पौने 8 करोड़ के घोटाले में कस्टम अफसर समेत 6 दोषियों को 3-3 साल की सजा

फर्जी दस्तावेज के जरिए पौने आठ करोड़ रुपए का केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क घोटाला मामले में 6 आरोपियों को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 3-3 साल का कारावास और 6.25 लाख जुर्माने से दंडित किया है।

By: Ashish Gupta

Updated: 29 Mar 2019, 12:50 PM IST

रायपुर. फर्जी दस्तावेज के जरिए पौने आठ करोड़ रुपए का केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क घोटाला मामले में 6 आरोपियों को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 3-3 साल का कारावास और 6.25 लाख जुर्माने से दंडित किया है। सजा पाने वालों में सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम विभाग का एक अधिकारी भी शामिल है।

सीबीआई के स्पेशल जज सुनील कुमार नंदे ने मामले में फैसला सुनाया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 65 गवाह पेश किए गए थे। आरोपियों ने भाटापारा की बंद पड़ी फैक्ट्री में पॉलिएस्टर यार्न उत्पादन करने का झांसा देकर लाइसेंस बनवाया था।

बिना किसी क्रय-विक्रय किए 7 करोड़ 70 लाख 53477 रुपए की केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क की चोरी कर रहे थे। इसकी शिकायत मिलने के बाद दिल्ली की सीबीआई टीम ने भाटापारा स्थित फर्म में छापा मारा था। जांच के दौरान गड़बडी़ पकड़े जाने के बाद आरोपियों के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में चालान पेश किया गया था।

सीबीआई के लोक अभियोजक रजत कुमार श्रीवास्तव ने बताया की भाटापारा की मैसर्स पॉलिटेक्स प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी प्राणतोष शर्मा (40) निवासी ब्राह्मणपारा कंकाली मठ रायपुर, राजीव जैन (53) निवासी बरुआ सागर गायत्री मंदिर दुर्ग, दिनेश ममरवाला उर्फ दिनेश मोदी (58) निवासी गकवार्ड हाइट्स पुणे महाराष्ट्र, रमेश मोहन पशुवाला (63) निवासी रिवेरा कोऑपरेटिव सोसायटी कोरेगांव महाराष्ट्र, प्रवीण अग्रवाल (57) निवासी खेमका भवन मुंबई और विजय एम. बुरेवार (57) निवासी चंद्रपुर महाराष्ट्र ने भाटापारा कि बंद पड़ी फैक्ट्री को किराए पर लिया था।

शर्तो के अनुसार आरोपियों को पॉलिएस्टर फैब्रिक उत्पादन करना था। लेकिन, वह बिना उत्पादन किए ही कागजों में सामानों की आपूर्ति कर रहे थे। साथ ही ट्रकों के जरिए कच्चा माल भी कोलकाता के हावड़ा स्थित मैसर्स वृंदा टैक्स कंपनी को आपूर्ति करना बताया जा रहा था। यह खेल जून 2003 से अगस्त 2003 के बीच चलता रहा।

ऑटो और स्कूटर को बताया मालवाहक
आरोपी ऑटो और स्कूटर के जरिए हजारों टन माल कोलकाता भेजते थे। रजिस्टर में 57 वाहन के जरिए इसका परिवहन करना बताया गया था। इसमें से इसका नंबर भी बाकायदा 96 इनवाइस में किया गया था। इसके नंबरों की जांच करने पर सीबीआई को पता चला कि जिस मालवाहक से सामान भेजना बताया गया है, दरअसल वह नंबर ऑटो और स्कूटर के हैं। फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद सीबीआई ने 1 मई 2008 को चालान पेश किया था।

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