किसानों की जमीन पर रेलवे ने गाड़ दिया खंभा, अब रेलवे के ठेकेदार मनमानी करते हुए कर रहे ये काम, किसानों में आक्रोश

किसानों की जमीन पर रेलवे ने गाड़ दिया खंभा, अब रेलवे के ठेकेदार मनमानी करते हुए कर रहे ये काम, किसानों में आक्रोश

Shiv Singh | Publish: Sep, 11 2018 06:52:08 PM (IST) Raigarh, Chhattisgarh, India

- लूप लाईन निर्माण के लिए अब खड़ी फसल में मिट्टी पाटने की तैयारी -किसानों ने कहा पहले कराओ सीमांकन फिर होगा तय

रायगढ़. रेलवे के ठेकेदार ने पहले तो किसानों की जमीन पर रेलवे का खंभा गाड़ दिया और अब कह रहे हैं कि यह जमीन रेलवे की है जबकि ग्रामीण इसको अपने भू-स्वामी हक की जमीन बता रहे हैं। रेलवे के ठेकेदार इसमें मनमानी करते हुए ग्रामीणों की बात को नजरअंदाज करते हुए किसानों के जमीन में लगे खड़ी फसल के ऊपर मिट्टी डालने की तैयारी में लगे हुए हैं। इसकी भनक लगने के बाद ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए डिवीजन रेल कारीडोर और जिला प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया है।

ग्रामीणों ने बताया है कि रॉबर्टशन रेलवे स्टेशन के समीप लूप लाईन बनवाने के लिए कृषकों के खेत जिसमें खड़ी फसल लगाई गई है उस पर मिट्टी डालने की तैयारी की जा रही है। यही नहीं उक्त भूमि पर पिछले सत्र र्ष २०१७ में रेलव ने मनमाने ढंग से खंभा लगाकर छोड़ दिया है, हांलाकि ग्रामीणों ने रेलवे के अधिकारियों को इसके लिए चर्चा कर इसे हटाने के लिए कहने लगे पर रेलवे के अधिकारी इस मामले में सुनकर भी अनजान बने रहे और इस मामले में ग्रामीणों को आज पर्यंत न तो मुआवजा मिल पाया न ही कोई प्रक्रिया शुरू हो पाई। उक्त बातों से अवगत कराते हुए ग्रामीण राजस्व विभाग, रेलवे और ग्रामीणों की उपस्थिति में सीमांकन कराने की बात कह रहे हैं। सीमांकन में अगर ग्रामीणों की जमीन निकली तो मुआवजा राशि दिलाने की मांग कर रहे हैं।

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बिना सीमांकन के लिए ही गाड़ दिया खंभा
किसी भी भू-अर्जन की प्रक्रिया में नियमानुसार देखा जाए तो किसान की जमीन का अधिग्रहण करने के बाद सीमांकन किया जाता है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितना जमीन जा रहा है कितना नहीं। लेकिन यहां तो ग्रामीणों के बताए अनुसार बिना सीमांकन के ही जमीन पर निर्माण शुरू करने की तैयारी है।

नहीं कर पाएंगे वहन
इसके बाद भी अगर किसानों के खेतों में मिट्टी डालकर समतल किया जाता है तो संबंधित किसानों की फसल चौपट हो जाएगी। इसको लेकर किसानों का कहना है कि मुख्य आय का श्रोत कृषि कार्य है इसलिए उक्त नुकसान की भरपाई किसान नहीं कर पाएंगे जिसको देखते हुए इस मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है।

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