अनाथ के सपनों को लगे पंख और छा गया आसमान पर, पढि़ए खबर...

- रागयढ़ में हुए एक साइकिल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपनी साइक्लिंग की तेज रफ्तार से पुस्कार जीत कर आ गया।

By: Vasudev Yadav

Published: 14 Nov 2017, 06:32 PM IST

रायगढ़. अनाथ बच्चों की संस्था नीलांचल में एक ऐसा भी अनाथ किशोर है जो संस्था से स्कूल और स्कूल से संस्था आने-जाने के क्रम में इस कदर साईकिल चलाता है कि उसकी चर्चा होने लगी। बातों ही बातों में उसने वर्ष 2016 में रागयढ़ में हुए एक साइकिल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपनी साइक्लिंग की तेज रफ्तार से पुस्कार जीत कर आ गया।

इसके बाद पुणे में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 27 वां व बैंगलोर की प्रतियोगिता में 19वां स्थान प्राप्त किया।
कहते हैं हुनर किसी पहचान की मोहताज नहीं होती.. बस मौका चाहिए उसे एक बार अपनी जौहर दिखाने का कुछ ऐसा ही हुनर पंडरीपानी स्थित अनाथ बच्चों की संस्था नीलांचल के किशोर आकाश मेंं भी था। कक्षा ९ का यह १५ वर्षीय छात्र साइक्लिंग की दुनिया में एक मुकाम हासिल करने की तमन्ना लिए नीलांचल से कोतरलिया स्थित स्कूल आना-जाना करता था।

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जिससे अन्य बच्चों के बीच एक अलग पहचान बन सके। समय ने करवट ली और वर्ष २०१६ मेंं संस्था के बच्चों को रायगढ़ में हुए एक प्रतियोगिता के तहत भाग लेने का मौका मिला। जिसमें साइकिल रेसिंग प्रतियोगिता भी थी। संस्था से साइकिल प्रतियोगिता के लिए आकाश के नाम पर मुहर लगी और आकाश एक सामान्य साइकिल के साथ प्रतियोगिता में बतौर प्रतियोगी बन कर पहुंच गया। जिसमें आकाश ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

आकाश के इस उत्साह को देखते हुए संस्था ने उसे इस क्षेत्र में आगे बढ़ाने की पहल की। जिसका नतीजा यह हुआ कि करीब एक साल की प्रैक्टिस के बाद आकाश को सितंबर 2017 में महाराष्ट्र के पुणें और नवंबर 2017 में बैंगलोर में हुए साईक्लिंग प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिला। राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतियोगिता में आकाश ने पुणे की प्रतियोगिता में २७वां जबकि बैंगलोर की प्रतियोगिता में १९वां स्थान प्राप्त किया।

फिजियोथैरेपिस्ट बने कोच और संवारा हुनर
आकाश को साइक्लिंग के क्षेत्र में बढ़ाने को लेकर संस्था को एक बेहतर कोच की दरकार था। इस बीच संस्था ने फिजियोथैरेपिस्ट संबीत मोहंती से संपर्क किया। जो पूर्व में ओडि़शा साईक्लिंग एसोसिएशन के कोच भी रह चुके हैं। कोच का साथ मिला तो आकाश के साइक्लिंग में निखार आया। जिससे उसने पुणे व बैंगलोर में अपने हुनर का परचम लहराते हुए खूब वाहवाही बटोरी।

कलक्टर ने दी 52 हजार की साइकिल
साइक्लिंग के क्षेत्र में एक बेहतर मुकाम हासिल करने के लिए आकाश के सामने सबसे बड़ी समस्या एक रेसर साइकिल की थी। जो उसके पास नहीं था। संस्था ने आकाश के सपनों की इस उड़ान को कलक्टर शम्मी आबिदी से अवगत कराया। आकाश के इस हुनर को देख कर कलक्टर भी काफी प्रभावित हुई। वहीं राष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगिता में आकाश के शामिल होने को लेकर ५२ हजार रुपए की रेसर साइकिल उपलब्ध करवाई।

असमान्य से समान्य बन कर इतनी कम उम्र में आकाश ने साइक्लिंग के क्षेत्र जो मुकाम हासिल किया है। उसकी जितनी भी सराहना कि जाए, उतनी कम है। आकाश के इस हौसले की इस उड़ान को बरकरार रखने संस्था की ओर से आगे भी सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
ज्योत्सना देव, सह संचालक, उन्नायक सेवा समिति, रायगढ़

Vasudev Yadav
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