ये हैं 82 साल के यंगेस्ट प्रोफेसर, रिटायरमेंट के 22 साल बाद भी टीचिंग में नंबर 1

रविवि के लॉ डिपार्टमेंट में लेते हैं इंग्लिश की क्लास

By: Tabir Hussain

Published: 05 Sep 2019, 03:03 PM IST

ताबीर हुसैन @ रायपुर. कहते हैं उम्र से क्या फर्क पड़ता है। ये तो एक संख्या मात्र है। इसे साबित कर रहे हैं रिटायर्ड प्रोफेसर राजभारती खनूजा। आज भी उसी जज्बे और जोश के साथ पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट्स को अंग्रेजी पढ़ा रहे हैं। खुद कार ड्राइव करते हुए ठीक 10.25 को वे यूनिवर्सिटी पहुंच जाते हैं। जल्द ही वे लिग्विस्टिक डिपार्टमेंट में डिप्लोमा क्लासेस लेते नजर आएंगे। वे कहते हैं कि टीचिंग इज माय पैशन। इट इज माय फस्र्ट लव। टीचिंग मेरे लिए प्राण वायु है। आज शिक्षकों का दिन है टीचर्स डे। हमने कुछ स्टूडेंट्स से बात की और जाना कि वे अपने शिक्षकों की टीचिंग स्टाइल पर क्या सोचते हैं। साथ ही रिटायर्ड प्रो. प्रो. खनूजा से उनकी एनर्जी का राज भी पूछा।

जब तक चलोगे, तब तक चलोगे
खनूजा ने बताया कि मैं सुबह 4.30 बजे उठता हूं। मॉर्निंग वॉक के अलावा योग और जिम से खुद को फिट रखता हूं। खनूजा की मानें तो बॉयोलॉजिकल तौर पर फिट रहने के लिए अच्छा खानपान और नेचर के मुताबिक रूटीन होनी चाहिए। इसके अलावा जिस काम में मजा और रुचि हो उस पर श्रद्धा रहनी चाहिए। असली एनर्जी तो इन्हीं चीजों से मिलती है। खनूजा कहते हैं कि जब तक चलोगे, तब तक चलोगे। यानी आपमें हमेशा बहाव होना चाहिए।

यहां दे चुके हैं सेवाएं
खनूजा 1997 में बतौर प्रिंसिपल, असि. डायरेक्टर रिटायर हुए। इसके बाद वे जरा भी खाली नहीं रहे। पं. हरशिंकर कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया। हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में करीब 5 साल पढ़ाते रहे।
इसके बाद एक नेत्र अस्पताल में 2 साल तक इग्नू कोर्स की क्लास ली। इन दिनों रविवि में अंग्रेजी की क्लास ले रहे हैं और जल्द ही भाषा विभाग में एक सब्जेक्ट पढ़ाने की शुरुआत करेंगे। खनूजा के छात्रों का कहना है कि सर डिसीप्लीन के मामले में बेहद स्ट्रिक्ट हैं। चूंकि वे खुद टाइम को लेकर पंचुअल हैं। पढ़ाने का तरीका भी सबसे अलग है। 

एनआईटी इन प्रोफेसर्स का सबक यादगार
एनआईटी के डायरेक्टर डॉ एमए रवानी, प्रोफेसर एसपीएस माथरू, देबाशीष सान्याल और अबिर बंधोपाध्याय की टीचिंग स्टाइल से उनके स्टूडेंट काफी प्रभावित हैं। हरिकुमार नायर इन दिनों दुबई में कॉन्ट्रेक्टर कंपनी के डिजाइन मैनेजर हैं। वे उस कंपनी के साथ काम कर चुके हैं जिसने बुर्जखलीफा का कंस्ट्रक्शन किया है। हरि ने वाट्सऐप कालिंग में बताया कि जब अबिर बंधोपाध्याय आए थे तब वे फ्रेशर थे। एक तो बहुत ज्यादा एज गेप नहीं था। दूसरा उनमें जरा भी ईगो नहीं था। कभी-कभी तो वे खुद स्टूडेंट बन जाया करते थे। आईओसीएल भोपाल में कार्यरत भानूप्रताप चंद्राकर कहते हैं कि प्रो सान्याल पढ़ाई के साथ ही दुनियादारी की चीजें भी सिखाया करते थे। उनका इंटरव्यू टिप्स मेरे लिए काफी हेल्पफूल रहा। मथारू सर इतने फ्रेंडली प्रोफेसर थे कि उनका लंच बॉक्स हम लोग खा लिया करते थे। आटोमोबाइल पर उनकी जानकारी मेरे लिए काफी हेल्पफुल रही। इसी तरह प्रो रवानी का मैनेजमेंट फंडा काफी कमाल का था। वे रियल प्रॉब्लम का प्रैक्टिल सॉलुशन दिया करते थे। उनसे टीम लीडर की स्किल मैंने जो सीखी वो आज भी काम आ रही है।

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गूंजन और साईबा के लिए मीनिंगफुल रहे बंछोर के टिप्स
यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग पर पीएचडी कर रही गूंजन रतेरिया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पासआउट साईबा कटारुका ने अपने टीचर नागेश बंछोर की टीचिंग स्टाइल से प्रभावित हैं। दोनों ने वाट्सऐप कॉलिंग में बताया कि बंछोर सर की क्लास फन-फन में पढ़ो की तर्ज पर होती थी। गूंजन ने कहा कि वे हमेशा रिजल्ट ओरिएंटेड ट्रेनिंग देते हैं। वे हर एक स्टूडेंट के इंप्रूवमेंट में ध्यान देते हैं। साईबा ने कहा कि उनकी क्लास में हम भूल जाते हैं कि पढा़ई चल रही है। नतीजे के अलावा विश्लेषण भी करते थे। आईबीएम में कंसल्टेन के रूप में पहले इंडिया और उसके बाद स्वीडन में काम कर चुके साईबा का 2015 में ऑक्सफोर्ड में एडमिशन हुआ। फिलहाल वे सिंगापुर में फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के स्टार्टअप के साथ काम कर रहे हैं।मालूम हो कि बंछोर भेल में 4 साल जॉब कर चुके हैं। वे आईएएस के इंटरव्यू राउंड तक भी पहुंच चुके थे। बंछोर कहते हैं कि मुझे लगा कि मैं छात्रों को बेहतर तरीके से पढ़ा सकता हूं और इसी चीज के लिए बना हूं। इसलिए मैंने नौकरी छोड़ दी। मुझे नई चीजें सीखना और सिखाना अच्छा लगता है।

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रविवि के कुलपति और प्रोफेसर्स  बनेंगे सरकारी स्कूल के छात्रों के मेंटर
रायपुर. सुनने में थोड़ी हैरत जरूर होगी लेकिन यह बात 100 फीसदी सही है। पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के कुलपति केशरीलाल वर्मा प्राइमरी के बच्चों से मुखातिब होंगे। वे उन्हें बताएंगे कि लाइफ में आगे बढऩे के लिए क्या जरूरी है। दरअसल, रविवि ने बीएड डिपार्टमेंट से लगे कुकुरबेड़ा हायर सेकंडरी स्कूल को अडॉप्ट किया है।
सरकारी स्कूल के बच्चों को प्राइवेट से भी ज्यादा सुविधा देने और उन्हें गाइड करने के मकसद से रविवि ने यह इनिशेटिव लिया है। इसके तहत वहां पहली से 12वीं तक के छात्रों को यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पढ़ाने जाया करेंगे। बीएड विभाग के स्टूडेंट्स के लिए एक प्रैक्टिकल भी हो जाएगा।

ये है मकसद
कुलपति वर्मा ने बताया कि वैल्यू एजुकेशन हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। कई बार ऐसा होता है कि नदी के किनारे लगे गांव ही प्यासे रह जाते हैं। ऐसे ही विवि से लगा कुकरबेड़ा स्कूल है। अगर हमारे प्रोफेसर या बीएड के स्टूडेंट उन्हें उनकी उम्र के मुताबिक ऐसी कोई जानकारी या रास्ता दिखाते हैं जिससे उनका कॅरियर संवर सके तो इससे बेहतर और क्या होगा। हमारे यहां इतने प्रोफेसर और गेस्ट प्रोफेसर हैं कि वे एक पीरियड भी लें तो 150 दिन बाद उनका दोबारा नंबर आएगा। मैं खुद वहां के छात्रों को पढ़ाऊंगा।

टीचर्स डे से शुरुआत
बीएड डिपार्टमेंट के डायरेक्टर सीडी अगाशे ने कहा कि कार्ययोजना पहले ही तैयार हो चुकी है। शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर से इसका औपचारिक उद्घाटन हो गया। हालांकि वहां जो पढ़ाई हो रही है उसमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तय दिनों में क्लास ली जाएगी। इतना ही नहीं उस स्कूल में डिजिटल सुविधाएं मुहैया कराने के लिए भी विवि के प्रोफेसर्स ने हामी भरी है। ये काम किसी एक का नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास है। हम चाहते हैं कि यह स्कूल मॉडल बनकर उभरे। 

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Tabir Hussain Incharge
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