छुटभैये नेता की करतूत चोरी छिपे एक परिवार का बहिष्कार करने की थी तैयारी...जानें फिर क्या हुआ

छुटभैये नेता की करतूत चोरी छिपे एक परिवार का बहिष्कार करने की थी तैयारी...जानें फिर क्या हुआ

Piyushkant Chaturvedi | Publish: Jun, 17 2017 05:07:00 PM (IST) Raigarh, Chhattisgarh, India

खुद को भाजपा नेता कहने वाले एक शख्स ने गांव में गुपचुप तरीके से एक बैठक आयोजित कर एक परिवार को गांव से बहिष्कृत करने की तैयार की।

रायगढ़. खुद को भाजपा नेता कहने वाले एक शख्स ने गांव में गुपचुप तरीके से एक बैठक आयोजित कर एक परिवार को गांव से बहिष्कृत करने की तैयार की।

पर बैठक के 30 मिनट पहले जूटमिल पुलिस को इसकी सूचना मिली। ऐसे में, जूटमिल चौकी प्रभारी बगैर देरी किए दल-बल के साथ उक्त गांव में पहुंचे।

वहीं बहिष्कार को लेकर आयोजित की गई मीटिंग पर पानी फेर दिया। इसके साथ ही स्थानीय सरपंच को समझाइश देते हुए ऐसी कोई भी पहल की सूचना पुलिस को देने की बात कही गई।

जूटमिल चौकी क्षेत्र के सीमावर्ती गांव बड़माल (रेंगालपाली) में पिछले एक सप्ताह से एक परिवार को गांव से बहिष्कृत करने की तैयारी चल रही है। जिसकी रूप रेखा गांव के ही एक कथित भाजपा नेता ने तय की थी।

गांव में उक्त परिवार को बहिष्कार करने से पूर्व एक मीटिंग भी बुलाई गई थी। जिसका समय शुक्रवार की रात करीब 9 बजे तय किया गया था। इस बीच जूटमिल पुलिस को अपने विश्स्त सूत्रों से इस बात की जानकारी मिली।

ऐसे में, जूटमिल प्रभारी अमित शुक्ला मिटिंग से करीब 10 मिनट पहलेदल-बल के साथ बड़माल पहुंच गए। देर रात पुलिस को गांव में देख बहिष्कार की रणनीति तैयार करने वाले लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

जब पुलिस ने गांव मेंं एक परिवार को बहिष्कृत करने को लेकर सवाल जवाब किया तो सब ने चुप्पी साध ली। ऐसे में, चौकी प्रभारी ने कथित भापजा नेता के साथ स्थानीय सरपंच को समझाइश दी।

वहीं ऐसी किसी भी अनुचित पहल की सूचनातत्काल पुलिस को देनी की बात कही। जिससे आरोपी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके। गांव मेंं खुद के बहिष्कार के डर के बीच जब पीडि़त परिवार को पुलिस का सहारा मिला तो उसने राहत की सांस ली।

सूचना के बावजूद रायगढ़ एसडीएम ने झाड़ा पल्ला- खास बात तो यह है कि गांव में एक परिवार को बहिष्कृत करने की सूचना सबसे पहले रायगढ़ एसडीएम प्रकाश सर्वे को दी गई थी। पर उन्होंने लिखित शिकायत के अभाव में कार्रवाई नहीं करने की बात कह अपना पल्ला झाड़ लिया।

वहीं लगे हाथ उन्होंने पुलिस से गुहार लगाने की नसीहत भी दे डाली। हालांकि एसडीएम का यह गैर-जिम्मेदराना रवैया का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई मामलों में वो इस तरह के जवाब दे चुके हैं। जिससे उनकी कार्यशैली पर भी सवाल उठ चुके हैं।

शासकीय योजना में लूट-खसोट की खोली थी पोल- बड़माल के पीडि़त परिवार को सिर्फ इसलिए बहिष्कृत करने की तैयारी थी। क्योंकि शासकीय योजनाओं में लूट-खसोट की खबर मीडिया को लगी और उसने उक्त मामले को उजागर कर दिया।

ऐसे में, कथित भाजपा नेता को इस बात का आशंका थी कि उक्त परिवार ने नहीं मीडिया को गांव में भेज कर इस पूरे मामलेे को उजागर करवाया है। जिससे उनकी काफी किरकिरी हुई थी।

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