बस्तर की रैली कोसा का कारोबार कर आप भी बन सकते हैं लखपति, यहां हुई 6 करोड़ की खरीदी

बस्तर की रैली कोसा का कारोबार कर आप भी बन सकते हैं लखपति, यहां हुई 6 करोड़ की खरीदी

Chandu Nirmalkar | Publish: Sep, 02 2018 04:45:49 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

रैली कोसा का कारोबार कर आप भी बन सकते हैं लखपति, यहां हुई 6 करोड़ की खरीदी

रायपुर. छत्तीसगढ़ के घोर नक्सली प्रभावित क्षेत्र बस्तर में इस बार रैली कोसा की बंपर पैदावार होने से अब तक साढ़े 4 करोड़ से ज्यादा की खरीदी हो चुकी है। वहीं, आने वाले दिनों में मौसम की मेहबानी से व्यापार 6 करोड़ रुपए तक जाने की संभावना जताई जा रही है। अगर आप भी व्यापार करने के इच्छुक है रैली कोसा का करोबार कर लखपति बन सकते हैं। जानिए बस्तर के रैली कोसा के बारे में..

 

Kosa

बस्तर की खास प्रजाति है रैली
रैली कोसा बस्तर की खास प्रजाति है। इस प्रजाति को उत्पादन के लिए साल का वन चाहिए होता है। मानवीय दखलंदाजी वाले इलाके में यह नहीं होता है। इधर साल के कम होते वन व कोसा तस्करी की वजह से बीते कुछ साल में इसका उत्पादन बेहद कम हो रहा था। जो उत्पादन हो भी रहा था वह बाजार की बाजए सीधे तस्करों के हाथ लग जा रहा था। इस मर्तबा ऐसी नौबत कम होने की वजह से रैली आदिवासी संग्राहकों के लिए बेहतर आमदनी का जरिया बन रही है।

यूूं बनता है कोसा सिल्क महीन धागा
साल व साजा के वनों में कोसा की तितलियों के लार्वा से बने कुकुन में अंडे को जंगलों से इक_ा किया जाता है। इनमें से अच्छे कुकुन को चुन कर उन्हें उबाला जाता है। उबालने के बाद इनसे रेशम का धागा निकाला जाता है। इस व्यवसाय से जुडे लोगों के अनुसार 7 से 8 कोकून से मिलाकर 1 पूरा लम्बा धागा तैयार होता है। इसके बाद धागे में रंग लगाया जाता है। सूखने के बाद धागे को लपेट कर एक गड्डी बनाई जाती है जिसके बाद इस धागे से साडिय़ों को तैयार किया जाता है। ग्रामीण प्राकृतिक रंगों से सिल्क को रंगते हैं। कोसा सिल्क की एक साड़ी को तैयार करने में 7 से 8 दिन लगते हैं।

जितनी होती है धुलाई उतना खिलता है रंग
बस्तर के साल वनों मे प्राकृतिक तौर पर उत्पादित होने वाली रैली कोसा से बने धागे मटमैले व धूसर रंग के होते हैं। इनसे बनाया गया धागा मजबूत होता है। इससे बनी साडिय़ां, कुर्ते व अन्य फेब्रिक की खासियत यह होती है कि जितनी बार इसकी धुलाई होती है इसका रंग चमकदार होता जाता है। इसके चलते इसकी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी बेहद मांग है।

इन बाजारों में बहुतायत से पहुंच रही फसल
बस्तर के 52 हाट बाजार में कोसा फल की आवक बहुतायत से हो रही है। इनमें दरभा, नानगुर, नेंगानार, तोकापाल, बकावंड, बस्तर, करपावंड, सोनारपाल सहित अन्य हाट बाजार में इनकी बिक्री हो रही है। राज्य रेशम विभाग के अनुसार इनके दाम एक रुपए से लेकर तीन रुपए तक अदा किए जा रहे हैं। यानि की इस मौसम में 12 से 15 करोड़ रुपए की आमदनी होगी।

आपको बता दें कि साल में दो बार फसल देने वाली रैली कोसा के लिए इस बार मौसम इतना मुफीद हुआ कि उसके उत्पादन ने लक्ष्य को भी काफी पीछे छोड़ दिया। रेशम विभाग ने इसके लिए जहां तीन करोड़ का लक्ष्य साधा था वहीं इसकी पैदावार व संग्रहण इस कदर हो रहा है कि जिले के 52 हाट बाजार में अब तक साढ़े चार करोड़ से ज्यादा फल की खरीदी हो चुकी है। विभागीय आंकड़े के परे जाएं तो यह संख्या छह करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। इसके अलावा साल के घने जंगल में बिना संग्रहण के इसका आंकड़ा और भी ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है।

उपसंचालक राज्य रेशम अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि रैली कोसा के अलावा मलबरी व डाबा कोसा का भी उत्पादन बढ़ा है। कोसा के उत्पादन, संग्रहण से जुड़े 12 हजार से अधिक हितग्राहियों को इससे रोजगार के साथ ही साथ अच्छा खासा मुनाफा भी मिल रहा है। बीते साल की तुलना में रैली एक करोड़ से अधिक वहीं मलबरी से 9975 किलो का उत्पादन हुआ है।

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