बजर की आवाज सुनते ही बाहर निकले इस संस्था के अधिकारी व कर्मचारी, मासूम बच्ची को झूले में देख, कहा- हमारे घर लक्ष्मी आई, पढि़ए पूरी खबर...

रविवार को शाम झूले में मासूम बच्ची को खेलते देख मातृनिलियम संस्था के अधिकारी-कर्मचारी खुशी से झूम उठे। मातृनिलियम के संचालक मोहंती ने ये कहा...

रायगढ़. रविवार की शाम अनाथ बच्चों की संस्था मातृनिलियम के अधिकारी-कर्मचारी अंदर अपने काम पर व्यस्त थे। इस दौरान कार्यालय का बजर बजने लगा। इसकी आवाज सुनकर सभी बाहर निकले तो देखा कि गेट के बाहर लगे झूले (शिशु स्वागत पालना केन्द्र) में पांच दिन की मासूम बच्ची खेलती मिली।

इस संबंध में उन्नायक सेवा समिति व मातृनिलियम के संचालक सिद्धांत शंकर मोहंती ने बताया कि यह मामला रविवार शाम करीब पौने चार बजे की है। बच्ची के मिलने के बाद संस्था के लोगों ने आसपास बच्ची के परिजनों की खोज-खबर ली तो पता चला कि एक महिला उसे छोड़ कर गई है। संस्था में कार्यरत महिला कर्मचारियों की मानें तो बच्ची करीब पांच से छह दिन की है। उसे बकायदा स्वेटर और कनटोप पहना कर उसकी मां ने झूले में छोड़ा था।

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बच्ची के मिलने के बाद सिद्धांत मोहंती ने तत्काल उसे इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया। इसके बाद प्रक्रिया के तहत इसकी सूचना बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण अधिकारी को दी। बच्ची मिलने की खबर सुन कर सभी अधिकारी-कर्मचारी खुश हुए और मोहंती को शुभकामनाएं देते हुए बच्ची की ठीक तरह से देखभाल करने के लिए कहा गया।

दो माह में कर सकते हैं दावा
इस संबंध में सिद्धांत मोहंती ने बताया कि भले ही मासूम के परिजनों ने उसे झूले में छोड़ दिया है, लेकिन एक-दो दिन में उनका अगर बच्चे के प्रति मन भी बदल जाएगा तो संस्था उन्हें बच्ची को नहीं सौंप सकती। इसके लिए संबंधित माता-पिता को दावा करना पड़ेगा। इसके बाद संस्था उन्हें बाल कल्याण समिति भेजेगी, जहां से परिवार न्यायालय में केस फाइल किया जाएगा। इसके बाद न्यायालय के आदेशानुसार बच्ची के माता-पिता का डीएनए टेस्ट होगा। इस तरह लंबी प्रक्रिया के बाद ही बच्ची उसके माता-पिता को मिलेगी। अगर बच्ची के माता-पिता उसे पाने के लिए दो माह से अतिरिक्त समय लगाएंगे तो फिर बाद में दावा नहीं कर पाएंगे।

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खुले में न फेंकें झूला में छोड़ें
मातृनिलियम के संचालक मोहंती ने ऐसे माता-पिता से आग्रह किया है कि किसी भी परिस्थिति में वे अपनी मासूम को खुले में न फेंकें। इससे जिगर का टुकड़ा किसी जानवर का शिकार बन सकता है। सरकार की योजना के तहत मातृनिलियम, सखी सेंटर व अन्य स्थानों में शिशु पालना केन्द्र लगाया गया है। यहांं वे अपने बच्चे को छोड़ सकते हैं। वे इसकी चिंता न करें कि बच्चे को छोडऩे के बाद कोई उसे देख पाएगा या नहीं। क्योंकि हर झूले में एक मशीन लगी होती है, जिसमें बच्चे या बच्ची को रखते ही बजर बजना शुरू हो जाता है। इससे संस्था के अधिकारी-कर्मचारी समझ जाते हैं कोई नन्हा मेहमान आया है। मोहंती ने आगे बताया कि मातृनिलियम में ऐसे 6 मासूम बच्चियां आ चुकी हैं, जिन्हें संस्था ने सुरक्षित रखा है।

Vasudev Yadav
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