script95 pratishat boni ho chuki ke puri, nim yuriya ka estman karne ki apil | झमाझाम बारिश से बलौदाबाजार जिले में कृषि कार्यों में आई तेजी, खाद की पर्याप्त उपलब्धता से किसान बेफिक्र | Patrika News

झमाझाम बारिश से बलौदाबाजार जिले में कृषि कार्यों में आई तेजी, खाद की पर्याप्त उपलब्धता से किसान बेफिक्र

बलौदाबाजार जिले में जोरदार बारिश होने के बाद कृषि कार्यों में तेजी आई है। बीते वर्षों की तुलना में जून अंत तक बोनी का कार्य जहां पूर्णता की ओर है। वहीं,समितियों में खाद की पर्याप्त उपलब्धता तथा स्टॉक होने की वजह से भी किसानों को परेशानी नहीं उठानी पड़ रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली नीम कोटेड यूरिया का इस्तेमाल करने की अपील की है।

रायपुर

Updated: July 01, 2022 04:48:53 pm

बलौदाबाजार। जिले में जोरदार बारिश होने के बाद कृषि कार्यों में तेजी आई है। बीते वर्षों की तुलना में जून अंत तक बोनी का कार्य जहां पूर्णता की ओर है। वहीं,समितियों में खाद की पर्याप्त उपलब्धता तथा स्टॉक होने की वजह से भी किसानों को परेशानी नहीं उठानी पड़ रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली नीम कोटेड यूरिया का इस्तेमाल करने की अपील की है।
विदित हो कि बीते वर्षों तक कृषि सीजन के शुरुआती दिनों में ही किसानों को खाद का इंतजाम करने के लिए हलाकान होना पड़ता था, जिसका असर कृषि कार्यों पर पड़ता था। इस सीजन में अब तक जिले के किसी भी ब्लॉक में खाद की समस्या नहीं होने से किसान निश्चिंत होकर कृषि कार्यों में जुटे हैं। जिले में 1 जून से 30 जून तक कुल 143 मिमी बारिश हो चुकी है, जो बीते वर्षों की आधार पर जिले की औसत बारिश से भले ही थोड़ी कम है,परंतु कृषि कार्यों के लिहाज से पर्याप्त होने से कृषि कार्य जोरों पर हैं। जिले में अब तक पर्याप्त बारिश होने के बाद बीते सप्ताह भर से तेज धूप निकलने से किसान बेहद प्रसन्न हैं तथा वे अकरस जोताई के साथ ही साथ बोनी के कार्यों में जुटे हुए हैं। अकरस जोताई के बाद तेज धूप कृषि कार्यों के लिहाज से बढिय़ा मानी जाती है जिसकी वजह से इन दिनों खेतों में जोरों से बोनी का कार्य चलता नजर आ रहा है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जून अंत तक जिले में बीते वर्षों में लगभग 85 से 90 प्रतिशत बोनी हो जाती थी, परंतु इस वर्ष जून माह के अंत तक 95 प्रतिशत बोनी पूर्ण हो चुकी है जो बीते वर्षों से अधिक है। समय पर कृषि कार्यों के होने से आगे भी फसल समय पर तैयार हो जाने की संभावना अधिक होती है।
खाद का है पर्याप्त स्टॉक
शासन द्वारा इस वर्ष जिले में पर्याप्त खाद प्रदान किए जाने की वजह से खाद को लेकर कहीं पर भी किसानों को परेशान नहीं होना पड़ रहा है। जिले में सहकारी समितियों में यूरिया 24490 मीट्रिक टन, डीएपी 12570 मीट्रिक टन, एमओपी 1762 मीट्रिक टन, एसएसपी 4206 मीट्रिक टन, तथा एनपीके 66 मीट्रिक टन समेत कुल 43098 मीट्रिक टन का स्टॉक किया गया है। वहीं, निजी क्षेत्रों में यूरिया 9755 मीट्रिक टन, डीएपी 2806 मीट्रिक टन, एमओपी 270 मीट्रिक टन, एसएसपी 4189 मीट्रिक टन तथा एनपीके 926 मीट्रिक टन समेत कुल 17946मीट्रिक टन,का भंडारण किया गया है। मांग की तुलना में सहकारी समितियों में यूरिया 20028 मीट्रिक टन, डीएपी 10791 मीट्रिक टन, एमओपी 1003 मीट्रिक टन, एसएसपी 2605 मीट्रिक टन तथा एनपीके 9 मीट्रिक टन का वितरण किया गया है। वहीं, निजी क्षेत्रों में यूरिया 6231 मीट्रिक टन, डीएपी 1988 मीट्रिक टन, एमओपी 66 मीट्रिक टन, एसएसपी 2057 मीट्रिक टन तथा एनपीके 413मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। जिले में अभी भी सहकारी समितियों में 8662 मीट्रिक टन तथा निजी क्षेत्रों में 7191 मीट्रिक टन खाद का भंडारण हैं, जो जिले की मांग के हिसाब से अब तक पर्याप्त है।
नीम कोटेड यूरिया उपयोग करने की अपील
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से नीम कोटेड यूरिया का ही इस्तेमाल करने की अपील करते हुए बताया कि नीम कोटेड यूरिया का दाना पुराने यूरिया के मुकाबले थोड़ा बड़ा होता है, जिसकी वजह से यह देर से घुलता है। जिससे पौधे पर अधिक देर तक असर रहता है। नीम कोटेड होने की वजह से पौधे में हल्के- फुल्के कीट प्रकोप भी नहीं हो पाते हैं। बारिक दाना के यूरिया से नाईट्रोजन जल्दी उड़ जाता है, जिसकी वजह से किसान उसका अधिक उपयोग करते हैं, जबकि नीम कोटेड यूरिया के कम मात्रा में उपयोग से भी उतना ही फायदा होता है। अधिक मात्रा में यूरिया का इस्तेमाल मिट्टी के लिए भी नुकसानदायक होता है।
झमाझाम बारिश से बलौदाबाजार जिले में कृषि कार्यों में आई तेजी, खाद की पर्याप्त उपलब्धता से किसान बेफिक्र
झमाझाम बारिश से बलौदाबाजार जिले में कृषि कार्यों में आई तेजी, खाद की पर्याप्त उपलब्धता से किसान बेफिक्र

उर्वरक खाद का दो बार भंडारण
राज्य शासन द्वारा प्री मानसून तथा आफ्टर मानसून दो बार उर्वरक खाद का भंडारण किया जाता है। राज्य शासन द्वारा प्री मानसून के लिए जितनी मात्रा में यूरिया, डीएपी खाद के आबंटन की मांग केन्द्र शासन से की गई थी। उसे केन्द्र द्वारा प्रदान किया गया है। जिसे केवाईसी ऋण लेने वाले किसानों को समितियों द्वारा सुलभता से प्रदान किया जा रहा है। उर्वरक खाद के आबंटन के लिए केन्द्र को दोष देने के बजाय राज्य शासन को आफ्टर मानसून खाद के आबंटन तथा भंडारण की तैयारी करनी चाहिए, ताकि बाद में भी किसानों को खाद के लिए परेशान ना होना पड़े तथा आसानी से किसानों को खाद उपलब्ध हो सके।
नंदकुमार साहू, पूर्व अध्यक्ष, जनपद पंचायत, बलौदा बाजार

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