16 हजार 278 शिक्षाकर्मियों का होगा संविलियन, दो वर्ष या उससे अधिक सेवा अवधि पूर्ण करने वालों को मिलेगा लाभ

पूर्ववर्ती सरकार ने आठ साल की सेवा अवधि पूरी करने वाले शिक्षाकर्मियों को चरणबद्ध तरीके से संविलियन की घोषणा की थी। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि दो साल या उससे अधिक की सेवा अवधि पूर्ण करने वाले शिक्षाकर्मियों का संविलियन किया जाएगा।

By: Karunakant Chaubey

Updated: 15 Jul 2020, 06:54 PM IST

रायपुर. प्रदेश में दो वर्ष एवं उससे अधिक की सेवा अवधि पूर्ण करने वाले शिक्षाकर्मियों के संविलियन को राज्य मंत्रिपरिषद ने हरी झंडी दे दी है। पंचायत और नगरीय निकाय संवर्ग के शिक्षाकर्मियों का संविलियन राज्य स्थापना दिवस 1 नवम्बर 2020 को होगा। इससे 16 हजार 278 शिक्षाकर्मियों को फायदा होगा। वहीं सरकार पर सालाना करीब 425 करोड़ रुपए का वित्तीय भार आएगा।

पूर्ववर्ती सरकार ने आठ साल की सेवा अवधि पूरी करने वाले शिक्षाकर्मियों को चरणबद्ध तरीके से संविलियन की घोषणा की थी। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि दो साल या उससे अधिक की सेवा अवधि पूर्ण करने वाले शिक्षाकर्मियों का संविलियन किया जाएगा। सरकार गठन के बाद से शिक्षाकर्मियों के संगठन संविलियन अधिकार मंच इसके लिए लगातार प्रयासरत था। मंत्रिपरिषद की बैठक के पहले भी मंच के प्रदेश संयोजक विवेक दुबे के नेतृत्व में मोला हे आस-संविलियन के विश्वास नामक अभियान सोशल मीडिया के जरिए चलाया था।

जुलाई वालों का नहीं हुआ संविलियन

पूर्ववर्ती सरकार के फैसले के मुताबिक आठ साल की सेवा पूरी करने वाले शिक्षाकर्मियों का संविलियन जनवरी और जुलाई में होना था। जनवरी में तो शिक्षाकर्मियों का संविलियन हुआ, लेकिन जुलाई में इसका आदेश जारी नहीं हो सका। जबकि करीब ढ़ाई हजार शिक्षाकर्मियों का संविलियन होना था। अब इस मामले में विभागीय अधिकारी भी बोलने से बच रहे हैं।

बढ़ाई एक साल की परिवीक्षा अवधि

मंत्रिपरिषद ने सीधी भर्ती के समस्त पदों पर परिवीक्षा अवधि तीन वर्ष की करने का फैसला लिया है। बता दें कि अब तक परिवीक्षा अवधि दो साल के लिए ही रहती थी। छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के संयोजक अनिल शुक्ला का कहना है कि परिवीक्षा अवधि में कर्मचारियों को एक निश्चित वेतनमान मिलता है। परिवीक्षा अवधि खत्म होने के बाद ही उन्हें तय ग्रेड पे के अनुसार वेतन व अन्य सुविधाएं मिलती है। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों को एक साल ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उनका कहना है कि अधिकांश राज्यों में परिवीक्षा अवधि दो साल ही तय है।

कानूनी लड़ाई लड़ रहे मीसाबंदियों को झटका

राज्य मंत्रिपरिषद ने मीसाबंदियों को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इसके मुताबिक लोकनायक जयप्रकाश नारायण (मीसा-डीआईआर राजनीतिक या सामाजिक कारणों से निरुद्ध व्यक्ति) सम्मान निधि नियम, 2008 को निरसित करने के लिए जारी अधिसूचना दिनांक 23 जनवरी 2020 को संशोधन कर जनवरी 2019 से भूतलक्षी प्रभाव से निरसित किया गया है। इसे कानूनी लड़ाई लड़ रहे मीसाबंदियों को झटका लग सकता है।

हालांकि लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने का कहना है, इस मामले में सरकार के खिलाफ न्यायालय में अवमानना का केस चल रहा है। इससे बचने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। इसके खिलाफ भी हमारा संघ कानूनी लड़ाई लड़ेगा।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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