इस राज्य के 28 गांवों पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा, खत्म हो जाएगा नामोनिशान, जानिए क्यों

Ashish Gupta

Publish: May, 18 2018 11:52:27 AM (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
इस राज्य के 28 गांवों पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा, खत्म हो जाएगा नामोनिशान, जानिए क्यों

सरगुजा की जीवन रेखा कही जाने वाली कनहर नदी पर प्रस्तावित बांध के निर्माण से छत्तीसगढ़ के तकरीबन 28 गांवों के डूबने की आशंका है।

आवेश तिवारी/रायपुर. झारखंड सरकार कनहर नदी पर गढ़वा में बैराज बनाने जा रही है। सरगुजा की जीवन रेखा कही जाने वाली कनहर नदी पर प्रस्तावित बांध के निर्माण से छत्तीसगढ़ के तकरीबन 28 गांवों के डूबने की आशंका है। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस बैराज का निर्माण अतिशीघ्र शुरू किए जाने की बात कही है और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। करीब 1908 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जाने वाले इस बांध के निर्माण को लेकर युद्धस्तर पर प्राशासनिक कवायद शुरू कर दी गई है। छत्तीसगढ़ को बोल दिया गया है कि जब झारखंड के पास पैसे होंगे, तब मुआवजे का भुगतान कर दिया जाएगा।

308 मीटर ऊंचा बनेगा बैराज
झारखंड जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित बांध के निर्माण से आबादी क्षेत्र की तुलना में कोयला खदानों के इलाके ज्यादा प्रभावित होंगे। प्रस्ताव के अनुसार, इस बांध के निर्माण के लिए 17.10 किमी लम्बी कैनाल गढ़वा के लावाडोमी तक ले जाई जायेगी, जहां 308 मीटर ऊंचे एक बांध का निर्माण किया जाएगा। इस पर 82.2 किलोमीटर और 46.97 किमी लम्बे दो बैराज निकाले जायेंगे, जिससे 53283 हेक्टेयर में सिंचाई संभव हो सकेगी।

उत्तरप्रदेश ने अब तक नहीं दिया मुआवजा
छत्तीसगढ़ सरकार ने गढ़वा में बनने वाले इस बांध को लेकर भू अर्जन की प्रक्रिया के लिए तत्काल धन की व्यवस्था करने को भी कहा है। गौरतलब है कि पहले छत्तीसगढ़ की आपत्तियों के बावजूद जशपुर से निकलने वाली कनहर नदी पर उत्तर प्रदेश के दुद्धी में भी बैराज का निर्माण शुरू किया गया था, जिस पर छत्तीसगढ़ में विरोध हुआ था। 2015 में निर्माण शुरू होने के बाद अब तक छत्तीसगढ़ के डूब प्रभावित गांवों को मुआवजा नहीं मिला है। छत्तीसगढ़ लगातार उत्तर प्रदेश से पुनर्वास योजना के पैसे मांग रहा है।

डूबेंगे छत्तीसगढ़ के ये इलाके
छत्तीसगढ़ के रामचंद्रपुर तहसील के अलावा लुर्गी, शिवपुरी, महावीरगंज, विजयनगर, कनकपुर, महावर, फुलवार, मीठगाँव, चिनिया गांव आदि के डूबने की आशंका जताई गई है। गौरतलब है कि इन गांवों में सैकड़ों उप गांव और टोले भी शामिल हैं। बांध के प्रारम्भिक डीपीआर में कहा गया है कि इससे छत्तीसगढ़ में 6480 हेक्टेयर क्षेत्र के 11 हजार 934 राजस्व प्लॉट प्रभावित होंगे। अगर बैराज की ऊंचाई बढ़ाई गई, तो डूबने वाले गांवों की संख्या बढ़ेगी।

केंद्र से मंजूरी
झारखंड बैराज सर्किल के मुख्य अभियंता राम निवास प्रसाद ने कहा कि कनहर पर बैराज का निर्माण झारखंड की जरूरत है केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद बांध के निर्माण को लेकर प्रशासनिक कवायद शुरू कर दी गई है ।

कार्रवाई चल रही है, पैसा नहीं मिला
छत्तीसगढ़ हसदेव गंगा के चीफ इंजीनियर इन्द्रजीत उइके ने कहा कि छत्तीसगढ़ की इस बैराज के निर्माण को लेकर आपात्तियां कायम हैं। भू अर्जन को लेकर कार्रवाई चल रही है, पैसा हमें अब तक नहीं मिला है। झारखंड का कहना है कि हम बजट में व्यवस्था होते ही धन अवमुक्त करेंगे।

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