बच्चों के लिए मसीहा हैं ये विशेष शिक्षक, मोबाइल से दिव्यांगों को देते हैं शिक्षा

Akansha Singh

Publish: Sep, 05 2018 12:06:24 PM (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India

रायबरेली. जनपद के विकास खंड डीह में कार्यरत 33 वर्षीय विशेष शिक्षक बृजेश यादव (जिला ट्रेनर समेकित शिक्षा रायबरेली) ने दिव्यांग बच्चों को जो योग्यताएं अर्जित करायी हैं। शायद वह हर एक शिक्षक के बस की बात नहीं है।

जानिये इनके बारे में

ऐसे विशेष शिक्षकों की नियुक्ति जिला बेसिक शिक्षा विभाग की समेकित शिक्षा इकाई के तहत संविदा पर की गई है। ये शिक्षक मूल रूप से ग्राम पूरे भितरी पोस्ट खुरहटी का निवासी हैं। 6 बहनों में वे इकलौता भाई हैं। इनके पिता जी भी पेशे से शिक्षक थे और वह वर्ष 2014 में पूर्व माध्यमिक विद्यालय खुरहटी विकास खंड राही से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनकी पत्नी भी शिक्षा विभाग में हैं वो प्राथमिक विद्यालय गुलाबगंज मजरे खुरहटी विकास क्षेत्र राही में शिक्षा मित्र के पद पर हैं। इस विशेष शिक्षक ने वर्ष 1999 में हाईस्कूल व 2001 में इंटरमीडियट की परीक्षा राजकीय इंटर कॉलेज रायबरेली से उत्तीर्ण किया, इसके बाद वर्ष 2004 में स्नातक व 2006 में परास्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात वर्ष 2009 में बी.एड. विशेष शिक्षा का कोर्स मध्य प्रदेश भोज ओपेन यूनिवर्सिटी भोपाल से किया। इसके बाद 27 दिसम्बर 2010 में इनकी नियुक्ति विशेष शिक्षक के पद पर जनपद के विकास खंड डीह में हुई , तब इन्हें एल.एल. बी. की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी

मिली ये जिम्मेदारी

इस शिक्षक द्वारा दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का जज्बा लिए अपने कार्यों में लग गए, लेकिन ये मार्ग इतना आसान नहीं था क्योंकि विकास खंड डीह के परिषदीय विद्यालयों में कुल 148 दिव्यांग बच्चे चिन्हित किये गए थे, और इन दिव्यांग बच्चों को शिक्षित व प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी मात्र 1 विशेष शिक्षक पर है। अब इस शिक्षक को इन दिव्यांग बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने के साथ साथ इन दिव्यांग बच्चों को निःशुल्क सहायक उपकरण दिलाना, विकलांग प्रमाण पत्र बनवाना, स्कॉर्ट एलाउंस दिलवाना, आवासीय कैम्प में 2 से 3 मूकबधिर व दृष्टिबाधित बच्चों का नामांकन कराना, विद्यालयों में जाकर व सर्वे करके, अध्यापकों को प्रशिक्षण देना, खेलकूद प्रतियोगिता करना विक्लांगतवार बच्चों का चिन्हांकन करना व उनका नामांकन नजदीक के विद्यालय में कराना आदि़।

मोबइल का सहारा लेकर शिक्षण कार्य जारी

राज्य परियोजना निदेशालय का यह आदेश है कि ये विशेष शिक्षक एक दिन में कम से कम दो से तीन विद्यालयों में जाकर शैक्षिक सपोर्ट प्रदान करेंगें, तब ऐसे में भला इन दिव्यांग बच्चों को ठीक से शिक्षित व प्रशिक्षित करना किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन इस शिक्षक ने इन सभी चुनौतियों को मात देते हुए दिव्यांग बच्चों को जो योग्यताएं अर्जित करायी हैं। उसे सुनकर व देखकर हर कोई दंग रह जाता है , इस शिक्षक ने इन दृष्टिहीन दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र निपुण बनाने के लिए मोबाइल फोन का सहारा लिया और एक साथ दो से तीन बच्चों को लाइन पर लेकर उन्हें पढ़ाना प्रारंभ कर दिया और ये बच्चे दिन प्रतिदिन कुछ अलग सीखने लगे,। इसी लिए इस शिक्षक को लोग मोबाइल गुरु के नाम से भी पुकारने लगे हैं । इस शिक्षक की इस कार्य शैली व इनके दिव्यांग बच्चों की योग्यता को देखकर अब तक इस शिक्षक को कई बार सम्मानित भी किया गया है। बिहार विकलांग खेल अकादमी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए गये यह सम्मान बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के हांथों किया गया। जो कि दिव्यांगता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु रीता पेशवरिया अवार्ड 2018 बेस्ट फ्रोफेशनल अवार्ड से सम्मानित हुए।

मिले ये पुरस्कार

जनपद गौरव सम्मान 20017 ( सूर्य कुमार शुक्ला डी.जी.पी. होमगार्ड्स उ.प्र.) सामाजिक चेतना सम्मान 2017 ( हृदय नारायण दीक्षित अध्यक्ष विधानसभा उ.प्र.) प्रभारी मंत्री नंद कुमार नंदी द्वारा, पूर्व जिलाधिकारी अनुज कुमार झा द्वारा, उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष द्वारा व समाज के बुद्धिजीवियों द्वारा अब तक कई बार सम्मान मिल चुका है। और वर्तमान जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री भी इनके दृष्टिहीन दिव्यांग बच्चे दीपक यादव पुत्र बृजलाल निवासी ग्राम पीढ़ी पोस्ट दोहरी की योग्यता से प्रभावित होकर उस दिव्यांग बच्चे को ब्रेलर , देजीप्लेयर , ब्रेल पेपर आदि शिक्षा सहायक उपकरण अपने हांथों से देकर सम्मानित किया था ।


जब विशेष शिक्षक बृजेश यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि दिव्यांग बच्चे बहुत ही होनहार व प्रतिभाशाली होते हैं, केवल उन्हें एक अच्छा मार्गदर्शक मिल जाये, और शिक्षक ने कहा कि ऐसे कार्य करने के लिए किसी संगठन की आवश्यकता नहीं है, केवल व्यक्ति एक अंदर कुछ अलग करने का जज्बा हो।

पिता से मिली प्रेरणा

शिक्षक ने बताया कि हमारे पिता जी भी शिक्षक थे और उनके कार्यों की लोग बहुत तारीफ करते थे। तब मैं मन में सोचता था कि मैं भी पिता जी की तरह शिक्षा के क्षेत्र में कुछ अच्छा करूंगा जिससे हमारे कार्यों को भी समाज के लोंगो द्वारा सराहा जाए। इस लिए मैंने सामान्य बी.एड. में नाम आने के बाद भी विशेष शिक्षा से बी.एड. किया कि समाज के ऐसे लोंगो की सेवा की जाए जिन्हें समाज व उनके अभिभावक भी कम ध्यान देते हैं।

शिक्षक का प्रयास रहता है कि किसी बच्चे की पढ़ाई बीच में न रुके इस लिए यह शिक्षक अभिभावकों को प्रेरित भी करता है कि बच्चे की आगे की शिक्षा ऐसे ही चलती रहे , ग्राम पूरे बाबू छत्रपाल पोस्ट टेकारी दांदू निवासी दृष्टिबाधित अंकित मौर्य पुत्र कंधई मौर्य का नामांकन जयति भारतं विद्यालय जानकीपुरम लखनऊ में कक्षा 7 में कराया। तो वहीं ग्राम पीढ़ी पोस्ट दोहरी निवासी निवासी दृष्टिहीन दीपक यादव को कक्षा 9 में उ.प्र. माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद लखनऊ में नामांकन कराया और इस निर्धन दिव्यांग बच्चे की फीस भी स्वयं दिया। इस वर्ष यह बच्चा हाइस्कूल में है। दीपक ने कहा कि आज मैं जो कुछ भी हूँ अपने शिक्षक की बदौलत हूँ। नहीं तो मैं शायद आगे की शिक्षा ग्रहण न कर पाता।

 

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