ST/SC एक्ट मामले में जारी नई गाइडलाइन छत्तीसगढ़ में निरस्त, अब सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

ST/SC एक्ट मामले में जारी नई गाइडलाइन छत्तीसगढ़ में निरस्त, अब सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

Chandu Nirmalkar | Publish: Apr, 17 2018 02:32:51 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2018 06:19:13 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

मुख्यमंत्री ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि अब इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी

रायपुर . ST/SC एक्ट मामले में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। सीएम ने सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन के संबंध में छत्तीसगढ़ पीएचक्यू से जो आदेश जारी हुआ था उसे निरस्तर कर दिया। मुख्यमंत्री ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि अब इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। सीएम ने आज यह बयान कांकेर में आयोजित कर्मा जयंती महोत्सव में शामिल होने जाने के दौरान कही।

अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नई गाइडलाइन राज्य में लागू हुई। लागू होने के बाद सोमवार को पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस अधीक्षकों को आदेश के साथ गाइडलाइन की कॉपी भेजी है। इस पर अपराध अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक आरके विज ने जारी आदशे में कहा था कि इन गाइडलाइन की अवहेलना करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। साथ ही उसे न्यायालय की अवमानना का दोषी भी माना जाएगा। नई गाइडलाइन के मुताबिक एससी-एसटी एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों की जांच के बिना किसी की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। लेकिन अब सीएम के इस बड़े बयान के बाद यह सभी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त हो गए हैं।

पढि़ए आदेश में क्या कहा था..
आदेश मेंं कहा गया है कि निर्दोष को झूठा फंसाने से बचाने के लिए आरोपोंं की प्रारंभिक जांच हो सकती है। यह जांच उप पुलिस अधीक्षक स्तर का अधिकारी करेगा। एेसे आरोपों में सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी केवल नियुक्तिकर्ता अधिकारी की लिखित अनुमति से की जा सकेगी। वहीं गैर सरकारी व्यक्तियों के मामले में पुलिस अधीक्षक की अनुमति लेना जरूरी होगा। अनुमति देने वाले अधिकारी को कारण बताना होगा। मजिस्ट्रेट इन कारणों की समीक्षा के बाद भी रिमांड तय करेगा। अग्रिम जमानत की भी अनुमति दे दी गई है।

इस बदलाव का देश भर में हुआ था विरोध
डॉ. सुभाष काशीनाथ महाजन बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी कानून में यही गाइडलाइन दी थी। दलित संगठनों ने इससे इस कानून की क्षमता को कम करने के तौर पर देखा था। कहा गया कि सरकार ने कानून के बचाव में ठीक से पैरवी नहीं की। २ अप्रैल को देश भर में प्रदर्शन हुए। हिंसा में 10 से अधिक लोगों की जान गई थी।

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