दुग्ध संघ में 15 लाख लीटर दूध गायब, नहीं मिला हिसाब

संघ के अधिकारियों की एमआईएस रिपोर्ट से हुआ खुलासा

By: Nikesh Kumar Dewangan

Published: 30 Jun 2020, 07:20 PM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ दुग्ध संघ में हिसाब में वर्षभर में 15 लाख लीटर दूध गायब है। इसका खुलासा स्वयं संघ के जिम्मेदारों की जांच में हुआ है। 'पत्रिकाÓ को मिली जांच रिपोर्ट के अनुसार संघ के पदाधिकारियों ने 15 जुलाई 2019 को एमआईएस रिपोर्ट की जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि 42044 किलो ग्राम पावडर, 38148 किलो ग्राम सितंबर में 24958 किलो ग्राम अक्टूबर में एवं 22877 किलो ग्राम नवबर में दूध पावडर घोला गया।

चौंकाने वाली बात यह है कि घोले गए पावडर से अतिरिक्त दूध निर्माण का कोई रेकॉर्ड नहीं है। लगभग 260 टन पाउडर, बटर 4.7 टन घोला गया। यदि इसमें से एसएनएफ मेंटेनेंस के लिए 100 टन पावडर का उपयोग किया गया। आखिर वह दूध कहां गया इसका एमआईएस रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं है। इसी प्रकार 2017 के वर्षभर में लगभग 15 लाख लीटर दूध का अंतर है, जिसकी कीमतर लगभग 4.5 से 4.75 करोड़ रुपए होती है।

5 साल पहले मुनाफे में चल रहा था देवभोग

2014-15 में 83 लाख रुपए के शुद्ध मुनाफे वाला देवभोग आज 2018-19 में 911 लाख रुपए के शुद्ध नुकसान और 1909.20 लाख रुपए के संचित हानि पर जा पहुंचा है। 2०14-15 से 2018-19 के बीच लगातार संचित हानि में वृद्धि हो रही है। 2010-11 में जहां 25 हजार लीटर दूध का संकलन होता था और अब 103.07 हजार लीटर संकलन हो रहा है। इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

कभी कम तो कभी ज्यादा दिखाया गया दूध

गत वर्ष 2019 के माह अप्रैल में 272953 लीटर, मई में 471842 लीटर, जून में 218582 लीटर , जुलाई में 141176 लीटर दूध की कमी दिखाया गया। इसी प्रकार दिसंबर 2018 में 42285 जनवरी 45896 में फरवरी 77590 में मार्च-2019 में 180971 भी कमी दिखाया गया। इसके अतिरिक्त माह अगस्त में 115303, सितंबर 2,07,358 अक्टूबर 47183 नवंबर 47558 लीटर दूध की मात्रा अधिक दिखाया गया।

छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रबंध निदेशक नरेंद्र दुग्गा ने बताया कि एमआईएस रिपोर्ट की जांच में यह बात सामने आ चुकी है। इस संबंध में जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

Nikesh Kumar Dewangan Desk
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