नवम्बर के 19 दिन में 571 की मौत, इनमें 212 मरीजों की आईसीयू में

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से खुलासा: संक्रमित गंभीर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही

By: VIKAS MISHRA

Published: 22 Nov 2020, 05:36 PM IST

रायपुर. प्रदेश में कोरोना संक्रमण से मरने वाला हर तीसरा व्यक्ति आईसीयू में भर्ती था। जी, हां यह चौंकाने वाला खुलासा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हुआ है। इससे स्पष्ट है कि मरीज बेहद गंभीर या कहें कि आखिरी स्टेज में अस्पताल पहुंच रहे हैं। और फिर डॉक्टरों के लिए जान बचाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में आईसीयू की बड़ी मशीनें, वेंटिलेटर सिस्टम सबकुछ धरे के धरे रह जा रहे हैं।
'पत्रिकाÓ पड़ताल में सामने आया कि नवंबर में औसतन हर रोज 30 मरीज दमतोड़ रहे हैं। नवंबर के 19 दिनों में 571 मरीजों की मौत हुई। आंकड़े बताते हैं कि इनमें से 212 मरीज आईसीयू में भर्ती थे। एक और चौकाने वाला तथ्य यह है कि 60 प्रतिशत से अधिक मरीजों की मौत आईसीयू में रहने के 24-48 घंटे के बीच हो रही है। डॉक्टरों की मरीजों को सलाह है कि लक्षण दिखे तो कोरोना टेस्ट करवाएं। पॉजिटिव आने पर अस्पताल में भर्ती हो जाएं, ताकि समय पर इलाज मिल सके। बुजुर्गों का ख्याल रखा जाए, क्योंकि सब से ज्यादा खतरा इन्हीं को है।
50 प्लस के व्यक्तियों को ज्यादा खतरा
कोरोना संक्रमण शुरू से ही बुजुर्गों पर भारी पड़ रहा है। नवंबर में भी 571 मरीजों की मौत हुई, जिनमें से 80 प्रतिशत की उम्र 50 साल से अधिक रही। इनमें भी पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है।
इन केंद्रों में भी आक्सीजनयुक्त बेड
सीएचसी आरंग- 5, सीएचसी राखी- 5, सीएचसी अभनपुर- 5, सीएचसी गोबरानवापारा- 5, सीएचसी तिल्दा- 7, सीएचसी खरोरा- 5, सीएचसी धरसीवां- 4, शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुढिय़ारी- 5, शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोखोपारा- 4, बीरगांव 5, जिला अस्पताल पंडरी 6 और जिला अस्पताल कालीबाड़ी 6 बेड।
विभाग की अपील झोलाछाप से बचें
प्रदेश में झोलाछाप कथित डॉक्टर कहे जाने वाले कोरोना मरीजों की मौत की वजह बन रहे हैं। आंबेडकर अस्पताल के कोविड19 हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बताया कि अधिकांश मरीजों ने पूछे जाने पर यही कहा कि वे गांव के डॉक्टर से इलाज करवा रहे थे। इसलिए अगर जान प्यारी है तो इन झोलाछाप से इलाज करवाने से बचें।

आईसीयू की जरुरत वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। इनकी जान भी जा रही है। मौतों को रोकने के लिए जरूरी है, सबका जागरूक होना।
डॉ. सुभाष पांडेय, प्रवक्ता एवं संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य विभाग

एक्सपर्ट व्यू
देखिए, अभी बुजुर्ग मरीजों की संख्या बहुत बढ़ गई है। होता क्या है कि पहले लक्षण होने पर जांच नहीं करवाते। झोलाछाप से इलाज करवाते रहते हैं। क्योंकि वह सस्ता इलाज करता है। और जब स्थिति बिगड़ती है, तब कोविड टेस्ट करवाते हैं। अस्पताल आते-आते इतनी देर हो जाता है कि हम डॉक्टरों के हाथ में बहुत कुछ करने के लिए रह नहीं जाता। यह दौर बहुत क्रिटिकल है। लोगों को इस बीमारी की गंभीरता को समझाना होगा। झोलाछाप से इलाज करवाने से बचें। लक्षणों को नजरअंदाज न करें। तभी बच सकते हैं।
डॉ. ओपी सुंदरानी, आईसीयू हेड, डॉ. आंबेडकर अस्पताल एवं सदस्य राज्य कोरोना कोर कमेटी

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