ऑटोमोबाइल्स ने पिछली नवरात्रि का रिकॉर्ड तोड़ा, शहरों के साथ गांवों से हुई बड़ी खरीदारी

पिछले साल की तुलना में इस साल ऑटोमोबाइल्स में नया कीर्तिमान

By: VIKAS MISHRA

Updated: 28 Oct 2020, 05:19 PM IST

रायपुर. ऑटोमोबाइल्स सेक्टर ने त्यौहारी सीजन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस साल नवरात्रि में वाहनों की खरीदी बिक्री ने पिछले साल के नवरात्रि मेंं हुए व्यवसाय का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। राज्य सरकार से जारी आंकड़ों के मुताबिक कोरोना संकट के बावजूद छत्तीसगढ़ के त्यौहारी बाजार में वाहनों की जमकर खरीदारी हुई।
पिछले नवरात्रि की तुलना में इस साल ज्यादा ट्रैक्टर और मोटर कार बिके। ना सिर्फ शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के शो-रूम से खूूब वाहन निकले। ऑटोमोबाइल्स डीलर्स ने भी व्यवसाय पर संतुष्टि जताई है, वहीं राज्य सरकार का कहना है कि संकट के बावजूद प्रदेश के त्यौहारी बाजार में अच्छी रौनक दिख रही है। वाहन बाजार से मिले आंकड़ों के अनुसार पिछले नवरात्रि की तुलना में इस बार की नवरात्रि में ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्र के लोगों ने जमकर वाहनों की खरीदी की है। वर्ष 2019 में नवरात्र के दौरान जहां 417 एग्रीकल्चर ट्रेक्टर बिके थे, वहीं इस साल 679 ट्रेक्टरों की बिक्री हुई। इसी तरह कमर्शियल ट्रैक्टर पिछले साल 28 बिके थे, जबकि इस साल यह संख्या 35 रही।
फैमिली कार की बिक्री बढ़ी
6 लाख तक की छोटी कार के साथ-साथ अब 8 से 9 लाख रुपए में फैमिली कार की डिमांड मार्केट में बढ़ गई है। ऑटोमोबाइल्स सेक्टर के डीलर्स के मुताबिक राजधानी में 1400 से 1500 चार पहिया और 3500 के करीब दोपहिया की बिक्री रही। रायपुर ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीषराज सिंघानिया ने बताया कि अंतिम आंकड़े रजिस्ट्रेशन के बाद सामने आएगा। नवरात्रि अच्छी रही। फैमिली कार की बिक्री में पहली बार इतना इजाफा देखा गया।
95 फीसदी तक फाइनेंस
ऑटोमोबाइल्स सेक्टर में इस साल पहली बार फाइनेंस कंपनियों ने 95 फीसदी फाइनेंस की स्कीम लागू की है। 5000 से 6000 रुपए के डाउनपेमेंट पर दो पहिया और 11 हजार या 21 हजार की बुकिंग पर चार पहिया की सवारी का मौका लोगों को मिला। इसी तरह ट्रैक्टर या अन्य वाहनों की खरीदी पर भी स्कीम ने लोगों को आकर्षित किया।

किसानों की जेब में गया पैसा
छत्तीसगढ़ सरकार नेऑटोमोबाइल्स में व्यवसाय की वृद्धि का असर राज्य सरकार की जनहितकारी योजनाओं को माना है। राज्य सरकार के मुताबिक किसानों की जेब में पैसा डालने के बाद खरीदी क्षमता में वृद्धि हुई है। एक ओर जहां पूरे देश में आर्थिक मंदी और बेरोजगारी का माहौल देखा जा सकता है, वहीं किसानों के खाते में संकट के समय पैसा डालने, लॉकडाउन में उद्योग का संचालन सुचारू रखकर रोजगार के अवसर को बनाए रखने, मनरेगा के माध्यम से सर्वाधिक रोजगार देने जैसे अभिनव प्रयासों का ही यह असर है कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था पूरी रफ्तार के साथ गतिमान रही।

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