अंबेडकर अस्पताल में एक ही छत के नीचे कैंसर के इलाज के लिए करना होगा इंतजार

अंबेडकर अस्पताल में एक ही छत के नीचे कैंसर के इलाज के लिए करना होगा इंतजार

Deepak Sahu | Publish: Sep, 10 2018 03:36:15 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

एक छत के नीचे कैंसर के मरीजों का समुचित इलाज करने की मंशा मशीन के आने के बावजूद भी पूरी नहीं होती दिखाई दे रही है

विकास सोनी@रायपुर. प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल और क्षेत्रीय कैंसर संस्थान अंबेडकर अस्पताल में 12 करोड़ की लागत से पैट सीटी स्कैन और गामा मशीन आने वाली है, लेकिन अबतक इसके संचालन सहित स्थापित करने की व्यवस्था नहीं बन पाई है।

प्रबंधन ने शासकीय सेटअप में खामियां होने पर पीपीपी मोड पर इसके संचालन की मंशा तो जाहिर की है, जबकि इसके लिए अबतक जिम्मेदारी भी तय नहीं हो पाई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. विवेक चौधरी ने बताया कि इस मशीन के २५ सितंबर तक आने की संभावना है, जिसके लिए भवन निर्माण की व्यवस्था बनाने पीडब्लूडी को फंड जारी कर दिया गया है। एेसे में एक छत के नीचे कैंसर के मरीजों का समुचित इलाज करने की मंशा मशीन के आने के बावजूद भी पूरी नहीं होती दिखाई दे रही है। वहीं, अधिकारियों के मुताबिक मरीजों के लिए इसे पूर्ण रूप से तैयार होने में तीन माह का समय लगने की आशंका जताई जा रही है।

सरकारी सेटअप में खामियां
पीपीपी मोड पर इसके संचालन के सवाल पर अधीक्षक ने बताया, कि सरकारी सेटअप के अनुसार इसके लिए असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉक्टर व तकनीशियन की आवश्यकता होगी, जिसमें उनका वेतनमान 60 हजार से १.५ लाख रुपये तक है। वहीं, निजी संस्थानों में इसके लिए इससे कहीं ज्यादा वेतन दिया जाता है। साथ ही मशीन में उपयोग में लाई जाने वाली डाई बेंगलूरु और हैदराबाद से मंगाई जाएगी। इसकी हाफ लाइफ ४५ मिनट की होती है। एेसे में शासकीय नियमों के अनुसार इनका विधिवत संचालन संभव नहीं है।

 

ambedkar hospital

क्या है पैट सीटी मशीन
पैट सीटी स्कैन मशीन से जांच के लिए रेडियोएक्टिव ग्लूकोज सॉल्यूशन को मरीज हाथ में इंजेक्ट किया जाएगा। जिसके बाद पूरे में शरीर में कोशिकाओं के असामान्य व्यवहार को रेकॉर्ड कर कैंसर सहित ब्रेन और हार्ट की बीमारी का पता लगाया जाएगा। इससे पहले यह कार्य एमआरआइ और सीटी स्कैन की सहायता से किया जाता था, जो कि सौ फीसदी सटीक नहीं हो पाता है। वहीं, पीपीपी मोड से इसका संचालन 24 घंटे किया जाएगा, जो कि निजी संस्थानों से आधी कीमत 8000 रुपये में हो जाएगा।

इसकी स्थापना के लिए जगह चिन्हित कर पीडब्लूडी को जिम्मेदारी दी गई है। संभवत: यह मशीन माह के अंत तक आ जाएगी। जिसके इंस्टालेशन सहित अन्य कार्य में तीन माह का समय लग सकता है।
डॉ. विवेक चौधरी, अधीक्षक, आंबेडकर अस्पताल

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