मानवता तार-तार: परिजनों के इंतजार में सड़ने लगे हैं कोरोना संक्रमितों के 8 शव, इनमें 3 नवजात बच्चे भी

कोरोना से मरने वाले मृतकों के परिजन शव लेने शासन-प्रशासन से संपर्क तक नहीं कर रहे। 2 से लेकर 4-5 हफ्तों से शव अस्पतालों की मर्चुरी में पड़े-पड़े सड़-गल रहे हैं। इनमें कीड़े पड़ रहे हैं।

By: Bhawna Chaudhary

Updated: 17 Sep 2020, 11:39 AM IST

रायपुर. कोरोना काल में अपनों के प्रति अपनों की ही मानवता शून्य पर जा पहुंची है। स्थिति यह है कि कोरोना से मरने वाले मृतकों के परिजन शव लेने शासन-प्रशासन से संपर्क तक नहीं कर रहे। 2 से लेकर 4-5 हफ्तों से शव अस्पतालों की मर्चुरी में पड़े-पड़े सड़-गल रहे हैं। इनमें कीड़े पड़ रहे हैं। कुछ को तो अब हाथों से उठाना भी संभव नहीं रहा। यह इस आपदा की सबसे विकराल तस्वीर है। मानवता तार तार हो रही है।

'पत्रिका' पड़ताल में सामने आया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल रायपुर स्थिति मर्चुरी में कोरोना बीमारी से जान गवांने वाले 8 मृतकों के शव हफ्तों से स्ट्रेचर पर ही रखे हैं, क्योंकि मर्चुरी में 8 ही फ्रीजर है। सामान्य बीमारी या घटना-दुर्घटना में मरने वालों के शव भी प्रबंधन को फ्रीजर में रखने होते हैं।

कोरोना मृतकों के शवों को सामान्य मृतकों से अलग रखा जा रहा है। जिस रूम में ये शव हैं, वहां से तेज बदबू आनी शुरू हो चुकी है। शवों से हानिकारक मीथेन गैस निकलने लगी है। यहां सेवारत डॉक्टर ने बताया कि अब तो शवों को पहचान पाना भी मुश्किल हैं। इनमें 3 नवजात बच्चे भी हैं।

स्थिति बहुत भयावह है। उधर, नियमानुसार कोरोना संक्रमित मृतक का दाह संस्कार परिजनों की उपस्थिति में ही होना है। जब तक परिजन नहीं आएंगे, शव का पंचनामा नहीं बनेंगा। पंचनामा नहीं बनेगा तो दाह संस्कार भी नहीं होगा। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने पुलिस प्रशासन व जिला प्रशासन को शवों के जल्द से जल्द दाह संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने को लेकर पत्र लिखा है। क्योंकि इन हालातों में डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ का काम करना मुश्किल हो रहा है। इतना ही नहीं फॉरेसिंक मेडिसिन (मर्चुरी का संचालनकर्ता विभाग) के डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और स्वीपर पीपीई किट पहनकर पोस्टमार्टम कर रहे है। मगर, ये संक्रमित भी हो रहे हैं।

15 पीएम रोजाना कर रहे डॉक्टर : फॉरेसिंक मेडिसिन विभाग में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर लॉक डाउन के दौरान पीएम के लिए शव कम आते थे, क्योंकि घटनाएं कम हो रही थी। मगर, अब फिर बढ़ गई है। औसतन 15 शव रोजाना आ रहे है।

शवों के बारे में जानकारी
खुमान सिंह, बलौदाबाजार (एक माह से अधिक) 3 अज्ञात शव- जिनमें 7-8 साल का बच्चा (एक महीना),2 वयस्क व्यक्ति। 3 नवजात शिशुओंके शव। 1 महिला का शव है।

महिला की पहचान साड़ी से हुई
सूत्र बताते हैं कि पूर्व में लंबे समय तक रखे एक महिला के शव को लेने परिजन पहुंचे। मृतिका का शव सड़ गल गया था। पहचान नहीं आ रहा था। पहचान उसकी साड़ी से की गई थी।

मरीजों के मरने के बाद ऐसी होती है पूरी प्रक्रिया अ
स्पताल में कोरोना संक्रमित मरीज के मरने के बाद शव परिजनों को नहीं सौंपा जाता। शव मयुरी में रखा जाता है। शव को जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीमें परिवार के 2 सदस्यों की मौजूदगी में चिन्हित श्मशान घाटों में दाह संस्कार करती हैं। वहां दाह संस्कार होता है। यह निर्धारित प्रोटोकॉल जिला प्रशासन के पास है। परिजनों के आने पर ही दाह संस्कार की प्रक्रिया होती है।

कोरोना से मरने वाले व्यक्ति का शव संबंधित जिला प्रशासन को ही सौंपे जाने का नियम है। कुछ शव के मच्च्युरी में काफी दिनों से रखे होने की जानकारी मिली है। मैं इस संबंध में प्रशासन स्तर पर बात करता हूं। शवों के दाह संस्कार की प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए।
-डॉ. विष्णु दत्त, डीन, पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज रायपुर

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