कोरोना वायरस के 80 और मलेरिया के 60 फीसदी मरीजों में नहीं दिख रहे लक्षण

कोरोना वायरस के 80 और मलेरिया के 60 फीसदी मरीजों में नहीं दिख रहे लक्षण

By: Bhawna Chaudhary

Published: 30 Jun 2020, 06:00 PM IST

रायपुर. पूरी दुनिया के वैश्विक महामारी कोरोना से जंग लड़ रही है। यह छिपा हुआ है सा शत्रु है जो कभी भी किसी पर हमला कर सकता है। खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन यह कह चुका है कि कोरोना के 80% मरीजों में लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए यह और भी ज्यादा खतरनाक बीमारी बन गई है।

छत्तीसगढ़ में भी यही स्थिति है हमारे राज्य कोरोनावायरस मात देने के लिए संघर्षरत है तो मानसून की दस्तक के साथ ही मलेरिया का प्रकोप शुरू हो चुका है। बस्तर में जारी मलेरिया मुक्त वस्त्र अभियान के तहत एक चौंकाने वाला नतीजा सामने आया है। जनवरी-फरवरी में चले पहले चरण में जहां 57 प्रतिशत वही अब दूसरे चरण में मिले मरीजों में से 60 प्रतिशत में लक्षण नहीं पाए गए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य अ मले के साथ चुनौती दोगुनी हो गई।

बरसात में मलेरिया संक्रमण की ज्यादा संभावना को देखते हुए जांच और पॉजिटिव पाए गए लोगों को 31 जुलाई तक दवाई खिलाने के निर्देश स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने जारी किए गए हैं। दूसरे चरण में अब तक 2.93 लोगों की जांच की जा चुकी है। इस दौरान 9005 लोग संक्रमित पाए गए जंगल, नदी, पहाड़ पार कर स्वाथ्य अमला हर एक घर तक पहुंचने की कोशिश में जुटा हुआ है। यह सघन अभियान बस्तर में मलेरिया के साथ ही अनीमिया और कुपोषण दूर करने के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है।

दोनों बीमारियों में समानता
दोनों ही बीमारियों में वायरस शरीर के अंदर रेड ब्लड सेल को तोड़ता है। ऐसे खून का थक्का जमता है। दोनों ही बीमारी में मरीज को बुखार आता है। मरीज शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो जाता है। मलेरिया की दवाई हाइड्रोक्साइड क्लोरो क्वीन कोरोना भी सरदार है। एक सच्चाई यह भी है कि बस्तर संभाग में कोरोना के मरीज मिले हैं क्योंकि यहां अधिकांश लोग दवा खा चुके हैं।

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