scriptOn the fifth day Skandmata, the fifth form of Maa Durga, is worshipped | पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवा रूप स्कंदमाता की हुई अराधना | Patrika News

पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवा रूप स्कंदमाता की हुई अराधना

माता के जयकारे से गूंज रहा अंचल
सुबह-शाम आरती में पहुंच रहे श्रद्धालु

रायगढ़

Published: April 06, 2022 08:24:16 pm

रायगढ़. चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन बुधवार को देवी मंदिरों में मां दुर्गा के पांचवा रूप स्कंदमाता की अराधना की गई। देवी भक्तों ने बताया कि स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। स्कंदमाता हिमालय की पुत्री पार्वती को कहा जाता है। मान्यता है कि अगर जो भी भक्त स्कंदमाता की पूजा करता है उसके मन और मस्तिष्क में अपूर्व ज्ञान की उत्पत्ति होती है।
गौरतलब हो कि बुधवार को सुबह से ही माता की पांचवीं रूप स्कंदमाता की भक्ति में श्रद्धालु लीन रहे। बुधवार सुबह से ही शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी भक्त स्कंद माता के रूपों की पूजा करने मे लगे रहे। साथ ही इन इस बार गर्म अधिक बढ़ जाने के कारण सुबह-शाम देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ लग रही है। इस दौरान जिले के प्रसिद्ध बुढ़ी माई मंदिर, अनाथालय स्थित दुर्गा मंदिर, समलेश्वरी देवी मंदिर व राजापारा स्थित समलाई माता के मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। भक्तों ने बताया कि विगत तीन साल से कोरोना संक्रमण के चलते नवरात्र के दिनों में मंदिर नहीं पहुंच रहे थे, लेकिन अब स्थिति सामान्य होने के बाद सुबह-शाम आरती के समय भक्तों की भीड़ लग रही है। जिससे भक्त अपने परिवार के सुख-समृद्धि के लिए माता की अराधना में लगे हुए हैं।
भक्तिमय हुआ माहौल
जब से नवरात्र शुरू हुआ है तब से अंचल के देवी मंदिरों में हमेशा ***** की थाप सुनाई दे रही है। साथ ही भक्त माता के जयकारे लगाते हुए मंदिर पहुंच रहे हैं। ऐसे में भक्तों का कहना है कि नवरात्र के नौ दिन बहुत खास होता है। इस समय जो भी भक्त तन-मन से माता का ध्यान करता है उसकी समस्या जरूर दूर होती है, यही कारण है कि इस समय पूरा माहौल भक्ति मय हो गया है। साथ ही जगह-जगह देवी भक्त चूनरी यात्रा से लेकर अन्य कार्यक्रम भी कर रहे हैं। जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हो रहे हैं।
आज होगी मां कात्यानी देवी की पूजा
गुरुवार को सुबह से ही माता कात्यानी की पूजा-अर्चना शुरू होगी, ऐसे में मान्यता है कि महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसलिए उन्हें कात्यायनी देवी कहा जाता है। मां कात्यायनी को ब्रज की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए यमुना नदी के तट पर मां कात्यायनी की ही पूजा की थी। साथ ही मां कात्यायनी ने ही अत्याचारी राक्षस महिषाशुर का वध कर तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया था। इस कारण मां कात्यानी देवी की पूजा की जाती है।
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