गजब का धोखा...गए थे मोबाइल नंबर पोर्ट-वाट्सएप ठीक कराने, दोनों के खाते से निकल गए हजारों रुपए

रायपुर में अनोखे अंदाज में ठगी की दो घटनाएं, लोन लेने के मामले भी आ चुके हैं सामने

रायपुर. मोबाइल नंबर पोर्ट कराने, नया खरीदने या अन्य शैक्षणिक कार्यों में आधार कार्ड और बॉयोमैट्रिक्स चिन्ह देते समय सावधान रहें और सुनिश्चित कर लें कि इन सामग्रियों का दुरुपयोग नहीं होगा, अन्यथा आप ऑनलाइन ठगी के शिकार हो सकते हैं।
पुरानी बस्ती इलाके के दो बुजुर्ग मोबाइल नंबर पोर्ट कराते समय इसी तरह की धोखाधड़ी के शिकार हो गए। दुकानदार ने उनसे आधार कार्ड और थंब इंप्रेशन लिया। इसके बाद चुपके से उनके बैंक खाते से राशि निकाल ली। पीडि़तों ने बैंक के जरिए पूरी जानकारी हासिल की। इसके बाद मोबाइल दुकान संचालिका के खिलाफ थाने में शिकायत की। पुरानी बस्ती पुलिस ने आरोपी युवती के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला कायम कर लिया है। इस तरह की ऑनलाइन ठगी का रायपुर में पहला मामला है, जिसमें मोबाइल नंबर पोर्ट करने के नाम पर ठगी
की गई है।
कर सकते हैं दुरुपयोग
मोबाइल का नया नंबर लेने, पोर्ट कराने या शैक्षणिक कार्यों के लिए अधिकांश लोग अपने आधार कार्ड और बॉयोमैट्रिकस इंप्रेशन देते हैं। साथ ही आधार कार्ड से मनी ट्रांसफर का काम धड़ल्ले से चल रहा है। पुरानी बस्ती की घटना की तरह अन्य स्थानों पर इसके दुरुपयोग की आशंका है। इससे अलर्ट रहने की जरूरत है।
वाट्सएप ठीक करने के नाम पर ठगी
पुरानीबस्ती सोनकरपारा निवासी 66 रमेश कुमार आहूजा के मोबाइल में वाट्सएेप खराब हो गया था। इसे ठीक कराने के लिए 2 दिसंबर 2019 को वह शांति चौक स्थित शिवम मोबाइल शॉप पहुंचा। वाट्सएेप ठीक करने के लिए बुजुर्ग से दुकान संचालिका शिखा कौशिक ने आधार कार्ड और थंब इंप्रेशन मांगा। इस पर आपत्ति करने पर उसने कहा कि मोबाइल एेप को ठीक करने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है। रमेश कुमार ने आधार कार्ड और थंब इंप्रेशन दिया। इसके बाद वह चला गया। उसी रात उनके खाते से 10 हजार रुपए निकल गए। इसकी जानकारी उन्हें नहीं हो पाई। इसके बाद 7 दिसंबर 2019 को उनका वाट्सएेप फिर बंद हो गया। रमेश फिर शिखा के पास गया। शिखा ने दोबारा वही प्रक्रिया दोहराई। इससे उस फिर उनके खाते से १० हजार का आहरण हो गया। फिर 30 दिसंबर 2019 को वह फिर वाट्सएेप की गड़बड़ी ठीक कराने गया। आरोपी युवती ने फिर उसी तरीके से उसके बैंक खाते से 10 हजार का आहरण कर लिया। इस तरह उसने तीन बार में ३० हजार रुपए का आहरण कर लिया। इसकी जानकारी रमेश को नहीं हो पाई। बाद में उसने बैंक से जानकारी निकाली। इसके बाद ठगी का पता चला। उसने थाने में शिकायत की। पुलिस ने आरोपी शिखा के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया।
नंबर पोर्ट के नाम पर बुजुर्ग को दिया झांसा

पुरानी बस्ती निवासी 68 वर्षीय बुजुर्ग नंदकिशोर अग्रवाल २५ जनवरी को शांति चौक स्थित शिवम मोबाइल दुकान गए। दुकान में उन्होंने अपना जियो का सिम आइडिया में पोर्ट कराने के लिए दिया। दुकान संचालिका शिखा उर्फ दीपिका कौशिक ने इस दौरान नंदकिशोर से उनके आधार कार्ड की फोटोकॉपी और बॉयोमैट्रिक्स निशान के लिए थंब इंप्रेशन लिया। इसके बाद एक सप्ताह के भीतर मोबाइल नंबर पोर्ट हो जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद 28 जनवरी को नंदकिशोर यूनियन बैंक के अपने एटीएम कार्ड से पैसे निकाले। इसकी स्लीप में उनके खाते से २५ जनवरी को शाम 7.54 बजे 10 हजार रुपए निकलना बताया। उन्हें मोबाइल दुकान वाली युवती पर शक हुआ। उन्होंने उससे पूछताछ की। युवती ने पैसा निकालने से इनकार कर दिया। इसके बाद बुजुर्ग ने बैंक प्रबंधन से अपने खाते से निकली राशि के संबंध में जानकारी ली। इससे पता चला कि 10 हजार रुपए मोबाइल दुकान संचालिका युवती के खाते में गया है। इसके बाद बुजुर्ग ने इसकी शिकायत पुरानी बस्ती थाने में की। पुलिस ने शिखा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
एेसे निकालते हैं आधार कार्ड से पैसा
वर्तमान में एेसे कई कंपनियां हैं, जो साफ्टवेयर या मोबाइल एप के माध्यम से केवल आधार कार्ड के जरिए एक बैंक खाते से पैसे निकालकर दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर कर रही है। इसमें आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के तहत भुगतान करते हैं। इसका उपयोग अधिकांश मोबाइल दुकान, मनी ट्रांसफर करने वाले करते हैं। इसमें बैंक से लिंक आधार कार्ड और बॉयोमैट्रिक्स इंप्रेशन की जरूरत पड़ती है। दोनों चीज होने पर किसी के खाते से भी आसानी से पैसा निकाला जा सकता है। बुजुर्ग नंदकिशोर और रमेश आहूजा के साथ इसी तरीके से ठगी हुई है।
किस काम के लिए दे रहे हैं लिखा हो
विशेषज्ञों के मुताबिक गोपनीय दस्तावेजों की फोटोकॉपी किसी भी संस्थान, कंपनी, टेलीकॉम सेक्टर, मोबाइल सिम या दफ्तर में देते समय संबंधित कार्य का उल्लेख फोटोकॉपी के बीचो-बीच लिखा जाना चाहिए। यदि आप सिम कनेक्शन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि दे रहे हैं तब भी फोटोकॉपी में सिर्फ सिम कनेक्शन के लिए उपयोग पेन से लिखा होना चाहिए, ताकि किसी दूसरे उपयोग के लिए दस्तावेजों का फर्जीवाड़ा नहीं हो सके।
सेंंट्रल जीएसटी में पकड़ा
सेंट्रल जीएसटी ने इसी तरह का मामला बीते दिनों छत्तीसगढ़ में उजागर किया था, जिसमें कई कंपनियों के छोटे कर्मचारियों के दस्तावेजों के नाम पर कई फर्में बनाकर करोड़ों का फर्जीवाड़ा किया। जब टीम जांच के लिए पहुंची तो पता चला संबंधित व्यक्ति कोई फैक्ट्री का मालिक नहीं है, बल्कि गरीब आदमी है।

Nikesh Kumar Dewangan Desk
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned