रायल्टी पर्ची से लेकर धर्मकांटा तक में चल रहा कोयले का काला खेल

रायल्टी पर्ची से लेकर धर्मकांटा तक में चल रहा कोयले का काला खेल

Vasudev Yadav | Publish: Apr, 13 2019 07:20:38 PM (IST) Raigarh, Raigarh, Chhattisgarh, India

- एसईसीएल के अधिकारियों की सांठगांठ से की जा रही कोयले की अफरा-तफरी -जामपाली व गारेपेलमा माइंस में लगे धर्मकांटा में किया जा रहा गलत वजन

रायगढ़. जिले के जामपाली, बरौद और गारेपेलमा क्षेत्रों में हो रहे कोयला चोरी का सबसे बड़ा खेल खुद एसईसीएल के अधिकारी कर रहे हैं। इनके द्वारा वहां के भोलेभाले ग्रामीणों पर कोयला चोरी का आरोप लगाकर उसकी आड़ में खुद बड़े पैमाने पर कोयला चोरी कराया जाता है। एसईसीएल के अधिकारियों की कोयला माफियाओं से सीधे तौरपर तालमेल बन गई है। इससे यह लोग माइंस के अंदर लगे धर्मकांटा में ओवरलोड वाहन को भी क्षमता के मुताबिक तौल दिखा देते हैं। इसके बाद वाहन चालक सीधे अतरिक्त कोयला बिना रायल्टी पटाए कोलडिपो में खाली कर देता है और वहां से कोयला प्लांटों में चला जाता है। ऐसा करके एसईसीएल के अधिकारी से लेकर कोल माफिया तक करोड़ों का वारा-न्यारा कर रहे हैं।

बता दें कि कुछ दिन पहले ही एसईसीएल एसईसीएल की जामपाली माइंस के अंदर जंगल के रास्ते एक ट्रक घुसा था। वहां लोडर चालक ने बाकायदा हाईवा में कोयला लोड किया और उसे रवाना भी कर दिया। समय रहते गार्डों की नजर उसमें पड़ गई तो उन लोगों ने उसे पकड़ लिया। जबकि लोगों का कहना है कि यह खेल सालों से चलता आ रहा है।

इतना ही नहीं ठीक दो-तीन दिन बाद 11 अप्रैल को सहायक कलेक्टर ने पूंजीपतरा क्षेत्र में पांच हाईवा अवैध कोयला पकड़ा था। यह कोयला भी एसईसीएल का था और वाहन चालकों के पास जो रायल्टी पर्ची मिली वह बिना डेट और टाइम के थी। इससे साफ हुआ कि कोयला चोरी का सबसे बड़ा खेल एसईसीएल के अधिकारियों द्वारा कराया जा रहा है। जब इस बारे में अधिकारियों से बात करने की कोशिश की तो सभी ने जानकारी होने से ही मना कर दिया गया। यहां तक कि एसईसीएल के सीएमडी एपी पंडा से जब जानकारी मांगी गई तो न उन्होंने फोन उठाया और न वाट्सअप पर जानकारी दी।
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धर्मकांटा में होता है असली खेल
जिले में एसईसीएल की जामपाली, बरौद और गारेपेलमा माइंस के अंदर कंपनी के धर्मकांटा लगाए गए हैं। यहां हर गाड़ी की तौल होती है और यह पता चलता है कि किसमें कितना कोयला लोड है। अवैध कोयले का कारोबार करने वाले एसईसीएल के अधिकारी धर्मकांटा की तौल से छेड़छाड़ हर हाईवा में 4.5 टन कोयला की कम तौल दिखाकर निकाल रहे हैं। इसके बाद इस कोयले को बाहर आधे रेट में कोयला माफिया को बेंच दिया जाता है। यहीं से बिना नंबर व डेट की रायल्टी पर्ची भी जारी किए जाने की बात कही जा रही है। ऐसा करके यहां के अधिकारी करोड़ों रुपए का वारान्यारा कर रहे हैं।

30 टन की पासिंग और जा रहा 40 टन से अधिक माल
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कोयला अन्य समान लोडकर ले जाने वाले हर वाहन की एक निश्चित क्षमता होती है। यह क्षमता गाड़ी का टियर वेट वाहन का वेट (ग्रॉस वेट) ट्रक व माल का वेटद्ध में अंतर करके निकाला जाता है। उन्होंने बताया कि एक 22 ***** वाहन में अधिकतम माल 30 टन तक ले जा सकते हैं, लेकिन उसमें 40-50 टन माल ले जाया जा रहा है। जबकि उसके पास एसईसीएल के धर्मकांटे के मुताबिक 30 टन माल ही रहता है। इससे साफ है कि माइंस के अंदर तौल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जाती है।

-यदि ऐसा है तो इसकी जांच की जाएगी। सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी- मयंक चतुर्वेदी, सहायक कलेक्टर, रायगढ़

-गारेपेलमा माइंस में सीआईएसएफ की सुरक्षा ड्यूटी लगी है। यहां ऐसा कुछ नहीं हो सकता है। रही बात रायल्टी पर्ची गलत होने की तो खनिज अधिकारी गलत दावा कर रहे हैं। हमारे यहां बारकोड वाली पर्ची दी जाती है और उसमें किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हो सकती है- आरके सिंह, असिस्टेंट मैनेजर, एसईसीएल

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