रेलवे कारखाने में बड़ा हादसा, खुले आम उड़ रही सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां, बिना सेफ्टी किट काम करने को कर्मचारी मजबूर

गंभीर रूप से घायल हेल्पर की स्थिति नाजुक, सौ से डेढ़ सौ फीट ऊंची क्रेन तक बिना सेफ्टी बेल्ट चढऩे के लिए क्रेन चालक मजबूर।

By: Bhupesh Tripathi

Published: 07 Mar 2020, 10:04 PM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित रेलवे के कारखाने से बड़ी लापरवाही सामने आई है। रेलवे के वैगन रिपेयर शॉप में मालगाड़ी कोच के मेंटेनेंस में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कारखाना प्रबंधन लगातार मरम्मत का टारगेट बढय़ा, लेकिन सेफ्टी बेल्ट, जैकेट और मास्क जैसी सुविधाएं मुहैया कराने में गंभीर नहीं हैं। जबकि कारखाना में अलग-अलग पांच शॉप में सौ से डेढ़ सौ ऊंचाई पर चलने वाली क्रेन के चालकों सहित उसमें चार-चार की संख्या में सौ से अधिक कर्मचारी क्रेन पर होते हैं। ऐसे कर्मचारी क्रेन तक पहुंचने के लिए सीढिय़ां चढ़ते हैं, जिनके पास सेफ्टी बेल्ट तक नहीं होता। सेफ्टी की अनदेखी के चलते 6 मार्च को गंभीर रूप से घायल हेल्पर की स्थिति नाजुक बनी हुई है।

रायपुर रेल मंडल का डब्ल्यूआरएस क्षेत्र में सबसे बड़ा कोच मरम्मत का कारखाना है, जिसमें लगभग 2 हजार से अधिक तकनीकी कर्मचारी और हेल्पर अनेक प्रांतों से काम करते हैं। जिनकी सुरक्षा में प्रबंधन खानापूर्ति करने में लगा हुआ है। साल-छह महीने में सेफ्टी बूट, दस्ताना, जैकेट देने के बाद खराब होने की स्थिति में उसकी सुध नहीं ली जाती। जबकि कर्मचारी अलग-अलग पालियों में मशनरी से खेलते हैं। कारखाना में हुई घटना को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश है। रेलवे मजबूर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति करते हुए कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा है। कोरोना वायरस को लेकर भी बायोमैट्रिक मशीन में पंच करने पर रोक लगाने की मांग की है।

मास्क तक नहीं देते, केवल टारगेट बढ़ाया
मालगाड़ी के डैमेज डिब्बों का मरम्मत करने के लिए पांच शॉप संचालित हैं। हर शॉप में चार-चार क्रेनें काफी ऊंचाई पर लगी हुई हैं, जो डैमेज बोगियों को इधर से इधर लिफ्ट करती हैं। क्रेनों में चालक सहित चार-चार के ग्रुप में कर्मचारी काम करते हैं। हर पॉली में 20 क्रेनों में 100 से अधिक कर्मचारी होते हैं। जिन्हें सुरक्षा के पुख्ता उपकरण नहीं दिए जाते हैं। हद तो यह है कि कोयला, राखड़ और सीमेंट की धूल-धक्कड़ से भरी हुई बोगियोंं से कारखाना के वर्कशॉप भर जाता है। इसे देखते हुए भी कर्मचारियों को मास्क जैसी सुविधा नहीं दी जाती।

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शादी करने का सपना संजोकर घर से लौटा था अजय
रेलवे कारखाना के बॉडी-1 सेक्शन में हादसा उस वक्त हुआ, जब क्रेन डैमेज बोगी को लिफ्ट कर रही थी, जिसमें अजय प्रधान नामक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुआ। वह हास्पिटल में जीवन और मौत से जूझ रहा है। प्रत्यक्षदर्शी कर्मचारियों का कहना है कि अजय डब्ल्यूआरएस के सरकारी आवास में अकेले रहता था। वह दो दिन पहले अपने गांव झारखंड से लौटा था। शादी करने के लिए सपना संजोए हुए था, छु्ट्टी लेकर वह अपने गांव लड़की देखने गया था। लौट कर ड्यूटी में आया ही था कि दुर्घटना का शिकार हो गया।

कारखाना में सुरक्षा को लेकर समीक्षा की जाती है। हेल्पर के गंभीर होने की खबर मिलते ही वर्कशॉप के अफसरों और रेलवे के डाक्टरों को लगातार निगरानी रखने कहा गया है। कर्मचारियों की सुरक्षा में लापरवाही नहीं बरती जा रही है।
प्रदीप कामले, मुख्य कारखाना प्रबंधक

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