नींद में साहब! भगवान भरोसे भालूओं की सुरक्षा, जामवंत योजना ठप्प

वन मंडल रायगढ़ में करीब दस साल पहले का आकड़ा देखा जाए, तो भालू की संख्या यहां काफी थी, लेकिन अब धीरे-धीरे वह संख्या खत्म होते जा रही है।

रायगढ़. वन मंडल रायगढ़ में करीब दस साल पहले का आकड़ा देखा जाए, तो भालू की संख्या यहां काफी थी, लेकिन अब धीरे-धीरे वह संख्या खत्म होते जा रही है। भालूओं को बचाने के लिए विभाग के द्वारा कुछ भी नहीं किया जा रहा है। वहीं जामवंत योजना को विभाग ने यह कह कर भुला दिया है कि यहां जामवंत योजना नहीं चल रही है।

विभागीय सूत्रों ने बताया कि भालूओं की सुरक्षा के लिए अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान जामवंत योजना का संचालित थे, लेकिन छत्तीसगढ़ के विभाजन के बाद यह योजना ठप हो गई। वर्तमान में रायगढ़ वन मंडल में जामवंत योजना संचालित नहीं है। इस योजना के तहत भालूओं को बचाने के लिए चलाई जा रही थी। भालूओं के हिसाब से जंगल को ढलाना था, लेकिन इस योजना के बंद होते ही धीरे-धीरे भालूओं का शिकार भी शुरू हो गया। वर्तमान स्थिति में वन विभाग के अधिकारियों को यह तक नहीं मालूम की रायगढ़ वन मंडल में भालूओं की संख्या कितनी है।

बताया जा रहा है कि पिछले छह सालों का आकड़ा देखा जाए, तो करीब एक दर्जन से अधिक भालू की मौत हो चुकी है। इसमें सबसे अधिक मौत वाहनों की चपेट में आने व शिकार से भालूओं की है। विदित हो कि वन मंडल रायगढ़ के भूपदेवपुर, नहरपाली, जामंगा, बंगुरसिया, जुनवानी, खरसिया, सारंगढ़ व बरमकेला क्षेत्रों में भालूओं की संख्या काफी पायी जाती थी, लेकिन अब यह स्थिति नहीं है। इसके बाद भी भालूओं को बचाने के लिए विभाग के द्वारा ना कोई योजना चलाई जा रही है और न ही भालूओं के शिकार को रोका जा रहा है।
बचाव के लिए थी योजना

अविभाजित मध्यप्रदेश में जामवंत परियोजना की शुरुआत की गई थी। इसमें उन स्थानों को चिन्हाकिंत किया गया था। जहां भालूओं की तदाद अधिक है। इसमें भालूओं को जंगल में रखने व उनके बचाव के लिए योजना थी। इसके लिए विभाग को बजट भी दिया जाना था, लेकिन यहां योजना संचालित नहीं है।

रायगढ़ वन मंडल एसडीओ एसआर साय जामवंत योजना यहां नहीं चल रही है। भालूओं को बचाने के लिए कोई योजना वर्तमान में यहां नहीं चल रही है। हां भालूओं के घायल व बीमार होने की जानकारी मिलती है, तो जरूर उन्हें बचाने का काम किया जाता है।

केस वन
24 मई 2013 को गोमर्डा अभ्यारण्य में भालू की मौत हुई। इसका भी यहां शिकार किया गया था।
केस टू
करीब दो साल पहले बडग़ांव में एक भालू का शिकार किया गया और उसका पंजा काट कर ले शिकारी ले गए।
केस थ्री
करीब आठ माह पहले बादपाली में एक भालू का करंट बिछा कर शिकारियों ने शिकार किया था।
केस फोर
करीब साल भर पहले भैंसगढ़ी रोड पर एक वाहन की ठोकर से भालू की मौत हो गई थी। इसका आरोपी भी नहीं पकड़ाया।
केस फाईव
करीब दो माह पहले खरसिया रोड पर एक भालू वाहन की ठोकर से मार गया और उसका बिना पोस्टमार्टम कराए अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अभिषेक जैन
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