिसाल इस गांव में

By: Madhav Singh

Published: 22 Jun 2020, 11:29 AM IST

रायबरेली . ऊंचाहार गर्मी मे तपती जमीन पर नंगे पाँव, सर पर मिट्टी से भरी टोकरी, कंधे पर कुदाल लिए महिलाओं की झुंड यहाँ न सिर्फ अपने घर की गृहस्थी की अर्थव्यवस्था को संबल दे रही है, अपितु उस मिथ्या को भी तोड़ रही है, जिसमे नारी को दुर्बल समझा जाता है

महिलाएं अपना पसीना बहाकर आधी आबादी संभाल रही गृहस्थी की अर्थव्यवस्था

ऊंचाहार क्षेत्र के गाँव पट्टी रहस कैथवल मे इस समय मनरेगा द्वारा गाँव मे रोजगार दिया जा रहा है। गाँव के विकास के साथ साथ ग्रामीणो को रोजगार देने का प्रयास परवान चढ़ रहा है। इसी गाँव मे एनटीपीसी द्वारा करीब एक करोड़ रुपये की लागत पक्के ताल का सौंदर्यीकरण भी कराया जा रहा है। इन सारे काम मे यहाँ पर महिलाओ की बड़ी संख्या मे भागीदारी सबको चकित कर देती है।गाँव मे अधिकांश गरीब परिवार है। जिसमे बड़ी संख्या मे लोग विभिन्न शहरों मे जीविका के लिए मजदूरी करते रहे है। कोरोना संक्रमण को लेकर हुए लॉक डाउन मे अधिकतर लोग शहरों से गाँव आ गए है। जिससे उनके सामने गृहस्थी चलाने मे समस्या आ रही थी। गाँव मे जब रोजगार मिला तो पुरुषो के साथ महिलाए भी परिवार की अर्थव्यवस्था संभालने मे भागीदार बनने के लिए आगे आयी। इस समय गाँव के करीब 350 परिवारों की महिलाए मनरेगा मे काम कर रही है। गाँव मे कुल 750 महिलाओ ने मनरेगा मे काम करने के लिए पंजीकरण करा लिया है।

महिलाएं गाँव मे पुरुष बाहर कर रहे काम

मनरेगा मे एक परिवार से एक ही व्यक्ति को काम दिया जा रहा है। इस गाँव मे काम करने की जिम्मेदारी संभाल ली है। जबकि पुरुष श्रमिक बाहर मजदूरी कर रहे है। महिलाओ की इस भागीदारी के कारण एक परिवार की आमदनी दो गुनी हो गयी है। जिससे परिवार को संभालने मे सहूलियत हो रही है। एक साथ सैकड़ो की संख्या मे महिलाए जब हाथ मे फावड़ा कुदाल लेकर निकलती है तो नजारा बहुत प्रेरणादायक होता है ।

महिला प्रधान से मिली प्रेरणा

गाँव की महिलाओ को मनरेगा मे काम करने के लिए गाँव की महिला प्रधान विमला उपाध्याय ने प्रेरित किया। प्रधान बताती है कि उनके पास गाँव कि महिलाएं मिलने आती थी और अपने परिवार कि आर्थिक तंगी के बारे मे बात करती थी । उसके बाद प्रधान ने महिलाओ को मनरेगा मे काम करने के लिए प्रेरित किया। और फिर सैकड़ो महिलाएं काम करने लगी ।

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