जिले से चार लाख क्विंटल धान कस्टम मिलिंग के लिए जाएगा जांजगीर

जिले से चार लाख क्विंटल धान कस्टम मिलिंग के लिए जाएगा जांजगीर

Vasudev Yadav | Publish: Apr, 14 2019 07:19:10 PM (IST) Raigarh, Raigarh, Chhattisgarh, India

- अरवा का लक्ष्य पूर्ण तो उसना का जिले के मिलर नहीं कर पा रहे मिलिंग

रायगढ़. समर्थन मूल्य में धान खरीदी के बाद अरवा चावल का कस्टम मिलिंग करीब पूर्ण होने के कगार पर है मगर उसना का कस्टम मिलिंग कछुए की चाल से होने के कारण संग्रहण केंद्रों में जाम पड़े धान का उसना मिलिंग कराने के लिए शासन धान को जांजगीर भेज रही है। करीब चार लाख क्विंटल धान जांजगीर जिले को भेजा जा रहा है।

इस बार समर्थन मूल्य में करीब 46 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी हुई है जिसमें से अभी तक नागरिक आपूर्ति निगम के गोदाम में 19 लाख 63 हजार 310 क्विंटल चावल जमा हो चुका है। नान को मिले लक्ष्य के अनुसार 23 हजार क्विंटल चावल और लेना बांकी है वहीं एफसीआई में करीब तीन लाख क्विंटल चावल और लेना है।

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जिले में अरवा मिलरों की संख्या अधिक होने के कारण अरवा का कस्टम मिलिंग तो पूर्ण होने के कगार पर है करीब सप्ताह भर के भीतर 23 हजार क्विंटल चावल मिलरों द्वारा दिए जाने की बात कही जा रही है इसके बाद नान के गोदाम बंद हो जाएंगे। जबकि देखा जाए तो संग्रहण केंद्रों में वर्तमान रिकार्ड के अनुसार करीब सात लाख क्विंटल धान शेष्ज्ञ पड़ा हुआ है अब उक्त पूरे धान का उसना मिलिंग होना है लेकिन जिले में उसना मिलरों की संख्या कम होने के कारण मिलिंग की गति कछूए की चाल से चल रही है। वहीं एफसीआई द्वारा भी अपने क्षमता के अनुरूप करीब तीन लाख क्विंटल चावल और लेने की बात कही जा रही है इसके बाद भी चार लाख क्विंटल धान शेष बच रहा है जिसको शासन ने जांजगीर जिले को भेजने के लिए कहा है।

समय पर मिलिंग होने से बचता शासन का राजस्व
चार लाख क्विंटल धान जो कि जांजगीर भेजा जा रहा है उक्त धान को पहले तो समितियों से संग्रहण केंद्रों तक परिवहन के नाम पर खर्च किया गया और अब जिले में मिलरों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाने के कारण मिलिंग के लिए इसको जांजगीर परिवहन किया जा रहा है। परिवहन के नाम पर दो बार शासन को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। खरीदी के साथ ही साथ अगर उसना का भी मिलिंग शुरू हो जाता तो इतनी मात्रा में धान दूसरे जिले को भेजना नहीं पड़ता।

इसलिए काटा जा रहा था टीओ
समर्थन मूल्य में धान खरीदी के अंतिम दौर में जब समितियों में धान जाम हो गया तो विपणन विभाग के अधिकारी राइसमिलरों के प्रति सख्त होकर उठाव कराने के बजाए टीओ काटने में लग गए थे। सॉप्टवेयर में तकनिकी खराबी बताकर कस्टम मिलिंग के लिए डीओ काटना बंद कर दिया गया था और संग्रहण केंद्रों में धान जमा करने के लिए टीओ काटना शुरू कर दिया गया था बाद में मिलरों की शिकायत के बाद मिलरों के लिए डीओ काटा गया। इससे विभाग के कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है।

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