पॉक्सो कोर्ट के तहत पहली बार आरोपी को फांसी की सजा, छह साल पहले मासूम के साथ दुष्कर्म कर की थी हत्या

रायबरेली की पॉक्सो कोर्ट ने हैवानियत करने वाले को फांसी की सजा सुनाई है। दरअसल, सलोन कोतवाली क्षेत्र में दो मई, 2014 को एक मासूम के साथ दुष्कर्म किया गया। दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई। मासूम के शव का पोस्टमार्टम हुआ तो दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई।

By: Karishma Lalwani

Updated: 24 Oct 2020, 09:24 AM IST

रायबरेली. रायबरेली की पॉक्सो कोर्ट ने हैवानियत करने वाले को फांसी की सजा सुनाई है। दरअसल, सलोन कोतवाली क्षेत्र में दो मई, 2014 को एक मासूम के साथ दुष्कर्म किया गया। दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई। मासूम के शव का पोस्टमार्टम हुआ तो दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। इस मामले की सुनवाई पाॅक्सो एक्ट की विशेष अदालत में हो रही थी। छह साल बाद साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश से अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई गई है। साथ ही दो लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

यह है पूरा मामला

सलोन क्षेत्र के गांव के रह ने वाले एक शख्स के घर तिलक समारोह था। समारोह में शामिल होने आया गांव का ही जितेंद्र सिंह उसकी डेढ़ साल की बच्ची को खिला रहा था। कुछ देर बाद बच्ची अचानक गायब हो गई। करीब दो घंटे की खोजबीन के बाद उसका शव गांव के पास बरामद हुआ। परिवार वालों को जितेंद्र पर शक हुआ। देर रात परिवारीजनों ने कोतवाली पहुंच जितेंद्र सिंह के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई। मासूम के शव का पोस्टमार्टम हुआ तो दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। इस मामले की सुनवाई पाॅक्सो एक्ट की विशेष अदालत में हुई, तो साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई।

पाॅक्सो एक्ट के तहत पहली फांसी

महिला उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के खातिर बनाए गए पाॅक्सो एक्ट में यहां अब तक सजा तो कई आरोपितों को सुनाई गई, लेकिन किसी अपराधी को फांसी की सजा का यह जनपद में पहला मामला है। छह साल से न्याय की राह देख रहे मासूम के परिवार वालों ने कहा कि अब जाकर बेटी को इंसाफ मिला।

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