4 माह से बंद कैथलैब में जुलाई से शुरू हो जाएगी एंजियोप्लास्टी, दिल की सभी बीमारियों का होगा इलाज

पुरानी कैथलैब मशीन बार-बार खराब हो रही थी, जिसके चलते एसीआई द्वारा नई मशीन का प्रस्ताव विभाग को दिया गया। जिसे मंजूरी मिलते ही छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) ने टेंडर की प्रक्रिया की और फरवरी-मार्च में जर्मनी से मशीन की सप्लाई हो गई।

By: Karunakant Chaubey

Published: 26 Jun 2020, 10:52 PM IST

रायपुर. पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अंतर्गत संचालित एडवांस कॉर्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में मध्य भारत की सबसे एडवांस कैथलैब यूनिट बनकर तैयार हो चुकी है। बस इंतजार है तो सिर्फ क्वॉलिटी लाइसेंस का, जिसकी कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लाइसेंस देने वाली एजेंसी के अधिकारी सोमवार को पहुंचने वाले हैं, मशीन का ट्रायल लेंगे। संभव है कि मंगलवार-बुधवार तक लाइसेंस जारी हो जाए।

गौरतलब है कि पुरानी कैथलैब मशीन बार-बार खराब हो रही थी, जिसके चलते एसीआई द्वारा नई मशीन का प्रस्ताव विभाग को दिया गया। जिसे मंजूरी मिलते ही छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) ने टेंडर की प्रक्रिया की और फरवरी-मार्च में जर्मनी से मशीन की सप्लाई हो गई। मशीन इंस्टॉलेशन और इसी बीच कोरोना महामारी के चलते हार्ट की प्रोसिजर बंद कर दी गई। मगर, अब उन सभी मरीजों की हार्ट की प्रोसिजर होंगी, जो वेटिंग में हैं।

'पत्रिका' टीम शुक्रवार को एसीआई पहुंची, जहां मशीन सप्लाई करने वाली कंपनी के इंजीनियर्स मशीन के सभी कनेक्शन की आखिरी बार जांच कर रहे थे। इन्होंने बताया कि मशीन पूरी तरह से काम करने के लिए तैयार है। सूत्रों के मुताबिक कॉलेज प्रबंधन बड़े स्तर पर इसके उद्घाटन की तैयारी में है। अगर, मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री से समय नहीं मिलता है तो इलाज की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, ताकि मरीजों को जल्द से जल्द लाभ मिल सके। क्योंकि बड़ी संख्या में वेटिंग हैं।

सरकार के बचे 6.50 करोड़ रुपए

नई कैथलैब मशीन की कीमत 10 करोड़ रुपए है। मगर, पुरानी कैथलैब मशीन के बदले नई मशीन एसीई को सिर्फ 3.47 करोड़ रुपए में पड़ी। इससे सरकार के 6.50 करोड़ रुपए बचे।

सभी सरकारी योजनाओं में नि:शुल्क इलाज-

कैथलैब के जरिए एसीआई में सरकारी योजनाओं में दिल की सभी बीमारियों का नि:शुल्क उपचार होगा। आयुष्मान भारत और डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर, अलग-अलग प्रकार की स्टेंटिंग और दिल के सुराग बंद करने के पैकेज रेट निर्धारित हैं। अब मरीजों को निजी अस्पतालों का रूख नहीं करना होगा। सारी प्रोसिजर की दरें, बेड चार्ज, पेङ्क्षडग वार्ड चार्ज की दरें भी निर्धारित कर दी गई हैं।

कोरोना काल में भी जारी है आपातकालीन सेवाएं-

एसीआई में मेडिकल कॉलेज के दो विभाग कॉर्डियोलॉजी और कॉर्डियक थोरोसिक सर्जरी संचालित है। इन दोनों ही विभागों में दो-दो सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टर पदस्थ हैं। कोरोना काल में इन्होंने आपातकालीन सभी सेवाएं जारी रखीं। कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्मित श्रीवास्तव की टीम ने कई बड़े प्रोसिजर की, जैसे पेसमेकर लगाना। तो वहीं कॉर्डियक सर्जन डॉ. केके साहू ने कई जटील सर्जरी, जिसमें टूटी पसलियों को जोड़ा जाना। हालांकि अभी बायपास सर्जरी शुरू नहीं हुई है क्योंकि अभी कई उपकरणों और मशीनों की जरुरत है, जो सीजीएमएससी ने सप्लाई नहीं किए हैं।

मशीन इंस्टॉल हो चुकी है, बस इसके संचालन के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है जिसे लेकर टीम निरीक्षण करने के लिए आने वाली है। हमारी तरफ से पूरी तैयारी है। जुलाई में उद्घाटन करवाएंगे।

डॉ. स्मित श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, कॉर्डियोलॉजी, एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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