गरीबी से परेशान एक दंपत्ति ने मौत को लगाया गले

शासन की ओर से तमाम योजनाएं आती हैं, लेकिन गरीब के दरवाजे पहुंचने के पहले ही बीच रास्ते में दम तोड़ देती है।

By: Abhishek Gupta

Published: 04 Jan 2018, 10:37 PM IST

रायबरेली. सरेनी थाना क्षेत्र के एक गांव में गरीबी के चलते एक दंपति ने खुदखुशी कर ली। शासन की ओर से तमाम योजनाएं आती है, लेकिन गरीब के दरवाजे पहुंचने से पहले ही बीच रास्ते में ही दम तोड़ देती है। गरीबी की तंगहाली से जूझ रहे युवक ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों की चैखट तक पहुंचकर कई बार आवास व अन्य सुविधाएं दिलाए जाने की गुहार लगाई थी, लेकिन उसकी फरियाद किसी ने नहीं सुनी। आखिर में उसने मौत को अपना लिया।

शासन की ओर से तमाम योजनाएं आती हैं, लेकिन गरीब के दरवाजे पहुंचने के पहले ही बीच रास्ते में दम तोड़ देती है। गरीब दंपत्ति की मौत के बाद लोग सभी को कोसने लगे हैं। लोगों का कहना है कि गरीब के हिस्से में तो सिर्फ मौत ही आती है। क्षेत्र के पूरे कुम्हारन मजरे षीतलखेड़ा गांव निवासी आशीष (30) की पत्नी अर्चना की करीब दो साल पहले मौत हो गई थी। आषीश अपनी एक पांच साल की मासूम बेटी खुशी और बेटा अर्पित (3) के साथ रहता था। बीती अप्रैल माह में आषीश को लखीमपुर खीरी की युवती रेखा से खीरों के एक भठ्ठे पर काम करते समय प्यार हो गया था। उसने रेखा के साथ दोबारा शीदी करके घर बसा लिया था, लेकिन शादी के नौ माह बीते ही थे कि आशीष ने बीती रात गरीबी की तंगहाली से परेशान होकर जहर खाकर खुदखुशी कर ली। वहीं पत्नी ने भी मौत को गले लगा लिया।

पति-पत्नी की मौत के बाद दोनों मासूम बच्चे अनाथ हो गए। ग्रामीणों को बस इसी बात की चिन्ता सताए जा रही है कि अब इन मासूमों को कौन पालेगा। मृतक की बूढ़ी मां को तो अपना पेट पालने में समस्या हो ही रही है, अब उसी के कंधों पर मासूमों का भी बोझ पड़ गया है।

पति-पत्नी में नहीं होता था मेल जोल-
मृतक आशीष की मां ने बताया कि बेटे व बहू शाम को सामान लेकर घर आए थे। किसी से लड़ाई नहीं हुई थी। मृतक आशीष की पत्नी रेखा बरामदे में चूल्हे में खाना बनाती थी। शाम को दोनों ने एक साथ बैठकर खाना खाया था क्योकि दोनों के बर्तन व लकड़ी के पाटे अगल-बगल पड़े थे।

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