वन्य प्राणियों पर संकट

वन्य प्राणियों पर संकट

Gulal Prasad Verma | Publish: Sep, 05 2018 06:41:18 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

डायरिया से तीन चौसिंघों की मौत

कानन पेंडारी के वन्य प्राणियों पर बीमारी का संकट छा गया है। डायरिया की चपेट में आने से पिछले दिनों तीन चौसिंघों की मौत हो गई। जबकि तीन की हालत नाजुक है, जिन्हें रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है। लगातार बारिश से केज में पानी भरने और चौसिंघों की चहलकदमी से कीचड़ ही कीचड़ हो गया। ऊपर से दूषित पानी पीने के कारण चौसिंघे डायरिया की चपेट में आ गए। महीनेभर पहले ही कानन पेंडारी प्रबंधन की लापरवाही से एक शुतुरमुर्ग की भी मौत हो चुकी है।
प्रदेश के मिनी जू में शुमार कानन पेंडारी की हालत कुछ ठीक नहीं है। सब कुछ भगवान भरोसे है। वन्य प्राणी अगर जी रहे हैं तो यह कुदरत का कुछ करिश्मा जैसा ही है। कानन पेंडारी अब वन्य प्राणियों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। यहां लगभग ६०० वन्य प्राणी एवं पशु-पक्षी रहते हैं। वर्ष २०१४ में २२ हिरण जहरीली घास खाने से काल के गाल में समा गए। लेकिन आज तक दोषियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। उस समय राजनीतिक दलों के साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी इस मामले को लेकर शोर-शराबा किया, लेकिन कुछ दिन तक हो-हल्ला मचने के बाद सब कुछ टॉय-टॉय फिस्स हो गया। इसी तरह दो वर्ष पहले शेरनी ने चार स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, लेकिन कानन-प्रबंधन की लापरवाही के चलते ये शावक बीमार पड़ गए। उन्हें निमोनिया ने पकड़ लिया और फिर एक-एक कर सभी शावकों ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद भी नागरिकों सहित राजनीतिक दलों के लोगों ने तमाम तरह के वादे किए, लेकिन कानन पेंडारी के दोषी लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। नक्कारखाने में तूती की आवाज की तरह लोगों की आवाजें भी दब गईं। आखिर यह कब तक चलता रहेगा और लोगों की आवाजें दबाई जाती रहेंगी।
छत्तीसगढ़ के दूसरे प्रमुख शहर बिलासपुर में स्थित कानन पेंडारी को सुरम्य प्राकृतिक वातावरण वाला स्थल माना जाता रहा है। साल का पहला दिन हो अथवा कोई तीज-त्योहार, शहर से हजारों की संख्या में युवक-युवतियों सहित लोग कानन-पेंडारी घूमने जाते हैं। उनका मानना है कि कुछ क्षण प्रकृति की गोद में बैठने व तरोताजा हवा लेने से मन व शरीर दोनों को ही आनंद मिलता है। लेकिन इस बीच वन्य प्राणियों के साथ हुई कई घटनाओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। कहतें हैं जब वन्य प्राणियों के ही अनुकूल कानन का वातारण नहीं है तो आम नागरिकों के लिए तो वहां जाना किसी खतरे से कम नहीं है।
बहरहाल, शासन-प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को चाहिए कि कानन प्रबंधन की नकेल कसे अन्यथा इसी तरह कानन के वन्य जीव मरते रहेंगे और एक दिन सब कुछ बिखर जाएगा। सरकार को वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाना चाहिए, ताकि मिनी जू का अस्तित्व हमेशा कायम रहे।

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