सिकलसेल के मरीज़ो को इतनी बड़ी राहत, पढि़ए पूरी खबर

सिकलसेल के मरीज़ो को इतनी बड़ी राहत, पढि़ए पूरी खबर

Rajkumar Shah | Publish: Nov, 15 2017 01:01:53 PM (IST) Raigarh, Chhattisgarh, India

सिकलसेल के मरीजों को अब हर माह खून चढ़ाने से जल्द ही मुक्ति मिल जाएगी। इसके लिए स्वाथ्य विभाग की तरफ से एक दवाई दी जा रही है जो उनके शरीर में खून की क

रायगढ़. सिकलसेल के मरीजों को अब हर माह खून चढ़ाने से जल्द ही मुक्ति मिल जाएगी। इसके लिए स्वाथ्य विभाग की तरफ से एक दवाई दी जा रही है जो उनके शरीर में खून की कमी को नियंत्रित करेगा।

इस दवाई के सवन करने से एक माह की जगह तीन माह में एक बार ब्लड चढ़ाया जाएगा। वहीं इस दवा का सेवन लगातार करना होगा। जिससे सिकलसेल मरीजों को काफी हद तक राहत मिलेगी।


इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार जिले में बढ़ रहे सिकलसेल के मरीजों की संख्या को देखते हुए स्वाथ्य विभाग की तरफ से हाईड्रोक्सी यूरिया नामक कैप्सूल दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सिकलसेल के मरीजों के शरीर में इस दवाई से खून के साथ ताकत की भी पूर्ति होगी। वहीं इस गोली के सेवन करने से शारीरिक कष्ट से भी मुक्ति मिलेगी।


वहीं डाक्टरों का कहना है कि इस बीमारी से पीडि़त मरीजों के शरीर में जब ब्लड की कमी होती है तो बदन दर्द, बुखार व कमजोरी बहुत ज्यादा हो जाती है। कई बार मरीज का शरीर पीला होने लगता है। इन हालात में डाक्टरों का दावा है कि अब सिकलसेल का मरीज अस्पताल रोते हुए आएगा, उनको इस दवा का डोज देने के कुछ घंटे बाद ही उनके चेहरे पर खुशी दिखने लगेगी। जिससे उनको काफी हद तक लाभ मिलेगा।


सभी प्राथमिक केंद्रों में दवा उपलब्ध- इस संबंध में डाक्टरों का कहना है कि जिले के सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में यह दवा उपलब्ध करवा दी गई है। जहां से इन मरीजों को चिन्हांकित कर दवा दिया जा रहा है। वहीं हर मरीजों को एक बार में 15 दिन की दवा उपलब्ध करवाई जा रही है। इस डोज के लेने के बाद मरीज अस्पताल आएगा और उसकी जांच की जाएगी।


मेडिकल कालेज अस्पताल में नहीं है दवा- एक तरफ स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि दवा सभी जगह उपलब्ध है, लेकिन सबसे दुर्भाग्य की बात यह है कि हाईड्रोक्सी यूरिया कैप्सूल मेडिकल कालेज अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। जिससे यहां आने वाले मरीजों को फिलहाल में इस दवा से वंचित होना पड़ रहा है। जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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