खेती-किसानी के तिहार 'अकतीÓ

खेती-किसानी के तिहार 'अकतीÓ

Gulal Prasad Verma | Publish: Apr, 17 2018 07:34:37 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

अतकी परब बिसेस

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सांस्करीतिक धरोहर हे 'अकती तिहारÓ ह। अकती यानी 'अक्छय तिरितियाÓ। ऐला 'आखा तीजÓ घलो कहिथें। उदारता ह हमर लोक संस्करीति के अधार आय। ऐ परब ह मालिक-नौकर यानी कमइय्या के संबंध ल मजबूत करथे। मालिक के घर रोजी-मंजूरी के काम धरई अउ छोड़ई इही दिन ले होथे। बरसभर कमइय्या काम करथे अउ अकती म छोड़थे। कमइय्या बर जम्मो नवा बूता अउ नवा बिहान हो जथे। मया के डोर टूट जाथे अउ कमइय्या नवा काम धरे के आस म ठाकुर के दुआर ल छोड़ देथे। कमइय्या अउ ठाकुर के ये बंधना बर न लेखा राहय, न जोखा। कतकोन नौकरमन जुन्ना मालिक घर फेर काम धर लेथें, त कतकोन नौकरमन नवा मालिक खोज लेथें।
किसानी के हक बर अकती के अड़बड़ महत्ता हे। गांव-गंवई म ये दिन ठाकुर देव ल मानथें अउ कोनो गांव गंवतरी नइ जांय। जब तक ठाकुरदेव म दोना नइ चघही तब तक पानी तको नइ भरंय। खेत म धान बगराय जाथे। घर के साफ-सफई करे जाथे। हर गांव म धान के भोग लगाय जाथे अउ भोग लगे धान ल 'अकती बिजहाÓ के रूप म सुरक्छित रखे जाथे। ऐकर बगैर फसल बुआई ल अपसगुन माने जाथे। बोआई के दिन भोग लगे धान ल खेत म छिंच देथें।
हमर संस्करीति म चारठिन स्वयंसिद्ध मुहूरत माने जाथे। चइत सुक्ल परतिपदा, अक्छत तिरितिया, रामनवमीं अउ दीप परब। अक्ती ह बुधवार के दिन परथे अउ रोहिनी नछत्र रहिथे त वोला सबले उत्तम तिथि माने जाथे। ये दिन बिना बिचारे ही 'अकती लगिनÓ मान लेथे।
अकती के महत्तम
- अकती के दिन पानी गिरई ल सुभ मानथें।
- अकती पानी देय ले पीतर तरपन के काम पूरा होथे।
- कमइया के काम धरई ल 'चोंगी-माखुरÓ झोंकई कहिथें।
- सुक्खा माटी के ढेला ल रखके बारि कइसे होही, तेकर सोच-बिचार करथें।
- कोठी के तरी चारठन माठी के ढेला रखथें। वोकर उप्पर पानी भरे करसी रखथें। करसी ले पानी ह माटी के ढेला उप्पर टपकथे। सबो ढेला ल भींग जथे त बने पानी बरसही, अइसे माने जाथे। जउन दिसा के ढेला सूक्खा रहि जथे त वो दिसा म पानी नइ गिरय या कमती गिरथे, अइसे माने जाथे।
- कहिथें के माता अन्नपूरना के जनम ह आज के दिन होइस हे।
- दुरपति ल चीरहरन ले भगवान किरिस्न ह आज के दिन ही बचाय रहिस।
- कुबेर ल आज के दिन ही खजाना मिले रहिस।
- सतजुग अउ त्रेताजुग के सुरुआत आज के दिन होय रहिस।
- भगवान बदरीनारायन के कपाट ल आज के दिन ही खोले जाथे।
- परसुराम के अवतार घलो इही दिन होय रहिस। वोकरे पाय के आज के दिन ल परसुराम जयंती के रूप म मनाय जाथे।
- आज के दिन भगवान बिसनु अउ लछमी के घलो पूजा करे जाथे। ऐकर पूजा करे ले बिसेस लाभ मिलथे।
- एक अउ बात पौरानिक कथा के मुताबिक आज के दिन महाभारत युद्ध के अंत होय रहिस अउ दुवापर जुग के समापन घलो होइस हे।

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