scriptasthi have been kept in shelves for last two years. | अस्थियों को अपनों के लौटने का इंतजार, पिछले दो सालों से रखी हुई है अलमारियों में | Patrika News

अस्थियों को अपनों के लौटने का इंतजार, पिछले दो सालों से रखी हुई है अलमारियों में

इस संसार से मुक्ति पाने के लिए यहां पुरखों का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। दो साल से करीब दर्जन भर अस्थि कलश रामनगर मुक्तिधाम में रखी हुई है। पितृ पक्ष में पुरखों की आत्मा की शांति के लिए उनके तर्पण की परंपरा सदियों पुरानी है। पहले इन पुरखों को कोरोनाकाल में आखिरी सफर के दौरान अपनों का कंधा नसीब नहीं हुआ। अब गंगा में फूल सिराए जाने की आखिरी रस्म को अदा करने परिवार से कोई नहीं आ रहा है।

रायपुर

Published: September 14, 2022 10:07:31 am

भिलाई . कोरोना महामारी के दौरान सैकड़ों की संख्या में लोगों की मौत हुई। कोविड-19 प्रोटोकॉल की वजह से मृतकों को पहले ही अपनों का कांधा तक नसीब नहीं हुआ। प्रशासन ने अंतिम संस्कार रामनगर मुक्तिधाम में करवाया। इसके बाद फूल को एकत्र कर अस्थि कलश में रखा गया और अब तक नदी में उसका विसर्जन नहीं किया गया है। मुक्तिधाम की अलमारियां अस्थि कलश से भरते जा रही है।

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सुपेला निवासी पंडित प्रदीप शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार किया जाता है, इसके बाद चिता से फूल को एकत्र कर एक कलश में रखा जाता है। दस दिन में उन्हें गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। इसके पीछे यह मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों की भटकती आत्मा को मुक्ति मिल जाती है।

अस्थि कलश से बेरुखी
कोविड-19 के प्रोटोकॉल की वजह से संक्रमित शवों का परपंरा के मुताबिक अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका। शव को घर लेकर जाते। वहां से अंतिम यात्रा निकलती और अपनों के कांधों में मुक्तिधाम तक लाया जाता। वहां पूरे रस्म के साथ अंतिम संस्कार किया जाता। यह सब कुछ कोरोना ने पहले ही छीन लिया। अब अस्थि कलश से अपनों ने बेरुखी कर रखी है। रामनगर मुक्तिधाम के कर्माचारी प्रताप सिंह ने बताया कि वह हर दिन इन अस्थियों के कलश को अगरबत्ती दिखा कर पूजा करते हैं। प्रार्थना करते हैं जिनकी भी यह अस्थियां हैं, उनकी आत्मा को शांति मिले।

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