गंगा में नहीं मिले किसी प्रकार के कोई भी शव, व सई नदी में गंदगी को लेकर प्रशासन नही दे रहा है ध्यान

गंगा में नहीं मिले किसी प्रकार के कोई भी शव, व सई नदी में गंदगी को लेकर प्रशासन नही दे रहा है ध्यान

By: Madhav Singh

Published: 15 May 2021, 01:58 PM IST

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

रायबरेली. उत्तर प्रदेश में गंगा में उतराते शवो को लेकर राजनीति गरमा रही है।कांग्रेस से लेकर सपा व अन्य राजनीतिक पार्टियां इस मामले को लेकर सरकार को घेरने में जुटी हुई है। अभी तक जिले में कोई भी शव नही मिले है। उधर रायबरेली से निकली गंगा नदी के साथ -साथ जिले की अन्य नदियों के विषय में भी प्रशासन निगरानी कर रहा है। रायबरेली में सई नदी धार्मिक रूप से भी एक अलग मान्यता मिली हुई है। लेकिन इस नदी का यह हाल हो चुका है की नदी की जगह नाला का रूप ले लिया है। जिले के शहर के गंदे नाले का कचरा इस नदी में गिराया जाता है लेकिन जिला प्रशासन इसपर किसी भी प्रकार से कोई कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा है।


गंगा में नहीं मिले किसी प्रकार के कोई भी शव

दरअसल उन्नाव के बक्सर में गंगा में कई शवो के उतराने की बात सामने आने के बाद कई जिलों से गंगा में शव देखने की खबर मीडिया में पिछले कई दिनों से चल रही है।इस मामले पर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार को घेरा और मामले की जांच कराने की बात कही। इस बात को देखते हुए गंगा नदी जिन जिलों से निकली है उनको लेकर प्रशासन काफी अलर्ट मोड पर है ।रायबरेली में तकरीबन 90 किमी की लंबाई में गंगा बहती है,साथ ही प्रमुख श्मशान घाट, रालपुर, गेगासों, डलमऊ व गोकना घाट हैं, छोटे श्मशान घाटों की संख्या तकरीबन दो दर्जन है।

सई नदी का धार्मिक रूप से रामायण में मिलता है वर्णन

जिले की सई नदी हरदोई जिले के भिजवान झील से निकली सई नदी 715 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद जौनपुर के राजघाट पर गोमती में मिल जाती है। पूरे सफर में सई नदी हरदोई, रायबरेली, प्रतापगढ़, जौनपुर जिले से होकर गुजरती है। इसमें रायबरेली में कठवारा नया, महाराजगंज नैया, नसीराबाद नैया बसदा, शोभ आदि छोटी नदियां मिलती है। सई नदी को अयोध्या के निकट बहने वाली नदी कहा गया है।इसका वर्णन रामायण में भी है,यह गोमती नदी में गिरती है। इसका उद्गम कुमायूं की पहाड़ियों में है। इसकी सहायक नदियां लोनी और सखरानी जैसी छोटी नदियां सई की सहायक धाराएं हैं।

सई नदी ने लिया नाले का रूप

सई नदी की हालत काफी खराब है यहां पर जिले के शहर के अलग-अलग क्षेत्र से निकले नालों की गंदगी सीधे सई नदी में मिलते है, यह पहले नदी हुआ करती थी अब इसको लोग नाले का रूप में देखने लगे है। किसान बताते है कि पहले इसका पानी जानवरों को पिलाने लायक हुआ करता था एवं किसान अपने खेतो के लिए भी उपयोग में लिया करते थे लेकिन अब नदी में पानी ना होने के कारण इसका उपयोग बंद कर दिया गया है, साथ ही गंदगी ज्यादा होने के कारण इसका उपयोग नहीं किया जाता है ।जिला प्रशासन इसपर साफ-सफाई और रखरखाव के लिए कोई भी बजट नही दे रहा है साथ ही गंदगी पर भी ध्यान नही दिया जा रहा है जिससे इस नदी की हालत सुधर सके।

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