एक बार पीपीई किट पहनने के बाद होती है इतनी गर्मी की घट जाता है पांच सौ ग्राम वजन, डाक्टरों ने साझा किये अपने अनुभव

आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी इतनी आसान नहीं। 10 दिन तक लगातार एम्स में ही रहकर मरीजों का उपचार करने वाले डॉक्टर/मेडिकल स्टाफ को अगले सात दिनों के लिए क्वारंटाइन में रहना होता है। इस दौरान उनका आरटी-पीसीआर टेस्ट होता है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 05 May 2020, 03:39 PM IST

रायपुर. कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ का वायरस के विरुद्ध सबसे बड़ा हथियार है पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई) किट। इसलिए तो इस किट की सबसे ज्यादा मांग है। ये मेडिकल स्टाफ को सिर से लेकर पैर तक सुरक्षित रखती है। हम और आप इस किट को 10 मिनट भी पहनकर नहीं रह सकते। मगर, संक्रमित मरीजों की जान बचाने के लिए डॉक्टर इसे पहनकर 4-5 घंटे तक आइसोलेशन वार्ड में मौजूद रहते हैं, जो आसान नहीं है।

'पत्रिका' ने इस किट को लेकर एम्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अतुल जिंदल से बात की। शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. जिंदल एम्स के कोविड-19वार्ड में महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। वे बताते हैं- जब हम किट को पहनते हैं तो पसीना निकलना शुरू हो जाता है और यह लगातार उतरने तक निकलता रहता है। मैंने अभी मापा (मैजर) नहीं है, लेकिन इतना पसीना निकलने से 500 ग्राम वजन जरूर घटता होगा। अन-कंफर्टेबल होता है, लेकिन यही हमें सुरक्षित भी रखती है।

आइसोलेशन वार्ड में जाने के पहले की तैयारी

1- 20 सेकंड साबुन से हाथ धोना, फिर सेनिटाइजर से।

2- अंगूठी, कड़ा, माला जो भी गहने पहने हों, उतारने होते हैं।

3- शू-कवर पहना जाता है। फिर एक बार हाथ धोने पड़ते हैं।

4- पीपीई किट कैप वाली है तो ठीक, नहीं तो अलग से कैप पहनते हैं।

5- ग्लब्स पहनने हैं।

6- गाउन पहनते हैं, जो डॉक्टरों का नॉर्मल ड्रेस कोड होता है।

7- एन-95 मॉस्क पहना जाता है।

8- चश्मा और फिर फेश सील्ड, जो पूरी तरह से गर्दन के ऊपरी हिस्से को कवर करती है।

9- अंत में एक बार फिर ग्लब्स पहनते हैं जो की पीपी किट की स्लीप के ऊपर से होता है।

10- हर एक स्टेप के बाद हाथ सेनिटाइज किया जाता है। इसके बाद कोरोना संक्रमित मरीजों के आइसोलेशन वार्ड में डॉक्टर/स्टाफ इलाज के लिए जाते हैं। जैसा की 'पत्रिका' को एम्स में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अतुल जिंदल ने बताया।)

टॉयलेट जा सकते हैं, न पानी पी सकते हैं

एक बार किट पहन ली तो मेडिकल स्टाफ इस बीच में न तो टॉयलेट जा सकते हैं, न पानी पी सकते हैं। इसलिए ये पहले से खुद को तैयार करते हैं। किट दोबारा उपयोग में नहीं लाई जा सकती। यह महंगी है, इसका भी ध्यान रखना होता है। किट समेत सभी मेडिकल उपकरण नष्ट किए जाते हैं।

रिपोर्ट नेगेटिव तो मिलती है तीन दिन की छुट्टी

आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी इतनी आसान नहीं। 10 दिन तक लगातार एम्स में ही रहकर मरीजों का उपचार करने वाले डॉक्टर/मेडिकल स्टाफ को अगले सात दिनों के लिए क्वारंटाइन में रहना होता है। इस दौरान उनका आरटी-पीसीआर टेस्ट होता है। अगर रिपोर्ट नेगेटिव है तो उन्हें सिर्फ तीन दिनों के लिए घर जाने की अनुमति होती है, नहीं तो नहीं।

COVID-19
Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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